तुर्की भूमध्य सागर में इंधन खनन करता रहेगा – राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन

अंकारा – भूमध्य सागर के पूर्वी क्षेत्र में नैसर्गिक इंधन का भंडार होने के संकेत मिल रहे होकर, उसके खनन की मुहिम तुर्की जारी ही रखेगा, ऐसा राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन ने डटकर कहा है। पिछले ही महीने में हुई नाटो की बैठक की पृष्ठभूमि पर, तुर्की और ग्रीस के राष्ट्राध्यक्षों में द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इस चर्चा के बाद ग्रीस और तुर्की में होनेवाला तनाव कम होगा, ऐसा अनुमान जताया जा रहा था। लेकिन तुर्की राष्ट्राध्यक्ष ने इंधन खनन के मामले में विवादास्पद बयान करने के कारण, दोनों देशों के बीच का तनाव फिर एक बार बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

पिछले कुछ सालों में किए गए विभिन्न सर्वेक्षणों के जरिए, भूमध्य सागरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर इंधन के भंडार होने की बात सामने आई है। उनमें से अधिक से अधिक भंडारों पर कब्ज़ा करने के लिए तुर्की ने पिछले साल से आक्रामक गतिविधियाँ शुरू कीं हैं। भूमध्य सागर में ग्रीस और साइप्रस की सीमा में होनेवाले इंधन भंडारों पर तुर्की ने अपना हक जताने की शुरुआत की है। अगस्त महीने में और उसके बाद, तुर्की ने ‘रिसर्च शिप’ तथा युद्धपोत भेजकर भूमध्य सागर में एक के बाद एक मुहिमें चलाने की शुरुआत की थी।

तुर्की की इन हरकतों पर ऐतराज जताकर, ग्रीस ने भूमध्य सागर में अपनी रक्षा तैनाती बढ़ाई थी। उसी समय फ्रान्स, संयुक्त अरब अमिरातें, इस्रायल, इजिप्ट जैसे देशों के साथ सामरिक सहयोग मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया था। युरोपीय महासंघ तथा नाटो के माध्यम से तुर्की पर राजनीतिक दबाव डालने की भी कोशिश की थी। ग्रीस की यह आक्रामकता और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर से बढ़ाए गए दबाव के कारण तुर्की को मजबूरन पीछे हटना पड़ा था। अमरीका में हुए सत्ता बदलाव के बाद बायडेन प्रशासन ने भी, अपना समर्थन ग्रीस को होगा, ऐसे संकेत देने के कारण तुर्की मुश्किल में पड़ा माना जाता था।

लेकिन पिछले हफ्ते भर में राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन ने फिर एक बार उकसाऊ कदम उठाने की शुरुआत की है। कुछ ही दिन पहले एर्दोगन ने, २० जुलाई को ‘साइप्रस’ स्थित तुर्कीश इलाके का दौरा करने का ऐलान किया था। सन १९७४ में तुर्की ने साइप्रस पर आक्रमण करके कुछ भक्तों पर कब्जा किया था। इस मुहिम की याद में एर्दोगन ‘तुर्कीश साइप्रस’ की भेंट करने वाले हैं, ऐसा तुर्की सरकार द्वारा बताया गया है। एर्दोगन के इस दौरे पर ग्रीस समेत युरोपीय महासंघ से भी तीव्र प्रतिक्रिया आई थी।

साइप्रस के मुद्दे पर विवाद कायम है, ऐसे में राष्ट्राध्यक्ष एरडोगन ने इंधन खनन का मुद्दा उपस्थित करके, ग्रीस के साथ चल रहे विवाद को नया उकसावा देने की कोशिश की दिख रही है। ‘भूमध्य सागर के पूर्वी क्षेत्र में इंधन के भंडार होने की जानकारी तुर्की को मिली है। इस क्षेत्र में तुर्की इंधन खनन शुरू करने वाला है। इस क्षेत्र पर तुर्की का अधिकार होकर, उसका पूरा का पूरा इस्तेमाल किया जाएगा। भूमध्य सागर का पूर्वी भाग, साइप्रस और नजदीकी सागरी क्षेत्र में तुर्की द्वारा खनन मुहिम चलाई जाएगी’, ऐसा एर्दोगन ने कहा है।

एर्दोगन के बयान पर हालाँकि ग्रीस ने प्रतिक्रिया नहीं दी है, फिर भी युरोपीय महासंघ ने तुर्की को इससे पहले ही प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। इस कारण अगर तुर्की ने भूमध्य सागर में नई मुहिम चलाई, तो महासंघ द्वारा आक्रामक कार्रवाई हो सकती है, ऐसा दावा विश्लेषकों द्वारा किया जा रहा है।

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