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रशियन सेना में हायपरसोनिक ‘एवैनगार्ड’ मिसाइल तैनात – चीन के बाद दुसरा देश

मास्को – दुनिया के किसी भी हिस्से में मात्र कुछ मिनिटों में हमला करने की क्षमता रखनेवाले हायपरसोनिक ‘एवैनगार्ड’ मिसाइल्स रशियन सेना में दाखिल किए गए है| रशियान सेना के ‘उरल माउंटन्स’ के अड्डे पर यह मिसाइल तैनात किए गए है, यह जानकारी ‘स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्से’ ने सार्वजनिक की है| रशिया के रक्षामंत्री सर्जेई शोईगु ने भी हायपरसोनिक मिसाइल कार्यरत होने की खबर की पुष्टी की है और यह रशिया के लिए ऐतिहासिक घटना होने की बात स्पष्ट की|

दो महीने पहले चीन ने ‘डीएफ-झेडएफ’ यह हायपरसोनिक मिसाइल रक्षादल के बेडे में शामिल करने का ऐलान किया था| इसके बाद हायपरसोनिक मिसाइल सेना में तैनात करनेवाला रशिया दुनिया में दुसरा देश बना है| पर, चीन के हायपरसोनिक मिसाइल की गति ध्वनी से १० गुना यानी ‘मैक १०’ है और रशिया के ‘एवैनगार्ड’ हायपरसोनिक मिसाइल की गति ध्वनी से २७ गुना यानी ‘मैक २७’ है|

इस गति की वजह से दुनिया की कोई भी मिसाइल विरोधी यंत्रणा रशिया की ‘एवैनगार्ड’ मिसाइल को रोक नही सकेगी, यह बात रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन ने कही थी| ‘एवैनगार्ड’ मिसाइल करीबन दो मेगाटन परमाणु बम के साथ उडान भरने की क्षमता रखता है| ‘एवैनगार्ड’ यह अंतरमाद्विपीय हायपरसोनिक परमाणु अस्त्र है और दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने की क्षमता रखता है, यह दावा भी रशिया ने किया है|

पिछले महीने के आखीर में अमरिकी सेना के निरिक्षकों ने अपने इस मिसाइल का परीक्षण किया है, यह जानकारी रशियन रक्षा मंत्रालय ने प्रदान की थी| रशिया कुछ भविष्यकालीन एवं अतिप्रगत मिसाइल, ड्रोन्स, लडाकू विमान, पनडुब्बीयों का निर्माण कर रही है, यह ऐलान राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन ने पिछले वर्ष किया था| इसमें परमाणु विस्फोटक के साथ हमला करने की क्षमता रखनेवाले अंतरमहाद्विपीय ‘एवैनगार्ड’ मिसाइल का भी समावेश था|

‘एवैनगार्ड’ के अलावा रशिया ने ‘झिरकॉन’, ‘किन्झाल’ एवं ‘केएच-९०’ जैसे मिसाइलों का निर्माण किया है और उनकी गति ‘मैक ५’ से ‘मैक १२’ तक होने की बात कही जा रही है| इनमें से हायपरसोनिक ‘झिरकॉन’ मिसाइल खास तौर पर नौसेना की जरूरतें ध्यान में रखकर निर्माण किया गया है| वर्ष २०२० में यह मिसाइल नौसेना के बेडे में शामिल किया जाएगा, यह जानकारी रशियन सूत्रों ने साझा की|

रशिया ने अपना हायपरसोनिक मिसाइल बेजोड होने का इशारा दिया है, फिर भी अमरिका ने ‘सुपर लेजर्स’ ऐसे मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता रखेंगे, यह दावा किया है| कुछ महीने पहले अमरिका की ‘रेथॉन’ कंपनी ने ‘सुपर लेजर सिस्टिम’ का निर्माण करने का दावा भी किया था|

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