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काबुल के हमलें में ब्लैकवॉटर्स का प्रमुख ढेर होने की वजह से अमरिका ने तालिबान के साथ शुरू बातचीत रद्द की – पाकिस्तान के तालिबान समर्थक का दावा

काबुल/इस्लामाबाद – अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में २ सितंबर के दिन तालिबान ने किए हमले में अमरिकी सेना अधिकारी समेत ३० लोग मारे गए थे| इसके बाद अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने तालिबान के साथ शुरू बातचीत रद्द करने का निर्णय किया था| उनके इस निर्णय की पृष्ठभूमि अब सामने आ रही है| काबुल में सुरक्षा के नजरिए से काफी अहम जाने वाले ‘ग्रीन व्हिलेज’ में बडा हमला करके तालिबान ने ‘ब्लैकवॉटर्स’ के सैनिकों समेत अफगानिस्तान में तैनात ब्लैकवॉटर्स के प्रमुख की भी हत्या की थी| इसी वजह से राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने तालिबान के साथ शुरू बातचीत रद्द की है, यह दावा पाकिस्तान के एक विश्‍लेषक ने किया है|

पाकिस्तान के भूतपूर्व राजनयिक अधिकारी और विश्‍लेषक एवं तालिबान के पुख्ता समर्थक के तौर पर जाने जा रहे ओरिया मकबूल जान ने यह दावा किया है| ग्रीन व्हिलेज पर तालिबान ने किया हमला इतना भीषण था की उन्होंने जगह पर ही ब्लैकवॉटर्स के ३० लोगों को ढेर किया| ब्लैकवॉटर्स यह निजी सैनिकों को कान्ट्रैक्ट पर तैनात करनेवाली कंपनी है और ब्लैकवॉटर्स के सैनिक अफगानिस्तान में तैनात है| यह बात अमरिका ने जाहीर तौर पर स्वीकारी नही थी| लेकिन, अफगानिस्तान के युद्ध में अपने सैनिक खोने के बजाए अमरिका अपने कंपनी को यह कंत्राट दे, यह प्रस्ताव ब्लैकवॉटर्स के प्रमुख एरिक प्रिन्स ने कुछ समय पहले दिया था| ऐसा होते हुए भी ब्लैकवॉटर्स अफगानिस्तान में कार्यरत है, यह दावे इससे पहले भी हुए थे| इस बारे में नई जानकारी सामने रखकर ओरिया मकबूल जान ने यह कहा है की, तालिबान के हमले में ढेर हुए ३० लोगों में अफगानिस्तान में ब्लैकवॉटर्स का प्रमुख शफिकुल्लाह भी मारा गया है|

तालिबान के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर शफिकुल्लाह को ढेर करने की जानकारी दी थी| शफिकुल्लाह ने अबतक कई तालिबानी आतंकियों को मौत के घाट उतारा था| उसे खतम करके तालिबान ने अपना बदला लिया है, यह दावा ओरिया मकबूल जान ने किया है| साथ ही अफगानिस्तान की जंग में तालिबान जीत हासिल कर रही है और अमरिका को आज नही तो कल यहां से हार कर पीछे हटना ही होगा, यह दावा ओरिया मकबूल जान ने किया है| इसी बीच अमरिका और तालिबान की शांतिवार्ता नाकाम साबित होने से अफगानिस्तान की सरकार और भारत काफी खूशी होने का आरोप उन्होंने किया है| इसके अलावा पाकिस्तान के अमरिका समर्थक भी खुशी मना रहे है, यह बात ओरिया मकबूल जान कह रहे है|

लेकिन, कुछ भी हो, अफगानिस्तान के युद्ध में आखिरकार तालिबान की ही जीत होगी| यह ध्यान में रखकर पाकिस्तान की वर्तमान की सरकार ने और पाकिस्तानी सेना अमरिका के पक्ष में तालिबान से बातचीत करने की कोशिश ना करें| ऐसा हुआ तो इससे पाकिस्तान का काफी बडा नुकसान होगा, यह इशारा भी ओरिया मकबूल जान ने दिया है|

इस दौरान, सोव्हिएत रशिया ने अफगानिस्तान पर हमला किया और इस युद्ध में पराजित होने के बाद सोव्हिएत युनियन बिखर गया था| उसके बाद अमरिका ने अफगानिस्तान में हमला करके अपना महासत्ता का पद खोने की तैयारी की है, यह दावा करनेवाला चरमपंथीयों का गुट पाकिस्तान में है| ओरिया कमबूल जान इसी गुट के पक्ष में खडे हुए है और तालिबान का खुलेआम पक्ष लेनेवालों में उनका समावेश होता है| उन्होंने तालिबान अपनी भूमिका पर बरकरार रहने की बात करके इस बात पर तालिबान की सराहना की है| पाकिस्तान भी यही भूमिका अपनाए, यह मांग ओरिया मकबूल जान कर रहे है|

अफगानिस्तान में अमरिका की तैनाती जरूरी – भूतपूर्व विदेशमंत्री कोन्डोलिझा राईस

वॉशिंगटन – ‘हमसे भी कई गुना अधिक अमरिका को बातचीत की जरूरत महसूस हो रही है, यह भरौसा तालिबान को हुआ था| इसी लिए अमरिका के साथ बातचीत में तालिबान ने अकडबाज भूमिका अपनाई थी| लेकिन, राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने तालिबान के साथ हो रही बातचीत खतम की| उसके बाद हमनें राहत की सांस ली’, यह बात अमरिका की भूतपूर्व विदेशमंत्री कोन्डोलिझा राईस ने कही है| साथ ही अफगानिस्तान में इसके आगे भी अमरिकी सैनिक तैनात हो, हम इस भूमिका पर कायम है, ऐसा राईस ने कहा है|

हाल ही में अपने किताब के प्रकाशन के अवसर पर अमरिकी समाचार चैनल से बातचीत करते समय राईस ने तालिबान के साथ अमरिका की हुई बातचीत को लेकर अपना स्पष्ट मत रखा| राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने यह बातचीत रद्द करके सही निर्णय किया है, ऐसा राईस ने कहा| साथ ही पिछले १८ वर्षों से अफगानिस्तान में शुरू युद्ध से अमरिकी जनता ऊब चुकी है, इसका हमें ज्ञान है| लेकिन, सुरक्षा के लिए यह निर्णय जरूरी ही है, यह बात राईस ने डटकर कही| अमरिका पर हुए ९/११ हमलें की साजिश अफगानिस्तान में ही बनी थी, इसकी याद भी राईस ने दिलाई|

अमरिका की सुरक्षा के लिए अफगानिस्तान में इसके आगे भी सैनिक तैनात रखना जरूरी है| दक्षिण कोरिया में पिछले पचास वर्षों से अमरिकी सेना तैनात है और वह सुरक्षा के लिए जरूरी ही था| इस नजरिए से हमें अफगानिस्तान में अमरिकी सेना की तैनाती की ओर देखना होगा, इस बात पर कॉन्डोलिझा राईस ने गौर किया| साथ ही राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प के साथ मतभेद होनेपर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने दिए इस्तीफे का भी राईस ने समर्थन किया|

 

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