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चीन के वर्चस्व को चुनौती देने अमरिका के पहेल से हो रहे ‘रेअर अर्थ इनिशिएटिव्ह’ में ऑस्ट्रेलिया समेत नौ देश शामिल

न्यूयॉर्क – उच्च तकनीक और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी ‘रेअर अर्थ मिनरल्स’ में चीन ने बनाया वर्चस्व तोडने के लिए अमरिका ने शुरू की हुई गतिविधियों को सफलता प्राप्त हो रही है| ‘रेअर अर्थ मिनरल्स’ का उत्पाद बढाने के लिए अमरिका ने नए खदानों की खोज करने के साथ ही इन खनिजों पर प्रक्रिया करने के लिए नए कारखाने शुरू करने पर जोर देने के संकेत दिए थे| अमरिका की इस कोशिश में ऑस्ट्रेलिया, ब्राझिलसमेत नौ देशों ने शामिल होने की तैयारी जताई है|

जून महीने में अमरिका के रक्षा विभाग ने एक रपट संसद में रखी थी| इस में ‘रेअर अर्थ मिनरल्स’ को लेकर अलग अलग संभावना, विकल्प एवं प्रस्ताव का जिक्र किया था| अमरिका को इन जरूरी खनिजों की कमी महसूस ना हो इस लिए अतिरिक्त निधी का प्रावधान करने की जरूरत है और संबंधित कंपनियों को आपात्कालिन भंडार करने के निर्देश देने का सुझाव भी इस रपट में रखा गया था| इसी बीच चीन के अलावा अन्य देशों के विकल्प तपासने को और मांग की पूरी करने के लिए तेजी से कदम बढाने के निर्देश भी इस रपट में दिए गए थे|

अमरिका के विदेश विभाग के साथ अन्य यंत्रणाओं ने भी इस विषय पर पहल करके अलग अगल देशों से बातचीत शुरू की थी| अमरिका ने शुरू की हुई इस कोशिश को कामयाबी मिलने की जानकारी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने घोषित की है| पोम्पिओ ने दी जानकारी के अनुसार ऑस्ट्रेलिया, ब्राझिल, बोटस्वाना, पेरू, अर्जेंटिना, डीआर कांगो, नामिबिआ, फिलिपाईन्स और झांबिया इन देशों ने अमरिका की ‘रेअर अर्थ इनिशिएटिव्ह’ में शामिल होने की तैयारी दिखाई है|

इन देशों को अमरिका प्रगत तकनीक और अन्य सभी प्रकार की जरूरी सहायता करेगी| लिथियम, कॉपर, कोबाल्ट जैसे खनिजों के विकास के लिए एवं इनके खदानों की खोज करने के लिए अमरिका इन देशों की सहायता करेगी, ऐसा विदेशमंत्री पोम्पिओ ने कहा है| पोम्पिओ ने ‘रेअर अर्थ इनिशिएटिव्ह’ में शामिल हो रहे सभी देशों के विदेशमंत्री से बातचीत की है, यह बात भी सूत्रों ने स्पष्ट की| अमरिका की इस ‘इनिशिएटिव्ह’ में अगले कुछ दिनों में कनाडा भी शामिल हो रही है| कनाडा की एक कंपनी अमरिका में निवेश करने के लिए तैयार होने की जानकारी दी गई है|

स्मार्टफोन, कंप्युटर एवं इलेक्ट्रिक गाडियों के लिए इस्तेमाल हो रहे खनिजों के सबसे बडे उत्पादक के तौर पर चीन की ओर देखा जाता है| ‘रेअर अर्थ मिनरल्स’ नाम से जाने जा रहे दुनिया के १७ खनिजों के लगभग ३० प्रतिशत से अधिक भंडार चीन में होेन का दावा किया जा रहा है| फिलहाल दुनिया में ‘रेअर अर्थ’ के कुल उत्पाद में चीन का हिस्सा करीबन ९५ प्रतिशत है| वही, अमरिका के लिए जरूरी ‘रेअर अर्थ’ खनिजों में से ८० प्रतिशत खनिज चीन से आयात होते है|

इस क्षेत्र में बनाए अपने वर्चस्व का चीन ने आजतक प्रभावी इस्तेमाल किया था| अपने विरोध में आक्रामक भूमिका अपनानेवाले अमरिका और जापान इन देशों को हो रही ‘रेअर अर्थ खनिजों’ की सप्लाई रोकने के संकेत देकर चीन ने इस पर संज्ञान लेने के लिए विवश किया था| लेकिन, अब अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘रेअर अर्थ मिनरल्स’ का मुद्दा अहम बनाया है और राष्ट्रीय सुरक्षा की पृष्ठभूमि पर इसमें किसी भी प्रकार का समझौता ना करने की निती उन्होंने अपनाई है|

इसके लिए अमरिका में कार्यरत कंपनियों को भी अतिरिक्त सुविधा का निर्माण करने के लिए सहायता करने की तैयारी शुरू है| लेकिन, चीन ने ‘रेअर अर्थ मिनरल्स’ का इस्तेमाल ‘निर्णायक हथियार’ की तरह किया तो अमरिका के रक्षा एवं तकनीकी क्षेत्र के उद्योग मुश्किलों में फंस सकता है, यह दावे हो रहे है| लेकिन, चीन के साथ व्यापार और निवेश युद्ध करते समय ट्रम्प प्रशासन ने चीन से उपयोग होने की संभावना है, ऐसे ‘रेअर अर्थ मिनरल्स’ का हथियार निष्प्रभ करने की जोरदार तैयारी करने की बात स्पष्ट तौर पर दिखाई देने लगी है|

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