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ग्रीस के विरोध में युद्ध करने पर तुर्की को हार का सामना करना पड़ेगा – ग्रीक विश्‍लेषक का इशारा

अथेन्स/अंकारा – ग्रीस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर तुर्की के एजेंडे के अनुसार शर्तों को स्वीकार करने के लिए मज़बूर करना ही राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन की महत्वाकांक्षा है। लेकिन, यह बात उन्हें लष्करी संघर्ष के बिना प्राप्त करनी है। यदि ग्रीस के विरोध में युद्ध शुरू किया तो तुर्की की सेना को जंग के मैदान में हार का स्वीकार करना पड़ेगा, इस बात का एर्दोगन को पूरा अहसास है, यह इशारा ग्रीस की ‘नैशनल डिफेन्स ऐकेड़मी’ के विश्‍लेषक जॉर्ज फिलीस ने दिया। जर्मन विश्‍लेषक ‘एंड्रीअस क्लुथ’ ने भी कैस्टेलोरीज़ो नामक ग्रीक द्विप के मुद्दे पर ग्रीक और तुर्की इन नाटो के सदस्य देशों में युद्ध भड़क सकता है, यह इशारा दिया है। इस बयान की पृष्ठभूमि पर ग्रीस के विदेशमंत्री ने आर्मेनिया की यात्रा की है और इस पर गुस्सा हुए तुर्की ने ग्रीस को धमकाया है, यह समाचार प्राप्त हुआ है।

बीते सप्ताह में तुर्की ने ‘ओरूक रेईस’ के साथ अपने तीन जहाज़ दुबारा भूमध्य समुद्री क्षेत्र में रवाना किए थे। यह तीनों जहाज़ २२ अक्तुबर तक इस क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे, यह बात तुर्की ने कही थी। तुर्की र्इंधन की खोज़ जारी रखेगा और अपने अधिकारों की रक्षा भी करेगा, इन शब्दों में तुर्की के ऊर्जा मंत्री ने इस मुहिम का समर्थन किया था। इसके बाद तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन ने ग्रीस को धमकाया भी था। ‘तुर्की के जहाज उनका कर्तव्य निभाने के लिए भूमध्य समुद्र में दाखिल हुए हैं और विरोध करनेवालों को जैसे को तैसा प्रत्युत्तर दिया जाएगा। ग्रीस और सायप्रस ने चर्चा के दौरान दिए वचनों का पालन नहीं किया है’, यह धमकी एर्दोगन ने दी थी। ग्रीस के साथ अमरीका और यूरोपिय देशों ने तुर्की को तीखे शब्दों में इशारा देने के बाद भी राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन ने पीछे हटने से इन्कार करने की बात उनकी नई गतिविधियों से सामने आ रही है।

इस पृष्ठभूमि पर ग्रीक एवं जर्मन विश्‍लेषकों ने दो देशों में युद्ध को लेकर किए बयान ध्यान आकर्षित करते हैं। अगले दो दिनों में तुर्की के जहाज़ ग्रीस के कैस्टेलोरीज़ो द्विप से छह नौटिकल मील के दायरे में दाखिल होने के संकेत हैं। ऐसा होने पर ग्रीस तीव्र प्रत्युत्तर देगा और युद्ध भड़क उठेगा, यह दावा न्यूजबॉम्ब नामक ग्रीक वेबसाईट ने किया है। तुर्की ने हमला करने की कोशिश करने पर ग्रीस यूरोपिय महासंघ के ‘आर्टिकल ४२’ के अनुसार लष्करी सहायता की माँग करेगा, यह दावा भी संबंधित वेबसाईट पर किया गया है।

इसी वेबसाईट को दिए साक्षात्कार में विश्‍लेषक जॉर्ज फिलीस ने तुर्की की हार होने का इशारा दिया है। ग्रीक रक्षाबलों ने तुर्की के जहाज़ों को सिर्फ रोका तो उसे बड़ी कामयाबी नहीं कह सकते। यदि तुर्की के जहाज़ ग्रीक की सीमा में प्रवेश करते हैं तो वह सुरक्षित लौट नहीं सकेंगे, इसका ध्यान हमें रखना होगा। तुर्की को ऐसा झटका देना होगा कि, इसके बाद वह भूमध्य समुद्री क्षेत्र से पीछे हटने के लिए मज़बूर हो जाए, यह इशारा फिलीस ने दिया। साथ ही तुर्की की आक्रामकता के विरोध में अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए ग्रीस खुलेआम फ्रान्स के साथ मोर्चा खोले, यह सलाह भी उन्होंने प्रदान की।

ग्रीक वेबसाईट और विश्‍लेषकों के बाद जर्मन विश्‍लेषकों ने भी ग्रीस और तुर्की का युद्ध शुरू होने का दावा किया है। ब्लुमबर्ग नामक प्रमुख न्यूज वेबसाईट पर लिखे लेख में एंड्रिअस क्लुथ ने ग्रीस और तुर्की के विवाद का हल अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होना कठिन है और इन नाटो सदस्य देशों में युद्ध भड़कने की संभावना बढ़ी है, यह इशारा भी दिया गया है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के कानून के अनुसार ग्रीस अपने अधिकारों से संबंधित दावे कर रहा है, फिर भी इससे संबंधित प्रस्ताव को तुर्की ने मंजूरी नहीं दी है, इस ओर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया। भूमध्य समुद्री क्षेत्र में मौजूद र्इंधन के भंड़ारों के मुद्दे पर भड़कनेवाले युद्ध के पीछे ऑटोमन साम्राज्य का अस्त होने के बाद ग्रीक और तुर्की के बीच बैर भी प्रमुख कारण होने का अहसास क्लुथ ने इस दौरान कराया।

इसी बीच ग्रीस और तुर्की का भूमध्य समुद्री क्षेत्र के मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद अधिक बिगड़ने के संकेत प्राप्त हुए हैं। ग्रीस के विदेशमंत्री निकॉस डेंडीआस ने हाल ही में आर्मेनिया की यात्रा करने की बात सामने आयी है। इस यात्रा पर तुर्की काफी गुस्सा हुआ है और इस यात्रा से ग्रीस ही इस समस्या की जड़ है और समस्या निर्माण करने के लिए समर्थन दे रहा है, यह बात साबित होती है, यह आरोप तुर्की के विदेश विभाग ने किया है। बीते तीन सप्ताहों से आर्मेनिया-अज़रबैजान का युद्ध हो रहा है और तुर्की ने अपना पूरा समर्थन अज़रबैजान के पीछे खड़ा किया है। ऐसे में ग्रीस ने आर्मेनिया को समर्थन देकर तुर्की को उकसाने की बात दिख रही है।

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