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कतार में अमरीका और तालिबान में चर्चा

वॉशिंग्टन – अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया के लिए अमरीका ने नियुक्त किए विशेष दूत ‘झल्मे खलिलझाद’ की तालिबान के साथ बातचित संपन्न हुई। कतार में हुए इस बातचित के बाद खलिलझाद अफगानिस्तान में दाखिल हुए, ऐसी खबरे प्रकाशित हुई। पिछले चार महीने में अमरीका ने तालिबान समेत की ये दुसरी चर्चा थी। इस बातचित की जानकारी जारी नहीं की गई है। इतनाही नहीं लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी इस बातचित के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इन्कार किया।

९/११ आतंकी हमले के बाद अमरीका ने अफगाणिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध छेडा था। इस युद्ध को १७ वर्ष बित चुके है। फिर भी ये युद्ध अमरीका जित नहीं सकी है। अब अफगानिस्तान की सत्ता पर बैठी सरकार और अफगानी सेना ये युद्ध खेल रही है, फिर भी अमरीका इस युद्ध से पिछे नहीं हटा है। पिछले कई महीनों से तालिबान ने अफगानिस्तान में छलांग लगाई जिससे अफगानी सेना की हालत खराब हुई है।

तालिबान के हमलों का सत्र तीव्र हो रहा है, वहीं अमरीका ने इस आतंकी संघटन से बातचित करने की तैयारी दिखाई है। अफगानी सरकार ने भी तालिबान को चर्चा का आवाहन किया था। अफगानी सरकार के इस आवाहन को ठुकराने वाले तालिबान ने पिछले चार महीनों में अमरीका से दो बार बातचित करने की तैयारी दिखाई। कतार में संपन्न हुई बातचित में क्या हुआ इसकी जानकारी उजागार नही हुई है। लेकिन अमरीका और तालिबान कर रहे इस चर्चा के बडे परीणाम सामने आ सकते है।

किसी भी आतंकी संगठन से बातचित नहीं होगी, ऐसा अमरीका की राष्ट्रीय नीति है। वहीं अमरीका अफगानिस्तान से पिछे हटने के बजाय बातचित संभव नहीं ऐसी कठोर नीति तालिबान ने ली है। लेकिन दोनों पक्षों ने तभी से पिछे हटते हुए समझौते की तैयारी दिखाई, ऐसे संकेत मिल रहे है। सोव्हिएत रशिया ने अफगानिस्तान पर हमला करने के बाद अमरीका ने ही पाकिस्तान को साथ लेकर तालिबान का निर्माण किया था। लेकिन अफगानिस्तान में आंतकवाद के खिलाफ चल रहे युद्ध में तालिबान के आतंकी अमरीकी जवानों पर हमले करते है, यह अमरीका के नीति की असफलता है, ऐसी आलोचन दुनिया भर से की जाती है।

दूत, चर्चा, अफगानी सरकार, ९/११ आतंकी हमले, तालिबान, बातचित, world war 3, कतार, पाकिस्तानतालिबान समेत अमरीका की बातचित सफल होती है तो अमरीका अफगानिस्तान से पिछे नहीं हटेगा। उल्टा अफगानिस्तान अस्थिर होता है तो वह अमरीका के हितसंबंधों के लिए सहाय्यक होगा, ऐसा विशेषज्ञों का दावा है। ऐसा होते हुए भी अफगानिस्तान में कुछ स्तर पर स्थिरता लौट आया है वहीं अमरीका को अपने ध्येय प्राप्त करना सहज हो सकता है। अमरीका इसके लिए तालिबान से बातचित करने की कडी संभावना इससे सामने आ रही है।

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