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मुद्रा की रिकॉर्ड गिरावट के बाद लेबनान में भड़के हिंसक प्रदर्शन

 

बैरूत – खाड़ी क्षेत्र के लेबनान की मुद्रा ‘लेबेनिज पौंड’ की रिकॉर्ड गिरावट हुई है और इसका असर देशभर में होता दिखाई पड़ रहा है। शनिवार के दिन राजधानी बैरूरत में हिंसक प्रदर्शन हुए और इस दौरान प्रदर्शनकारी सीधे संसद के प्रवेशद्वार पर जा टकराए है, ऐसी खबर प्राप्त हुई है। लेबनान बीते डेढ़ वर्ष से राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। इसी बीच कोरोना की महामारी और ‘बैरूत पोर्ट ब्लास्ट’ की घटना से स्थिति काफी बिगड़ी है। अब मुद्रा की बड़ी गिरावट होने से अर्थव्यवस्था के टूटने का संकट बना है और यह बात बीते सदी में हुए गृहयुद्ध के बाद सबसे बड़ा खतरा साबित होगी, यह दावा माध्यमों द्वारा हो रहा है।

बीते कुछ महीनों में लेबनीज पौंड के मूल्य की करीबन ८० प्रतिशत गिरावट हुई है। लेकिन, शुक्रवार के दिन हुई गिरावट आज तक की सबसे बड़ी गिरावट साबित हुई है। शुक्रवार के दिन प्रति अमरिकी डॉलर के सामने लेबनीज पौंड का मूल्य १२,५०० होने की जानकारी सूत्रों ने प्रदान की। अधिकृत स्तर पर यह दर मात्र डेढ़ हज़ार पौंड दिखाया जा रहा है, फिर भी इस दर से डॉलर उपलब्ध ना होने की बात कही जा रही है।

मुद्रा की रिकॉर्ड गिरावट के कारण जनता में असंतोष की बड़ी भावना है और जनता का यह गुस्सा प्रदर्शनों के स्वरूप में बाहर निकलता दिखाई दिया। राजधानी बैरूत में हुए प्रदर्शनों में शामिल गुट सरकार के खिलाफ नारेबाजी करके सीधे संसद पर जा टकराए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रवेशद्वार पर चढ़कर अंदर घुसपैठ करने की कोशिश की। लेकिन, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों की यह कोशिश नाकाम की। इससे गुस्सा हुए प्रदर्शनकारियों ने बड़ी मात्रा में पथराव और तोड़फोड़ करने की बात सामने आयी है। राजधानी बैरूत के अलावा सिडॉन, तायरे और त्रिपोली जैसे शहरों में हिंसक प्रदर्शन शुरू होने की जानकारी स्थानीय यंत्रणाओं ने प्रदान की।

अक्तुबर २०१९ से लेबनान अस्थिरता से त्रस्त है और राजनीतिक दलों के मतभेद और संघर्ष के कारण देश को अभी तक स्थिर सरकार प्राप्त नहीं हो सकी है। इस वजह से अर्थव्यवस्था अधिकाधिक कमजोर होती दिख रही है। इसी बीच कोरोना वायरस की महामारी और अगस्त महीने में बंदरगाह में हुए भीषण विस्फोट की वजह से स्थिति अधिक खराब होती दिख रही है। वर्ष २०२० में लेबनीज अर्थव्यवस्था की १९ प्रतिशत गिरावट हुई है। देश पर कर्ज़ का भार ९० अरब डॉलर्स तक जा पहुँचा है और यह रकम जीडीपी के १७० प्रतिशत है। लेबनीज सरकार कर्जे का भुगतान करने में भी असफल हुई है।

अमरीका, फ्रान्स और यूरोपिय देशों से लेबनान को सहायता प्रदान हो रही है, फिर भी यह कोशिश ज्यादा कामयाब नहीं हो सकी है। फ्रान्स के विदेशमंत्री जीन य्वेस ले ड्रिआन ने इस पर जल्द हल नहीं निकला तो लेबनान पूरी तरह से टूटने का ड़र होने का इशारा दिया है। अंदरुनि स्थिति काफी गंभीर है और ऐसे में लेबनान में प्रभावी राजनीतिक संगठन ‘हिज़बुल्लाह’ इस्रायल के खिलाफ संघर्ष की धमकियाँ देने में जुटी होने की बात सामने आ रही है। इस्रायल ने भी इस पर पुख्ता प्रत्युत्तर दिया है और इस्रायल की कार्रवाई से लेबनान को अधिक झटके लगेंगे, ऐसी सख्त चेतावनी दी जा रही है।

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