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तैवान में राष्ट्राध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में चीन विरोधी ‘त्साई ईंग वेन’ की भारी जीत 

तैपेई/बीजिंग – तैवान में राष्ट्राध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में आक्रमक चीन विरोधी भूमिका रखनेवाली वर्तमान की राष्ट्राध्यक्षा ‘त्साई ईंग-वेन’ दुबारा भारी वोटों के साथ जीत चुकी है| ‘त्साई ईंग वेन’ को इस चुनाव में ५७ प्रतिशत से भी अधिक वोट प्राप्त हुए है और प्रतिद्वंद्वि हान कुओ यू को मात्र ३८ प्रतिशत प्राप्त वोटों से संतोष करना पडा है| त्साई ईंग वेन ने प्रचार के दौरान बिल्कुल जाहीर तौर पर चीन के विरोध में भूमिका अपनाकर हॉंगकॉंग में जारी प्रदर्शनों का काफी प्रभावी इस्तेमाल किया था|

‘त्साई ईंग वेन’,चुनाव में जीत, हान कुओ यू, जनतांत्रिक सरकार, कार्रवाई का प्रावधान, तैवान, चीन, हॉंगकॉंग‘तैवान की सार्वभूमता और जनतंत्र को धमकाने की कोशिश होने पर तैवान की जनता करारा जवाब देती है| यही बात इन चुनावी नतिजों से स्पष्ट हुई है| इसके आगे तैवान के विरोध में बल का प्रयोग करने की धमकियां नही देगा, यह उम्मीद है| जनतंत्र की राह पर चलनेवाले तैवान और जनतांत्रिक सरकार चीन की धमकियां और दबाव का शिकार नही होंगे, इसका एहसास चीन के शासकों को हुआ होगा, यह उम्मीद रखते है’, इन शब्दों में त्साई ईंग वेन ने अपनी जीत पर प्रतिक्रिया व्यक्त की|

राष्ट्राध्यक्षा चुने जाने के बाद त्साई ईंग वेन ने अपने दल को भी संसद में जीत दिलाने में योगदान दिया है| ‘त्साई ईंग वेन’ की डेमोक्रैटिक प्रोग्रेसिव्ह पार्टी को संसद में ११३ में से ६१ जगहों पर जीत प्राप्त हुई है| प्रतिद्वंद्वि कौमितांग पार्टी को ३८ जगहों पर जीत प्राप्त हुई है| संसद में बहुमत प्राप्त होने से त्साई ईंग वेन को अपनी नीति अधिक आक्रामकता के साथ और आसानी से बढाना मुमकिन होगा, यह समझा जा रहा है|

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पिछले वर्ष चीन के एक गुप्तचर ने ऑस्ट्रेलिया में पनाह मांगते समय चीन की हुकूमत के विरोध में कई गंभीर आरोप रखे थे| इनमें चीन की शासक कम्युनिस्ट हुकूमत ने राष्ट्राध्यक्ष त्साई ईंग वेन को सत्ता से हटाने के लिए चुनाव में गडबडी करने की योजना तैयार की है, यह दावा भी इस गुप्तचर ने किया था| इसके लिए त्साई ईंग वेन’ के विरोधक हान कुओ यू को चीन पैसों की आपुर्ति कर रहा है, यह बात भी रखी गई थी| पर, यू ने यह आरोप ठुकराए थे|

इसके बाद राष्ट्राध्यक्षा वेन ने चुनाव को महज कुछ ही दिश शेष थे तभी चीन का प्रभाव ना बढें, इस लिए संसद में स्वतंत्र विधेयक पेश किया था| इस ‘एंटी इन्फिल्ट्रेशन बिल’ के तहेत विदेशी सैनिक एवं गुटों के तैवान में हुए हस्तक्षेप के विरोध में कडी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है| तैनान के राजनीतिक, लष्करी और सामाजिक क्षेत्र पर प्रभाव बनाना, सियासी दलों को अनुदान देना, समाज व्यवस्था में गडबडी करना या चुनाव के विषय में गलत जानकारी का प्रचार करना अपराधिक समझा जाएगा, यह मुद्दा वर्णित विधेयक में स्पष्ट किया गया था|

चीन ने भी इस विधेयक पर आलोचना की थी| इस विधेयक के साथ ही हॉंगकॉंग में जारी प्रदर्शन और चीन की शासक हुकुमत ने इसके विरोध में अपनाई भूमिका यह राष्ट्राध्यक्षा वेन ने प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया था| हॉंगकॉंग का यह मुद्दा चीन समर्थक गुटों को काफी बडी मुश्किलों में फंसानेवाला साबित होने की बात इस चुनावी नतीजों से स्पष्ट हुई है| साथ ही उजागर तौर पर चीन के विरोध में भूमिका अपनाने वाली त्साई ईंग वेन की जीत से आनेवाले समय में चीन और तैवान के बीच तनाव में और भी बढोतरी होगी, यह संभावना भी जताई जा रही है|

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