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भारत एवं रशिया में ८ महत्वपूर्ण करार संपन्न

नई दिल्ली – एस-४०० इस प्रगत हवाई सुरक्षा यंत्रणा के करार के साथ भारत एवं रशिया में ८ महत्वपूर्ण करार संपन्न हुए हैं। जिसमें अंतरिक्ष, रेलवे, परमाणु कार्यक्रम, परिवहन तथा रसायन क्षेत्र में सहयोगी करार का समावेश है। राष्ट्राध्यक्ष व्लादीमीर पुतिन इनके भारत भेंट में हुए इन करारों की वजह से भारत और रशिया में सहयोग अधिक सक्षम होता दिखाई दे रहा है। आतंकवाद और नशीले पदार्थ का व्यापार के विरोध में एकजुट कार्रवाई करने का निर्धार दोनों देशों ने करने की घोषणा उस समय रशियन राष्ट्राध्यक्षने की है।

बदलते जागतिक परिस्थिति का भारत एवं रशिया के संबंधों पर परिणाम नहीं हुआ है। इसीलिए दोनों देशों में मैत्रीपूर्ण संबंध आज भी उतने ही प्रासंगिक है, ऐसा कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत एवं रशिया के संबंधों को महत्व रेखांकित किया है। तथा भारत एवं रशिया में मैत्रीपूर्ण संबंधों को दूसरा विकल्प नहीं हो सकता, ऐसा प्रधानमंत्री मोदी ने उस समय कहा है। रशिया के साथ भारत के वार्षिक द्विपक्षीय शिखर परिषद के पृष्ठभूमि पर दोनों देशों में ८ महत्वपूर्ण करार संपन्न हुए हैं।

इन कारों में एस-४०० इस रशिया के बहुचर्चित हवाई सुरक्षा यंत्रणा के करार का समावेश है। ५ अरब डॉलर्स के इस करार के अनुसार भारत रशिया से इस हवाई सुरक्षा यंत्रणा की खरीदारी कर रहा है और उसके लिए अमरिका का विरोध स्वीकारने की जोखिम भारत ने स्वीकारी है। इस यंत्रणा के व्यवहार को लेकर भारत को प्रतिबंधों की धमकी देने वाले अमरीका का सूर कम होता दिखाई दे रहा है। रशिया के साथ किसी भी स्वरूप के व्यवहार करनेवाले देशों पर कठोर प्रतिबंध जारी करने वाला कानून अमरिकन संसद ने मंजूर किया था। पर यह कानून अमरिका के सहयोगी देशों को असुरक्षित बनाने से उपयोग में नहीं लाया जा सकता ऐसी दावा ही अमरिका ने किया है।

दौरान रशिया भारत को परमाणु क्षेत्र में अधिक सहयोग करनेवाला है और इस बारे में कार्य रचना का करार संपन्न हुआ है। इसके साथ भारत की अंतरिक्ष संशोधन संस्था ‘इस्रो’, रशियन अंतरिक्ष संस्था के सहयोग करके मानव अंतरिक्ष मुहिम के लिए रशियन संस्था इस्रो को सहयोग करने वाली है। साथ ही भारत की ईंधन कंपनी ‘ओएनजीसी’ एवं रशियन ईंधन कंपनियों में सहयोगी करार संपन्न हुआ है। तथा भारत के रसायन एवं खाद निर्माण क्षेत्र में रशिया सीधे निवेश करेगा और इस बारे में करार पर भी हस्ताक्षर हुए हैं।

रुपया एवं रूबल इनके व्यवहारों के बारे में प्रदीर्घ चर्चा करके इस बारे में सहयोग बढ़ाने पर भी भारत के प्रधानमंत्री मोदी एवं रशियन राष्ट्राध्यक्ष पुतीन इनमें चर्चा हुई है। आर्थिक व्यापार और रक्षा विषयक सहयोग में दोनों देशों के चलन का उपयोग करने की तैयारी दोनों देशों ने दिखाई है।
रशिया पर अमरिका ने कड़े आर्थिक प्रतिबंध जारी किए हैं और रशिया ने अपने अन्य देशों के साथ व्यवहार से अमरिकन डॉलर को दूर रखने का निर्णय लिया है। इस पृष्ठभूमि पर रुपया और रूबल में व्यवहारों के बारे में भारत और रशिया में विकसित हो रहे यह संयोग आर्थिक और राजनैतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

इसके साथ भारत में निवेश बढ़ाने के लिए रशिया स्वतंत्र यंत्रणा निर्माण करने की तैयारी में होने की जानकारी राष्ट्राध्यक्ष पुतिन इनके इस दौरे के निमित्त से सामने आ रही है। रेलवे क्षेत्र में भी भारत के विकास को रशिया की सहायता मिलने वाली है और आर्थिक व्यवहार एवं विदेश धारणा विषयक चर्चा पर भी दोनों देश एक दूसरों की सहायता करने वाले हैं। साथ ही इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ कॉरिडोर प्रकल्प के बारे में भी भारत एवं रशिया में एकमत हुआ है।

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