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अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष द्वारा चीन पर क़रारा प्रहार – हाँगकाँग, कोरोनावायरस, बुद्धिसंपदा चोरी इन जैसे मुद्दों को लेकर चीन पर तोप दागी

चीन, डोनाल्ड ट्रम्प, कोरोनाव्हायरस, अमेरिका

वॉशिंग्टन – ‘अमरीका चीन के साथ खुले और रचनात्मक संबंध रखना चाहती है। लेकिन ये संबंध रखे जाने के लिए अमरिकी हितसंबंधों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना बहुत ही महत्त्वपूर्ण है’, ऐसा कहकर अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने, चीन की हरक़तों के ख़िलाफ़ स्पष्ट भूमिका अपनानेवाले निर्णय की घोषणा की। यह घोषणा करते समय ट्रम्प ने, हाँगकाँग का क़ानून, कोरोनावायरस, अमरीका की बुद्धिसंपदा की चोरी तथा निवेश, इन जैसे मुद्दों को लेकर चीन के विरोध में क़रारे प्रहार किये। इस समय अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष ने किये फ़ैसलें, अमरीका और चीन के बीच निर्णायक संघर्ष शुरू होने के संकेत देनेवाले हैं।

चीन, डोनाल्ड ट्रम्प, कोरोनाव्हायरस, अमेरिकाराष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने जबसे अमरीका की बाग़डोर सँभाली है, तबसे लगातार चीनविरोधी भूमिका अपनायी थी। गत तीन वर्षों में डोनाल्ड ट्रम्प ने अलग अलग मुद्दों को लेकर चीन को लक्ष्य करनेवाले फ़ैसलें किये थे। ये फ़ैसलें करते समय ही, चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग मेरे दोस्त हैं, ऐसा कहकर व्यापारी समझौते जैसीं बातों पर सकारात्मक भूमिका भी अपनायी थी। लेकिन कोरोनावायरस की महामारी के हँडलिंग को लेकर राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प चीन के खिलाफ़ बहुत ही भड़के होकर, एक के बाद एक आरोपों की बौछार कर रहे हैं। शुक्रवारी व्हाइट हाउस में हुई पत्रकार परिषद में ट्रम्प ने, अमरीका एक ही समय पर चीन को कई मोरचों पर संघर्ष करने पर मजबूर करेगी, ऐसे निर्णयों की घोषणा की।

‘चीन की सत्ताधारी हुक़ूमत ने अमरीका समेत आंतर्राष्ट्रीय समुदाय के कई देशों को दिये अभिवचनों का पालन नहीं किया है और यह बात नज़रअन्दाज़ करने जैसी यक़ीनन ही नहीं है। चीन पिछले कई वर्षों से अमरीका की व्यापारी लूट करता आया है और उसमें से उन्हों ने अरबों डॉलर्स का मुनाफ़ा कमाया है। चीन ने अमरीका के कारख़ाने बन्द करवाये, लाखों लोगों के रोज़गार चले गए और चिनी लोग बुद्धिसंपदा की चोरी करते रहे। इतना ही नहीं, बल्कि जागतिक व्यापार संगठन के नियमों का भी चीन ने उल्लंघन किया। पॅसिफिक महासागर के प्रदेशों पर अतिक्रमण करके जागतिक व्यापार और यातायात में रोड़ें डालने की कोशिशें कीं। अब तो उन्होंने हाँगकाँग की स्वायत्तता के मुद्दे को लेकर सारी दुनिया को दिया आश्वासन भी तोड़ा है’, इन शब्दों में ट्रम्प ने चीन की सत्ताधारी हुक़ूमत की हरकतों की आलोचना की। उसके बाद अमरीका द्वारा लिये जा रहे निर्णयों की जानकारी देते हुए ट्रम्प ने, पहले कोरोनावायरस के मुद्दे को लेकर चीन को लक्ष्य किया।

चीन, डोनाल्ड ट्रम्प, कोरोनाव्हायरस, अमेरिका

दुनियाभर में लाखों जानें लेनेवाली इस महामारी के लिए चीन की हुक़ूमत और उस हुक़ूमत के हाथ की कठपुतली बना ‘डब्ल्यूएचओ’ यानी ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनायझेशन’ यह संगठन ज़िम्मेदार है, ऐसा आरोप अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष ने किया। चीन और ‘डब्ल्यूएचओ’ की मिलीभगत के कारण, अमरीका इस संगठन से किनारा कर रही होकर, उन्हें दी जानेवाली निधि भी पूरी तरह रोक दी जायेगी, ऐसा ट्रम्प ने घोषित किया। इस समय उन्होंने महामारी का उल्लेख ‘वुहान व्हायरस’ ऐसा ही करके, यह महामारी चीन में से ही शुरू होकर फ़ैलायी होने की बात फिर एक बार रेखांकित की।

‘चीन से गैली इस महामारी ने, अमरीका आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र होना कितना महत्त्वपूर्ण है, इसका फिर एक बार एहसास कराया। इसके आगे अमरिकी अर्थव्यवस्था सुदृढ एवं सक्षम बनाने के लिए चीन की हरकतों को रोकना ज़रूरी है। चीन द्वारा होनेवाली अमरीका के औद्योगिक रहस्यों की तथा बुद्धिसंपदा की चोरी रोकने के लिए चिनी संशोधक और छात्रों को इसके बाद अमरीका में प्रवेश नकारा जायेगा’, ऐसी घोषणा राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने की। उसी समय, आनेवाले कुछ दिनों में, अमरिकी कंपनियाँ और निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहें, इसलिए चीन के निवेश पर नये निर्बंध लगाने का निर्णय घोषित किया जायेगा, ऐसा भी ट्रम्प ने कहा।

‘हाँगकाँग के लिए ‘वन कंट्री, टू सिस्टिम्स’ इस व्यवस्था पर अमल करने का अभिवचन देनेवाली चिनी हुक़ूमत ने अब वहाँ पर ‘वन कंट्री, वन सिस्टीम’ लागू करने की कोशिशें शुरू कीं हैं। चीन की हुक़ूमत ने इकतरफ़ा निर्णय लेकर हाँगकाँग पर थोंपा हुआ सुरक्षा क़ानून उस शहर की स्वायत्तता नष्ट करनेवाला है। यह घटना केवल हाँगकाँग की जनता के लिए ही नहीं, बल्कि चिनी जनता और जागतिक समुदाय के लिए भी शोकांतिका साबित होनेवाली है’, इन शब्दों में तीव्र नापसंदगी ज़ाहिर करते हुए, ट्रम्प ने, अमरीका ने हाँगकाँग को बहाल किया हुआ स्पेशल स्टेटस हटा देने की प्रक्रिया शुरू हुई है, ऐसा घोषित किया। उसी समय, अब इसके बाद हाँगकाँग के लिए ‘ट्रॅव्हल ऍडव्हायझरी’ जारी की जायेगी, ऐसी जानकारी भी दी।

पिछले दो महीनों से अमरीका में ट्रम्प प्रशासन ने कोरोना महामारी के मुद्दे को लेकर चीन के विरोध में खुले आम राजनैतिक संघर्ष छेड़ा था। यह संघर्ष केवल एक ही मुद्दे पर के निवेदन और चेतावनी तक ही सीमित नहीं था। बल्कि अमरीका की संसद में अलग अलग क्षेत्रों में चीनविरोधी प्रस्ताव और विधेयक भी मंज़ूर किये जा रहे थे। उनमें चीन के लिए संवेदनशील होनेवाले तैवान, तिबेट, उघुरवंशीय, ५जी जैसे मुद्दों का भी समावेश था। राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने पत्रकार परिषद में घोषित किये फ़ैसलों से यह साफ़ साफ़ दिखायी दे रहा है कि अब अमरीका सभी मुद्दों को लेकर चीनविरोधी संघर्ष के अगले चरण में उतरी है।

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