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युरोप मे युद्ध भड़कने से रशिया नाटो की धज्जियाँ उडाएगा- अमरिकी अभ्यास गट रॅंड कोर्पोरेशन का रिपोर्ट

वॉशिंगटन: यूरोप में युद्ध भड़का तो रशिया को रोकना नाटो के लिए संभव नहीं होगा। रशिया सहजरुप से नाटो के सेना की धज्जियां उड़ाकर बाल्टिक देशों का कब्जा प्राप्त करेगा, ऐसा दावा रॅंड कॉरपोरेशन इस अमरिकी अभ्यास गटने किया है। शीतयुद्ध के बाद रक्षा एवं नाटो के रक्षा सामर्थ में बड़ी गिरावट हुई थी। उसपर रशिया ने गतिमान रूप से लष्करी सामर्थ्य बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है, इस पर अभ्यास गटने ध्यान केंद्रित किया है।

पिछले महीने में म्युनिक सिक्योरिटी कौनफेरेंस के रिपोर्ट में यूरोप एवं रशिया के दौरान गलती से लष्करी संघर्ष भड़क सकता है, ऐसा इशारा दिया गया था। इस पृष्ठभूमि पर अमरिकी अभ्यास गट का रिपोर्ट अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ‘असेसिंग कन्वेंशनल फ़ोर्स इम्बैलेंस इन यूरोप’ नामक इस रिपोर्ट में शीतयुद्ध के बाद रशिया एवं नाटो की रक्षा सामर्थ्य में कैसे बदलाव हुए हैं, इसपर ध्यान केंद्रित किया गया है।

रशियन सीमा को लगकर होने वाले बाल्टिक देशों में नाटो की तैयारी एवं सामर्थ्य इसपर रिपोर्ट में प्राथमिकता होने से ध्यान केंद्रित किया गया है। रशिया ने पिछले दशक में अपने रक्षा सामर्थ्य बढ़ाने पर बड़ी तादाद में जोर दिया है और सामरिक दृष्टि से उसका आक्रामक इस्तेमाल करने की धारणा कार्यान्वित की है। यह धारणा देखते हुए आने वाले समय में बाल्टीक क्षेत्र में संघर्ष होने पर रशिया सहजरुप से उसपर कब्ज़ा प्राप्त करके, अपना उद्देश्य साध्य कर सकता है, ऐसा रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है।

रशिया ने अपने रक्षादल अधिक से अधिक आधुनिक करने पर जोर दिया है और उसके गतिमान गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया है। उसके लिए नए-नए शस्त्रास्त्र यंत्रणा रक्षा दल में शामिल करके उनकी तैनाती बढ़ाने आवश्यक कदम उठाए हैं। रशियन रक्षादल ने यूरोप को जोड़ें हुए सीमा पर बड़ी तैनाती करते हुए अंतर्गत रक्षाक्षेत्र की क्षमता विकसित की है, ऐसा दावा अमरीकी अभ्यास गट के रिपोर्ट में किया गया है। बड़ी तादाद में लष्कर की तैनाती एवं प्रगत शास्त्रों का समभाग यह रशियन रक्षा दल की विशेषता होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

रशिया में सन २०१४ में क्रीमिआ पर कब्जा पाने के बाद नाटो ने अपनी रक्षा सामर्थ्य की तरफ ध्यान केंद्रित करना शुरू किया था। पिछले ४ वर्षों में यूरोपियन बटालियन का निर्माण एवं अमरिकी लष्कर के पथक की तैनाती, इस पर जोर देकर नाटो ने युद्ध सज्जता के लिए कदम उठाए हैं। पर नाटो की तैयारी रशिया की क्षमत क तुलना में पर्याप्त न होने की जानकारी अमरिकी अभ्यास गटने सूचित किया है।

बाल्टिक देशों का विचार करते हुए रशिया की तैनाती लगभग ७८ हजार सैनिकों की है, तो नाटो की क्षमता सिर्फ ३२ हजार की है, ऐसा रिपोर्ट में कहा गया है। रशिया बाल्टिक पर आक्रमण करने के लिए लगभग ७५० से अधिक टैंक घुसा सकता है तथा उसका प्रतिकार करने के लिए नाटो के पास सिर्फ १२९ टैंक है, ऐसी चिंता रिपोर्ट में व्यक्त की गई है।

दौरान पिछले महीने में रशिया ने कॅलिनिनग्रॅड इस रक्षा तल पर ‘इस्कंदर’ इस परमाणु वाहक मिसाइल की हमेशा के लिए तैनाती शुरू करने की बात उजागर हुई है। रशिया की यह तैनाती आधे यूरोप को लक्ष्य करने वाली होने का दावा रिपोर्ट में किया गया है।

(Courtesy: www.newscast-pratyaksha.com)

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