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चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत का नया विधेयक यानी हाँगकाँग की स्वतंत्रता और जनतंत्र खत्म करने का कदम – पूर्व ब्रिटीश गव्हर्नर लॉर्ड पैटन की आलोचना

हाँगकाँग/लंदन – चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत ने पेश किया हुआ नया विधेयक, हाँगकाँग की स्वतंत्रता और जनतंत्र नामशेष करने के लिए उठाया सबसे बड़ा कदम साबित होता है, ऐसी कड़ी आलोचना हाँगकाँग के पूर्व ब्रिटीश गव्हर्नर लॉर्ड ख्रिस पैटन ने की है। युरोपिय महासंघ ने चीन के खिलाफ नई कार्रवाई करने के संकेत भी दिए हैं। चीन की संसद का सत्र शुक्रवार के दिन शुरू हुआ और इस दौरान हाँगकाँग के जनप्रतिनिधियों के चयन के खिलाफ नकाराधिकार का इस्तेमाल करने के प्रावधान के साथ यह विधेयक पेश किया गया है।

चीन की शासक कम्युनिस्ट पार्टी ने ‘नैशनल सिक्युरिटी लॉ’ पारित करके हाँगकाँग पर अपनी पकड़ मज़बूत की थी। यह कानून पारित होने के बाद चीन की हुकूमत ने हाँगकाँग के जनतांत्रिक गुटों पर दमन का हथियार चलाना शुरू किया है और सैकड़ों कार्यकर्ता और नेताओं को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया है। चीन ने किया कानून और इसके बाद हुई कार्रवाई, इससे पहले पारित किए गए ‘वन कंट्री, टू सिस्टिम’ को पूरी तरह से अनदेखा करनेवाले समझे जा रहे हैं। इसपर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है और इसके बावजूद चीन ने इस ओर अनदेखा करके, हाँगकाँग पर एकाधिकार थोपने की कोशिशें अधिक गतिमान की हैं।

चीन की संसद में शुक्रवार के दिन पेश किया गया विधेयक इसी का हिस्सा बनता है। चीन की संसद एक ‘रबर स्टैम्प पार्लमेंट’ के तौर पर पहचानी जाती है और इस वजह से, यह विधेयक एकमत से पारित होकर यह कानून में तब्दील होना मात्र औपचारिक घटना बनती है। नए विधेयक के अनुसार, हाँगकाँग के विधिमंडल के पक्ष में खड़े हो रहें सभी उम्मीदवारों को ठुकराने का अधिकार चीन की हुकूमत को प्राप्त होगा। साथ ही, चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत का प्रतिनिधित्व कर रहीं हाँगकाँग की इलेक्टोरल कमिटी को, जनप्रतिनिधियों की सीधे नियुक्ती करने का अधिकार भी प्रदान किया गया है।

‘हाँगकाँग में हुई हिंसा और अस्थिरता की वजह से, इस क्षेत्र की निर्वाचन व्यवस्था में कमी होने की बात साबित हुई है। इस व्यवस्था के खतरों को दूर करना आवश्‍यक है और इसके बाद ही हाँगकाँग पर देशभक्त नियंत्रण कर सकेंगे’, इन शब्दों में चीन की संसद के उपाध्यक्ष वैंग चेन ने इस विधेयक का समर्थन किया। चीन के प्रधानमंत्री ली केकिआंग ने भी, हाँगकाँग के अंदरूनी कारोबार में चीन बाहरी ताकतों की दखलअंदाज़ी बर्दाश्‍त नहीं करेगा और इसे रोकने के लिए पुख्ता कदम उठाएगा, यह चेतावनी दी है।

हाँगकाँग पर पूरा नियंत्रण स्थापित करने के लिए चीन की संसद में विधेयक दाखिल हो रहा था, तभी कम्युनिस्ट हुकूमत ने हाँगकाँग के जनतांत्रिक गुटों के खिलाफ जारी कार्रवाई अधिक तीव्र की है। चीन की यंत्रणाओं ने कुछ दिन पहले ही हाँगकाँग के ४७ नागरिकों पर आरोप दाखिल किया है और गुरुवार के दिन इनके खिलाफ अदालती सुनवाई शुरू हुई है।

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