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आर्मेनिया-अज़रबैजान के युद्ध से रशिया-तुर्की संघर्ष भड़कने के संकेत – तीन हज़ार से भी अधिक लोगों के मारे जाने के दावें

येरेवान/बाकु – आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच शुरू हुए युद्ध की तीव्रता प्रति दिन बढ़ती जा रही है और इसकी गूंज अन्य देशों में भी सुनाई देने लगी है। इस युद्ध में तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन ने अज़रबैजान को स्पष्ट समर्थन देने से रशिया नाराज़ होने की बात समझी जा रही है। यह नाराज़गी दो देशों में तनाव अधिक बढ़ाने का कारण बनेगी, यह दावा विश्‍लेषक कर रहे हैं। उसी समय फ्रान्स ने आर्मेनिया के पक्ष में खड़े रहने के संकेत दिए हैं और रशिया एवं अमरीका के साथ चर्चा करके अपनी भूमिका स्पष्ट करेंगे, यह ऐलान भी किया है। इसी बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे का बड़ा नुकसान करने का दावा किया है और मृतकों की संख्या तीन हज़ार तक बढ़ने की बात कही जा रही है।

रविवार से आर्मेनिया और अज़रबैजान में शुरू हुआ युद्ध लगातार चौथे दिन भी जारी रहा और इसका भड़काव अधिक तीव्र हो रहा है। दोनों देशों ने बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान, ड्रोन्स, हेलिकॉप्टर्स और टैंक्स का इस्तेमाल होने की बात पहले ही स्पष्ट हुई है। अब आर्मेनिया ने रशिया से प्राप्त किए प्रगत ‘इस्कंदर मिसाइल सिस्टिम’ की तैनाती करने का इशारा भी दिया है। साथ ही आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने लष्करी संघर्ष जारी रहने तक अज़रबैजान से बातचीत मुमकिन ना होने का इशारा दिया है। अज़रबैजान के राष्ट्राध्यक्ष इलहाम अलीयेव्ह ने भी पीछे हटने से इन्कार किया है और आर्मेनिया की सेना नागोर्नो-कैराबख से बाहर निकले बगैर बातचीत संभव नहीं होगी, यह इशारा दिया।

दोनों देशों ने एक-दूसरे का बड़ा नुकसान करने के दावे भी किए हैं। बीते चार दिनों में अज़रबैजान के ७९० सैनिक मारे गए हैं और १३७ बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक एवं ७२ ड्रोन्स नष्ट करने का दावा आर्मेनिया के रक्षा विभाग ने किया है। तभी आर्मेनिया के २,३०० सैनिकों को मार गिराने का दावा अज़रबैजान के रक्षा विभाग ने किया है। उसी समय आर्मेनिया के २०० से अधिक आर्टिलरी और मिसाईल सिस्टम, २५ एअर डिफेन्स सिस्टम तबाह करने की बात भी इस विभाग ने साझा की है। दोनों देशों के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टी नहीं हो सकी है। लेकिन, इस बढ़ रहे संघर्ष की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई देने लगी है।

रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन ने चार दिनों में दूसरी बार आर्मेनिया के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करने की जानकारी सामने आयी है। रशिया और आर्मेनिया के बीच रक्षा समझौता हुआ है और इसके अनुसार रशिया आर्मेनिया को हथियार प्रदान कर सकती है। आर्मेनिया में रशिया का रक्षा अड्डा होने की बात भी कही जा रही है। इसकी वजह से आर्मेनिया रशिया के लिए सामरिक नज़रिये से अहम देश है। दूसरी ओर तुर्की ने अज़रबैजान के साथ अपने लष्करी और र्इंधन सहयोग मज़बूत किए हैं। अज़रबैजान यूरोप को र्इंधन की आपूर्ति करनेवाले देशों में से एक है और इस देश के साथ नज़दिकीयां बढ़ाकर यूरोप के र्इंधन व्यापार पर नियंत्रण प्राप्त करने के इरादे तुर्की ने रखे हैं। उसी समय इस्लामी देश बने अज़रबैजान में तुर्की वंशियों की संख्या काफी ज्यादा होने से इस माध्यम से इस्लामी जगत में अपना स्थान मज़बूत करने की महत्वाकांक्षा तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन रखते हैं, यह बात भी समझी जा रही है। लेकिन, तुर्की के यह इरादे रशियन हितसंबंधों को झटके देनेवाले होने से रशिया की इस पर तीव्र प्रतिक्रिया प्राप्त हो सकती है, यह दावा विश्‍लेषक कर रहे हैं।

इसी बीच, फ्रान्स ने भी इस संघर्ष में प्रवेश किया है और तुर्की को लक्ष्य किया है। तुर्की ने अज़रबैजान की सहायता को लेकर किए बयान युद्ध को बढ़ावा देने की मानसिकता का प्रदर्शन करनेवाला होने का आरोप फ्रान्स के राष्ट्राध्यक्ष इमैन्युएल मैक्रॉन ने किया। साथ ही फ्रान्स अपनी भूमिका उचित तरीके से निभाएगा, यह भरोसा हम आर्मेनिया और आर्मेनिया की जनता को दे रहे हैं, यह संदेश भी फ्रेंच राष्ट्राध्यक्ष ने दिया है। हम रशिया और अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष के साथ इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे, यह बात भी उन्होंने साझा की।

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