यूक्रेन को इस्रायल की तरह सुरक्षा की गारंटी देने के लिए नाटो की गतिविधियां

- स्वीडन को नाटो में शामिल करने के लिए तुर्की की मंजूरी

विल्निअस/किव – नाटो ने यूक्रेन को सदस्यता प्रदान किए बिना इस्रायल की तरह सुरक्षा की गारंटी देने की गतिविधियां शुरू की हैं। पिछले महीने अमरीका के बायडेन प्रशासन ने इससे संबंधित प्रस्ताव पेश करने के दावे माध्यमों ने किए थे। अमरीका के इस प्रस्ताव का ब्रिटेन और जर्मनी ने समर्थन किया है और नाटो के अन्य सदस्य देशों ने भी सकारात्मक संकेत देने की बात कही जा रही है। इसी बीच, तुर्की ने स्वीडन को नाटो की सदस्यता देने के प्रस्ताव के लिए हामी भरी हैं। अमरीका और स्वीडन के साथ नाटो ने तुर्की के इस निर्णय का स्वागत किया है।

सुरक्षा की गारंटी

रशिया-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि पर नाटो ने अपना विस्तार एवं रक्षा क्षमता बढ़ाने की जोरदार गतिविधियां शुरू की हैं। इसी के एक हिस्से के तौर पर रशिया के करीबी फिनलैण्ड और स्वीडन को नाटो में बतौर सदस्य शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें से फिनलैण्ड नाटो का ३१ वां सदस्य बना हैं। स्वीडन के समावेश की प्रक्रिया भी आखिरी चरण में हैं और हंगरी के अलावा सभी देशों ने इसके समावेश को मंजूरी प्रदान की हैं।

सुरक्षा की गारंटी

लेकिन, युद्ध की पृष्ठभूमि पर यूक्रेन को ‘फास्ट ट्रैक’ पद्धती से नाटो में शामिल करने की कोशिश का प्रमुख देशों ने जोरदार विरोध किया। यूक्रेन की नाटो सदस्यता पाने की कोशिश ही रशिया-यूक्रेन युद्ध की एक प्रमुख वजह बनी थी। रशिया ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए यह कहा था कि, यूक्रेन का नाटो में शामिल होना ‘रेड लाईन’ होगी। रशिया इस मुद्दे पर बड़ी आक्रामकता से तीव्र कदम उठा सकती हैं, ऐसा इशारा रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन ने बार बार दिया हैं। इसके मद्देनज़र नाटो के प्रमुख देश यूक्रेन की सदस्यता के मुद्दे से दूर भाग रहे हैं।

रशिया विरोधी शुरू युद्ध के दौरान यूक्रेन को सदस्यता प्रदान की तो यह युद्ध नाटो बनाम रशिया युद्ध में तब्दिल हो जाएगा और इसके गंभीर परिणाम पुरे विश्व में होंगे, ऐसा ड़र अमरीका ने जताया हैं। वहीं, जर्मनी ने संघर्ष जारी होने की स्थिति में संबंधित देश को नाटो में शामिल करने का प्रावधान ना होने के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया हैं। हंगरी ने भी यूक्रेन के समावेश पर आपत्ति जताई हैं। इसपर गौर करके अमरीका और नाटो ने इस्रायल की तरह ही यूक्रेन को रशिया के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी देने की तैयारी शुरू की है।

सुरक्षा की गारंटी

इस्रायल नाटो का सदस्य नहीं हैं और ‘नाटो प्लस’ का हिस्सा हैं। अमरीका ने इस्रायल की सुरक्षा के लिए उस देश के साथ स्वतंत्र समझौता किया है और इसके अनुसार अमरीका काफी बड़ी मात्रा में इस्रायल को रक्षा सहायता प्रदान कर रही हैं। यह सहायता १० वर्ष तक प्रदान होती रहेगी और इस समझौते का अवधि हर बार बढ़ाया गया है। अमरीका ने इस्रायल की सुरक्षा की गारंटी दी हैं। उसी तरह नाटो सदस्य देश यूक्रेन को शस्त्र सहायता करके सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उठाएंगे, ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं। जर्मनी के चान्सलर ओलाफ शोल्झ ने इसका समर्थन किया हैं। यूक्रेन को रक्षा सहायता मुहैया करने के लिए ‘इस्रायल मॉडेल’ अहम भूमिका निभा सकता हैं, ऐसा बयान चान्सलर शोल्झ ने किया है। ब्रिटेन ने भी इस्रायल मॉडल के प्रस्ताव पर सकारात्मक संकेत दिए होने की बात कही जा रही है।

इसी बीच स्वीडन की नाटो सदस्यता पाने की कोशिश में बना बड़ा अड़ंगा दूर हुआ हैं। सोमवार को नाटो के प्रमुख जेन्स स्टॉल्टनबर्ग ने आयोजित की हुई विशेष बैठक में तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन ने स्वीडन का समावेश करने को मंजूरी प्रदान की। इस अवसर पर स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्न भी मौजूद थे। नाटो प्रमुख ने इस अवसर पर यह कहा कि, तुर्की ने मंजूरी प्रदान करने का यह क्षण ऐतिहासिक हैं अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने भी तुर्की के इस निर्णय को सराहा हैं।

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