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‘पैरासेल आयलैंड’ पर चीनी बॉम्बर्स की तैनाती से वियतनाम की संप्रुभता का उल्लंघन – वियतनाम के विदेश मंत्रालय का इशारा

हनोई – ‘साउथ चायना सी’ में स्थित पैलासेल आयलैंड पर चीन ने बॉम्बर्स और लड़ाकू विमानों की तैनाती करना वियतनाम की संप्रभुता का उल्लंघन है और इससे संबंधित क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बना है, ऐसा इशारा वियतनाम के विदेश मंत्रालय ने दिया है। ‘पैरासेल आयलैंड’ (होआंग सा) और स्प्राटले आयलैंड (ट्रुऑन्ग सा) यह दोनों द्विप वियतनाम के अभिन्न अंग हैं, यह इशारा भी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ले थी थु हांग ने दिया है। वियतनाम ने चीन को यह कड़ी चेतावनी देना साउथ चायना सी के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच विवाद में अधिक बढ़ोतरी होने के संकेत समझा जा रहा है।

‘पैरासेल आयलैंड’

बीते कुछ महीनों से साउथ चायना सी में चीन की गतिविधियां और भी आक्रामक हुई हैं। कोरोना की महामारी की पृष्ठभूमि पर इसी समुद्री क्षेत्र का हिस्सा होनेवाले छोटे एशियाई देशों पर चीन ने धौंसबाज़ी करके दबाव बनाने की कोशिशें शुरू की हैं। जुलाई महीने में फिलिपाईन्स के करीबी ‘मिसचिफ रीफ’ नामक कृत्रिम द्विप पर चीन ने अपने दो प्रगत विध्वंसक तैनात किए थे। साथ ही ‘स्प्राटले आयलैंड’ के क्षेत्र में ‘सुबी रीफ’ नाम से जाने जा रहे कृत्रिम द्विप पर ‘सुखोई 30 एमकेके’ लड़ाकू विमानों की तैनाती हो रही है, यह दावा भी किया गया था। इसी महीने के शुरू में चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के सदर्न, नॉदर्न एवं ईस्टर्न कमांड ने लड़ाकू विमानों के साथ बॉम्बर्स, फ्युल टैंकर्स, गश्‍ती विमान और ‘अर्ली वॉर्निंग एअरक्राफ्टस्‌’ ने युद्धाभ्यास करने की जानकारी भी चीन के सरकारी अख़बार ने साझा की है। वियतनाम के करीबी पैरासेल आयलैंड के क्षेत्र में प्रगत बॉम्बर्स और लड़ाकू विमानों की तैनाती इसी का अगला स्तर होने की बात दिख रही है।

‘पैरासेल आयलैंड’

इस तैनाती से पहले चीन ने पैरासेल आयलैंड का क्षेत्र अपना हिस्सा होने की बात साबित करने के लिए यह कदम उठाए थे। चीन के हैनान प्रांत से साउथ चायना सी के पैरासेल आयलैंड तक का क्षेत्र आगे से चीन का तटीय क्षेत्र यानी ‘कोस्टल एरिया’ के तौर पर जाना जाएगा, यह ऐलान चीन ने जुलाई महीने के अन्त में किया था। चीन ने वर्ष 1974 में पैरासेल आयलैंड कब्ज़ा करने के बाद इसका ज़िक्र चीन के समुद्री तट से दूरी पर स्थित (ऑफशोअर) के तौर पर किया था। इसमें बदलाव करके इस क्षेत्र को अब ‘ऑफशोअर’ के बजाय ‘कोस्टल’ कहकर चीन ने फिर एक बार साउथ चायना सी क्षेत्र पर अपना हक जताने की कोशिश की है।

‘पैरासेल आयलैंड’

लेकिन, साउथ चायना सी में अपनी वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षा पूरी करने की कोशिश कर रहे चीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चुनौती प्राप्त हो रही है। अमरीका और यूरोप के साथ विश्‍व के कई प्रमुख एवं छोटे-बड़े देश चीन की हरकतों के विरोध में खुलेआम भूमिका अपना रहे हैं। जून महीने में ‘कोहेसिव ऐंण्ड रिस्पोंसिव आसियन’ इन नामों के तहत आयोजित की गई आग्नेय एशियाई देशों की बैठक वियतनाम में हुई थी। इस बैठक के लिए ‘आसियन’ ने साउथ चायना सी में उकसानेवाली हरकतें कर रहे और लष्करीकरण करने की कोशिश में जुटे चीन पर भी कड़ी आलोचना की थी। इससे पहले आग्नेय एशियाई देशों ने साउथ चायना सी से संबंधित अमरीका ने अपनाई आक्रामक भूमिका का समर्थन करनेवाला निवेदन भी जारी किया था।

इन गतिविधियों को चुनौती देने के लिए चीन की पीपल्स लिब्रेशन आर्मी ने लष्करी तैनाती बढ़ाना शुरू किया हुआ भी दिखाई दे रहा है। पैरासेल आयलैंड पर तैनात किया गया ‘शिआन एच-6’ यह चीन की वायुसेना में मौजूद सबसे प्रगत बॉम्बर विमान के तौर पर जाना जाता है। पैरासेल आयलैंड का हिस्सा होनेवाले वुडी आयलैंड पर दो शिआन एच-6 जे बॉम्बर्स और कुछ लड़ाकू विमान तैनात होने की जानकारी सामने आयी है। चीन ने साउथ चायना सी के क्षेत्र में शुरू की हुई हरकतों के मुद्दे पर वियतनाम ने भारत से चर्चा करने की ख़बर भी प्रसिद्ध हुई है।

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