इस्रायल की संसद में ‘ब्रेकिंग द सायलन्स बिल’ मंजूर

जेरूसलेम – इस्रायल साथही इस्रायली सेना की आलोचना करने वालों को स्कूल और विश्‍वविद्यालय में प्रवेश नकारने वाला ‘ब्रेकिंग द सायलन्स’ विधेयक इस्रायल की संसद ने मंजूर किया। इस विधेयक से इस्रायल की सरकार और सेना पर आलोचना करने वाले संगठन पर सख्त कार्रवाई करने के अधिकार इस्रायली शिक्षा मंत्री के पास आए है। इस विधेयक से इस्रायल ने ज्यू धर्मियों का देश की तरफ कदम बढ़ाया, ऐसा कहा जाता है। इस पर इस्रायल के उदारतावादीयों ने कडी नाराजगी जताई है।

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इस्रायल की संसद में ‘ब्रेकिंग द सायलन्स’ इस विधेयक पर पिछले कुछ महीनों से चर्चा शुरू थी। मंगलवार को देर रात इस्रायल की संसद में सत्ताधारी और विरोधकों ने इस विधेयक पर मतदान किया। इसमें ४३ सांसदो ने इस विधेयक के समर्थन में वहीं २४ लोगों ने विरोध में वोट दिया। इस्रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यान्याहू और विदेशमंत्री एविग्दोर लिबरमन ने इस फैसले का स्वागत किया।

इस्रायल साथही सेना के विरोधी व्यक्ति तथा गुट पर इस विधेयक के कारण कार्रवाई होगी। इस्रायल के खिलाफ विचारधारा तैयार करने वाले अथवा स्कूल-विश्‍वविद्यालयों में उकसाने वाला भाषण कर व्यक्ति अथवा गुट को प्रवेश देने से इन्कार करना, उन पर बंदी डालने का अधिकार इस विधेयक से सरकार को मिला है। इस्रायल के शिक्षा मंत्रालय ने भरोसा जताया कि, इससे इस्रायल की सेना और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ शुरू कारनामे बंद होंगे।

कुछ महिनों पहले ‘ब्रेकिंग द सायलन्स’ नामक गुट ने स्कूल और विश्‍वविद्यालय में जाकर नेत्यान्याहू सरकार साथही इस्रायली सेना द्वारा गाझा और वेस्ट बँक में किए जा रहे कार्रवाईयों के खिलाफ उकसाना शुरू किया था। इस्रायली विद्यार्थीयों को सरकार साथही सेना के खिलाफ भडकाते हुए असंतोष निर्माण करने की यह कोशिश थी, ऐसी आलोचना सेना ने की थी। इस संघटन में इस्रायल के अरब नागरीक साथही इस्रायल के कुछ पूर्व जवान भी शामिल थे।

इस संगठन और व्यक्ति पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इस्रायल की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, ऐसा दावा सेना के कुछ अधिकारीयों ने किया था। इस पृष्ठभूमी पर, ‘ब्रेकिंग द सायलन्स’ यह विधेयक रखा गया था। दौरान इस्रायल में ऐसा कानून ना बन पाए इसलिए अमेरीका के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष बराक ओबामा ने की थी। इसके लिए ओबामा प्रशासन ने इस्रायल के सरकार पर दबाव डाला था।

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