यूक्रैन पर हुए सायबर हमले के पीछे रशिया का हाथ होने के संकेत

- ७० से अधिक वेबसाईटस्‌ का नुकसान

किव/मास्को – शुक्रवार को यूक्रैन पर बड़ा सायबर हमला होने की बात स्पष्ट हुई। इस सायबर हमले से यूक्रैन की सरकार से जुड़ी लगभग ७० वेबसाईटस्‌ को नुकसान पहुँचा है और इस पर पोलिश एवं रशियन भाषाओं में संदेश जारी किए गए हैं। इसके पीछे रशिया का हाथ होगा, यह दावा यूक्रैन के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया है। लेकिन, इसकी पुष्टी नहीं की गई है। इससे पहले वर्ष २०१५ और २०१७ में रशिया ने यूक्रैन पर बड़े सायबर हमलें करने की बात स्पष्ट हुई थी।

रशिया का हाथ

शुक्रवार को यूक्रैन के विदेश मंत्रालय के साथ अलग-अलग दूतावासों की वेबसाईटस्‌, सिक्युरिटी ऐण्ड डिफेन्स कौन्सिल एवं शिक्षा विभाग और आपातकाल विभाग की वेबसाईटस्‌ को लक्ष्य किया गया। इनमें से कुछ वेबसाईटस्‌ पर रशियन और पोलिश भाषाओं में संदेश जारी किए गए हैं। इनमें वेबसाईटस्‌ पर दर्ज़ यूक्रैन के नागरिकों की जानकारी प्राप्त की गई है और इसे सार्वजनिक करने का इशारा दिया गया है। यूक्रैन की सुरक्षा यंत्रणा और सायबर यंत्रणाओं ने यह दावा ठुकराया है। किसी भी तरह की संवेदनशील जानकारी इस हमले में चोरी ना होने की बात यूक्रैन ने कही है।

‘सायबर हमले के पीछे पुख्ता किसका हाथ है, यह तुरंत कहना मुमकिन नहीं है। लेकिन, यूक्रैन पर सायबर हमले करने का रशिया का इतिहास सबको ज्ञात है’, इन शब्दों में इन हमलों के पीछे रशिया हो सकती है, ऐसे संकेत विदेश विभाग के प्रवक्ता ओलेग निकोलेन्को ने दिए। रशिया ने यह सभी आरोप ठुकराए हैं। यूक्रैन पर हुए सायबर हमले पर नाटो और यूरोपिय महासंघ ने प्रतिक्रिया दर्ज़ की है।

रशिया का हाथ

‘नए सायबर हमलों की पृष्ठभूमि पर नाटो यूक्रैन को हर तरह की सहायता प्रदान करेगी। अगले कुछ दिनों में नाटो और यूक्रैन में सायबर सुरक्षा के मुद्दे पर समझौता किया जाएगा। इसमें यूक्रैन को नाटो की सायबर सुरक्षा से संबंधित क्षमताओं का इस्तेमाल करने की सुविधा का समावेश है’, यह जानकारी नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने प्रदान की। यूरोपिय महासंघ के विदेश प्रमुख जोसेप बॉरेल ने यूक्रैन की सहायता के लिए महासंघ के सदस्य देशों ने गतिविधियाँ शुरू की हैं, ऐसा कहा है। हमला किसने किया इसके पुख्ता सबूत प्राप्त नहीं हुए हैं, फिर भी इसकी कल्पना आसानी से करना संभव है, इन शब्दों में उन्होंने नाम लिए बिना रशिया की ओर निर्देश किया।

इसी बीच, रशिया ने अपनी माँगों को लेकर फिर से आक्रामक भूमिका अपनाई है। ‘पश्‍चिमी देशों का रिस्पान्स पाने के लिए हम अनंत समय तक रुक नहीं सकते। रशिया की सहनशीलता खत्म हो रही है’, ऐसा तीखा इशारा विदेशमंत्री सर्जेई लैवरोव ने दिया। अमरीका और नाटो अगले हफ्ते तक लिखित जवाब देंगे, यह उम्मीद भी रशियन विदेशमंत्री ने व्यक्त की। नाटो यूक्रैन को सदस्यता बहाल ना करे और पूर्व यूरोप में बढ़ती रक्षा तैनाती बंद करे, ऐसी माँगें रशिया ने की हैं।

English  मराठी

इस समाचार के प्रति अपने विचार एवं अभिप्राय व्यक्त करने के लिए नीचे क्लिक करें:

https://twitter.com/WW3Info
https://www.facebook.com/WW3Info