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किरगिझिस्तान और कझाकस्तान के भूभाग पर भी चीन का दावा

बीजिंग – कुछ दिन पहले ‘साऊथ चायना सी’ स्थित द्वीप और उसके बाद ठेंठ ‘माउंट एव्हरेस्ट’ पर अपना दावा बतानेवाले चीन ने अब मध्य एशियाई देशों की ओर अपना रूख किया है। चीन की दो वेबसाईट्स ने, मध्य एशियाई देश ‘कझाकस्तान’ तथा ‘किरगिझिस्तान’ भी चीन का ही हिस्सा होने के दावे किये हैं। चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत, लगभग सभी पड़ोसी देशों से टंटा शुरू करके, कोरोनावायरस ले संदर्भ में किये जानेवाले आरोपों का जवाब देने की कोशिश कर रही दिखायी देती है।

पिछले हफ़्ते भारतीय सीमा में स्थित पँगोंग सरोवर के क्षेत्र में चीन ने घुसपैंठ करने की कोशिश की थी। लेकिन भारतीय सेना ने चीन को पीछे हटने पर मजबूर किया था। उससे पहले, भारतीय सीमारेखा पर चक्कर लगा रहे चीन के हेलिकॉप्टर्स को भारत के लड़ाक़ू विमानों ने खदेड़ दिया था। डेमचोक और गलवान नदी क्षेत्र में भी भारतीय सेना अलर्ट पर होने के कारण नया संघर्ष शुरू करने के लिए जानतोड़ कोशिश करनेवाला चीन अच्छाख़ासा मुँह के बल गिर पड़ा है।

भारतीय क्षेत्र में घुसपैंठ की कोशिशें करते समय ही, चीनने अचानक ‘माउंट एव्हरेस्ट’ पर अपना दावा बताकर नेपाल को उक़साने की कोशिश भी की। उससे पहले ‘साऊथ चायना सी’ स्थित द्वीपों का नामकरण कर चीन ने अपना अधिकारक्षेत्र बढ़ा होने के संकेत दिये। उसी समय ‘ईस्ट चायना सी’ में जापान की सरहद के नज़दीक तथा तैवान के नज़दीक भी आक्रमक गतिविधियाँ शुरू की थीं। एक ही समय सभी ओर सामर्थ्य का प्रदर्शन करके, हम आंतर्राष्ट्रीय दबाव की परवाह नहीं करते ऐसा चीन दिखा रहा है। उसी समय पड़ोसी देशों को भी यही संदेश दे रहा है।

चीन की ये आक्रमक गतिविधियाँ, यह कोरोना की महामारी के संदर्भ में आया दबाव, अर्थव्यवस्था में गिरावट और अन्य अंतर्गत समस्याओं से जनता का ध्यान विचलित करने की नीति का भाग दिखायी देता है। पिछले महीने ही चीन ने, कोरोना की महामारी पर विजय हासिल करने के दावे किये थे। लेकिन गत कुछ दिनों में, कोरोना संक्रमण का मूलस्थान होनेवाले वुहान में ही वायरस के संक्रमण के नये मामलें सामने आये हैं। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि संक्रमण पर विजय प्राप्त की होने का प्रचार झूठा है। उसी समय, आंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कोरोना के मुद्दे को लेकर चीन की सत्ताधारी हुक़ूमत को झटके लगने लगे हैं। यह असफलता ढ़ँकवे के लिए चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत को नये विकल्प खोजने पड़ रहे हैं।

अंतर्गत तथा जागतिक स्तर पर लगनेवाले झटकों के कारण कम्युनिस्ट हुक़ूमत सुरक्षित रहें इसलिए, एक ही समय पर कई मोरचें खोलकर मूल समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए गतिविधियाँ शुरू हो चुकीं हैं। जापान, भारत, तैवान के साथ ही, अमरीका और अन्य देश भी अपने ख़िलाफ़ खड़े हुए हैं, ऐसा दिखावा खड़ा करके राष्ट्रवाद की भावना प्रज्वलित करने की कोशिशें चीन के सत्ताधारियों ने शुरू कीं हैं।

मध्य एशियाई देशों पर अपन हक़ जताने की चेष्टा भी उसीका भाग दिख रहा है। लेकिन अमरीका, युरोप के साथ साथ एशियाई देश भी अच्छी तरह सतर्क हुए होकर, चीन के कारनामों का आक्रमक और मुँहतोड़ जवाब देने की तैयारी में हैं। इस कारण, विभिन्न समस्याओं का हल ढूँढने में आयी असफलता को छिपाने हेतु दूसरों को उक़साने की गतिविधियाँ चीन के लिए निराशाजनक ही सावित होंगी, ऐसा चित्र दिखायी दे रहा है।

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