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भारत एवं अमरिका के बीच होनेवाले ‘टू प्लस टू’ चर्चा का परिणाम दिखाई देने लगा है

नयी दिल्ली/ इस्लामाबाद – भारत एवं अमरिका के बीच पूर्ण होनेवाले ‘टू प्लस टू’ चर्चा का परिणाम दिखाई देने लगा है। उक्त चर्चा के पूर्ण होते ही कुछ ही घंटों में चीन के परराष्ट्र मंत्री ने पाकिस्तान में जा पाहुँचे। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए चीन हर हाल में सहायता करेगा, ऐसी घोषणा चीन के परराष्ट्र मंत्री ‘वँगई’ ने की। साथ ही नेपाल के लिए चीन के बदरगाहों को खोलकर इस देश का भारतपर निर्भर रहना कम करने के प्रयत्न चीन ने शुरूकर दिए हैं। यह सब कुछ ‘टू प्लस टू’ चर्चा के पूर्ण होने के पश्चात्‌ ही हुआ। यह कोई योगायोग न होकर इसके पिछे चीन की अक्रामक रणनीति होने की बात स्पष्ट हुई है।

‘टू प्लस टू’, चर्चा, सामरिक करारनामा, कॉमकासा, चीन, पाकिस्तान, ww3, सहायता, भारत, रशियारशिया एवं ईरान पर अमरिका द्वारे लादे गए निर्बंघों के अनुसार भारत को उन देशों के साथ सहकार्य रोकना होगा, अमरिका की ऐसी विशेष माँग थी। भारत ने इसके प्रति स्पष्टरूप में नकारात्मक प्रतिक्रिया दर्शायी थी। इसी कारण ‘टू प्लस टू’ चर्चा को आगे ढकेलकर अमरिका भारत पर दबाव बढ़ा रहा है ऐसी चर्चा आ रही परन्तु छह सितंबर के दिन यह चर्चा हो रही थी। इससे पहले अमरिका के परराष्ट्रमंत्री माईक पॅम्पिओ ने उक्त चर्चा में भारत का रशिया के साथ होनेवाले संबंध का विषय अग्रकम पर नहीं होगा ऐसी घोषणा की थी। इससे अमरिका की ओर से उक्त चर्चा में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आयेगी ऐसे संकेत दिए गए।

स्पष्टरूप में उल्लेख नहीं किया गया था फिर भी ‘टू प्लस टू’ चर्चा में इंडोपॅसिफिक क्षेत्रों में यातायात संबंधित स्वतंत्रता को स्वीकृत दी गई। साथ ही इसके प्रति भारत एवं अमरिका ने सहकार्य बढ़ाने के प्रति सहमति दर्शाकर चीन के प्रति योग्य हो ऐसा संदेश दिया। इतना ही नहीं बल्कि आतंकवाद के मुद्दे पर भी दोनों देशो ने एकजुटता दिखाकर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया था। विशेषत: मुंबई में होनेवाले आतंकवादी हमले के मास्टरमाईंड हफिज़ सईद के प्रति अमरिका द्वारा इनाम घोषित करने के बावजूद भी वह पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है। इस संबंध में भारत के साथ-साथ अमरिका ने भी चिंता व्यक्त की थी।

भारत एवं रशिया के बीच १९७१ में अगस्त महीने में सामरिक करारनामा संपन्न हुआ था। इस करारनामे के अनुसार रशिया पर यदि कोई भी आक्रमण करता है तो भारत रशिया की ओर से युद्ध में उसकी सहायता करेगा और यदि भारत पर कोई देश आक्रमण करता है तो रशिया उस युद्ध में भारत की ओर से लड़ेगा। यह करारनामा अर्थात उस दौर में भारत द्वारा पाकिस्तान के विरोध में की गई युद्ध की घोषणा ही थी। यहीं से १९७१ के युद्ध का आरंभ हुआ था और भारत ने पाकिस्तान से पूर्व पाकिस्तान का विभाजन करके बांगला देश की निर्मिती की। अब भी अमरिका के साथ भारत ने ‘कम्युनिकेशन्स कॉम्पॅटिबिलिटी, सिक्युरिटी ऍग्रीमेन्ट-कॉमकासा’ करारनामा करके पाकिस्तान के विरोध में युद्ध की घोषणा की है, ऐसा दावा पाकिस्तानी भूतपूर्व राजनैतिक अधिकारी ने किया है।

“‘टू प्लस टू’ चर्चा के अन्तर्गत केवल एक ही देश का उल्लेख सीधे-सीधे किया गया है और वह देश है पाकिस्तान।” इस ओर पाकिस्तान के इस भूतपूर्व राजनैतिक अधिकारी ने ध्यान खींचा है। इसीलिए जल्द ही भारत एवं अमरिका मिलकर पाकिस्तान को सबक सिखाएँगे, ऐसी चिंता पाकिस्तान के इस भूर्तपूर्व अधिकारी ने व्यक्त की है।

वहीं भारत एवं अमरिका के बीच प्रस्थापित हो रहा सामरिक सहकार्य यह अपने लिए चुनौती देने के लिए ही किया जा रहा है ऐसा चीन का मानना है। विशेषत: ‘टू प्लस टू’ चर्चा के पश्चात दोनों देशों के परराष्ट्र मंत्रियों एवं सुरक्षा मंत्रियों ने हॉटलाईन शुरु करने का निर्णय लिया है ज़ो काफी महत्वपूर्ण साबित होता है। इसीलिए किसी संवेदनशील मुद्दे पर तुरंत ही निर्णय लेना तथा उसे अमल में लाना दोनों देशों के लिए सहज़ संभव होगा। इसी कारण ‘इंडो पॅसिफिक’ क्षेत्रों में अपना प्रभुत्व स्थापित करने की चीन की महत्त्वकांक्षा को काफी बड़ा झटका लगा है।

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