अमरीका के साथ बढ़ रहे तनाव की पृष्ठभूमि पर रशिया की ‘न्युक्लिअर ट्रेन’ शुरू करने की गतिविधियां

मास्को/वॉशिंग्टन – अमरीका और नाटो के साथ बढ़ रहे तनाव की पृष्ठभूमि पर रशिया में फिर से ‘न्युक्लिअर ट्रेन’ शुरू करने की गतिविधियां शुरू हुई हैं। रशिया के लष्करी विश्‍लेषकों ने इससे संबंधित संकेत दिए हैं। इससे पहले रशिया-अमरीका शीतयुद्ध के दौर में रशिया ने ‘रेल मिसाइल नेटवर्क’ सक्रिय किया था। अमरीका के साथ पश्‍चिमी देशों की उपग्रह यंत्रणाओं को चकमा देकर देश के कोने कोने में परमाणु अस्त्रों की यातायात करना संभव हो, इस उद्देश्‍य से यह यंत्रणा विकसित की गई थी।

अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने वर्ष २०१९ में रशिया और अमरीका के ‘आयएनएफ ट्रीटि’ नामक समझौते से बाहर होने का ऐलान किया था। इसके बाद अगले महीने में ‘न्यू स्टार्ट’ समझौते का अवधि भी समाप्त हो रहा है। यह दोनों समझौते अमरीका और रशिया के परमाणु अस्त्र एवं प्रगत मिसाइलों के नियंत्रण के लिए अहम समझे जाते हैं। इन समझौतों की अवधि खत्म होने से अमरीका और रशिया ने परमाणु अस्त्र और प्रगत मिसाइलें विकसित करने के लिए जोरदार गतिविधियां शुरू की हैं। बीते वर्ष दोनों देशों ने कुछ प्रगत मिसाइल और परमाणु अस्त्रों का परीक्षण करने की बातें भी सामने आयी थीं।

रशिया ने अपनी परमाणु नीति में बड़े बदलाव करना शुरू किया है। रशिया की नई परमाणु नीति के अनुसार परमाणु हमले के अलावा मिसाइल हमले पर भी परमाणु हमलें की तरह ही प्रत्युत्तर दिया जाएगा। रशिया के राष्ट्राधअयक्ष व्लादिमीर पुतिन ने इससे संबंधित जानकारी साझा की थी। अमरीका ने परमाणु नीति में किए बदलाव एवं विश्‍वभर की बदलती गतिविधियों की पृष्ठभूमि पर रशिया को यह बदलाव करना पड़ा, ऐसा रशिया कह रही है। ‘न्युक्लिअर ट्रेन’ दुबारा शुरू करना भी इसी तरह के बदलाव का हिस्सा समझा जा रहा है।

इससे पहले १९८० के दशक में उस समय की सोवियत रशिया ने ‘न्युक्लिर रेल नेटवर्क’ विकसित किया था। रेल से परिवहन संभव हो, इस उद्देश्‍य से रशिया ने ‘आरटी-२३ मोलोडेट्स’ नामक स्वतंत्र अंतरमहाद्विपीय मिसाइल का निर्माण किया था। इस मिसाइल का परिवहन करने के लिए १२ स्वतंत्र ट्रेन्स विकसित की गई थीं। रशिया के अलग अलग हिस्सों में २०० फायरिंग पॉर्इंट्स’ भी स्थापित किए गए थे। रशियन सेना की तीन अलग अलग डिविजन्स में ‘न्युक्लिअर ट्रेन्स’ की तैनाती की गई थीं।

वर्ष १९८७ से २००२ इस १५ वर्षों के दौरान यह ‘न्युक्लिअर ट्रेन्स’ रशियन सेना में सक्रिय थीं। इन ट्रेन्स का पता लगाना भी अमरीका को मुमकिन नहीं हुआ था, ऐसा दावा रशिया ने किया था। अमरीका के साथ ‘स्टार्ट ट्रीटि’ होने की पृष्ठभूमि पर इन ‘न्युक्लिअर ट्रेन्स’ को बंद करने का निर्णय किया गया था। इसके बाद वर्ष २०१५ के दौरान रशिया ने यह रेल नेटवर्क दुबारा सक्रिय करने के संकेत दिए थे। निधी की कमी के कारण यह योजना स्थगित करने की बात वर्ष २०१८ में स्पष्ट की गई थी।

लेकिन, बीते वर्ष से नए परमाणु अस्त्र और हायपरसोनिक मिसाइल विकसित करके उनका परीक्षण करने का सिलसिला शुरू करनेवाली रशिया ने फिर एक बार ‘न्युक्लिअर ट्रेन्स’ शुरू करने की गतिविधियां शुरू की हैं। रशिया के शीर्ष लष्करी विश्‍लेषक ऐलेक्सी लिऑनकोव और व्लादिमीर एवसीव ने इससे संबंधित संकेत दिए हैं। अगले तीन से पांच वर्षों में यह नेटवर्क पूरी तरह से सक्रिय हो सकता है, ऐसा एवसीव का दावा है। रशिया की सीमा के करीबी क्षेत्र में नाटो की लष्करी गतिविधियां बढ़ रही हैं और ऐसे में ‘न्युक्लिअर ट्रेन नेटवर्क’ ही इन गतिविधियों पर प्रभावी जवाब साबित होगा, यह इशारा भी रशियन विश्‍लेषकों ने दिया है।

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