चीन, उत्तर कोरिया का सामना करने के लिए जापान को अमरिकी परमाणु अस्त्रों की ज़रूरत

- जापान के रक्षाबलप्रमुख का बयान

टोकियो – ‘इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में युद्ध शुरू हुआ तो यह संघर्ष सबसे पहले जापान को नुकसान पहुंचा सकता है। मौजूदा रक्षा तैयारी पर गौर करें तो जापान आत्मरक्षा नहीं कर सकता। इसके लिए जापान को अपने खुद के शस्त्र निर्माण क्षेत्र का विकास करना होगा। लेकिन, तब तक चीन, उत्तर कोरिया का मुकाबला करने के लिए जापान को अमरिकी परमाणु अस्त्रों की ज़रूरत रहेगी’, ऐसी चेतावनी जापान के रक्षाबल प्रमुख जनरल योशिहिदे योशिदा ने दी। साथ ही यूक्रेन में शुरू संघर्ष से जापान को काफी कुछ सिखने जैसा होने का बयान भी जनरल योशिदा ने किया।

परमाणु अस्त्रों की ज़रूरत

जापान की सरकार ने कुछ दिन पहले ही श्वेत पत्र जारी किया था। इसके अनुसार जापान के रक्षाबल के लिए आवश्यक खर्चे में काफी बढ़ोतरी की गई थी। जापान के ‘जीडीपी’ का दो प्रतिशत हिस्सा सेना के लिए खर्च करने का ऐलान किया गया था। कुछ साल पहले तक जापान अपने रक्षा के लिए जीडीपी का एक प्रतिशत हिस्सा ही खर्च कर रहा था। ऐसे ने अपने रक्षा के लिए जापान ने यकायक इतना बड़ा खर्च करने का ऐलान करने से चीन की बेचैनी बढ़ी थी। जापान के विपक्षी नेताओं ने भी किशिदा सरकार की इस आक्रामकता के लिए आलोचना की थी।

ऐसी स्थिति में जापान के रक्षाबलप्रमुख जनरल योशिहिदे योशिदा ने ‘निके एशिया’ नामक वृत्तसंस्था को दिए साक्षात्कार में रक्षा खर्च के इस बढ़ोतरी का समर्थन किया। इसके लिए जनरल योशिदा ने यूक्रेन में शुरू युद्ध का दाखिला दिया। रशिया विरोधी इस जंग में यूक्रेन की सैन्य तैयारी कम पड़ रही हैं, इसका अहसास जनरल योशिदा ने कराया। जापान की मौजूदा रक्षा तैयारी भी आत्मरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जापान को अपनी रक्षा तैयारी बढ़ानी होगी, ऐसा विचार जनरल योशिदा ने रखा।

चीन

जापान की सेना को अन्य कोई भी देश कम समझने की भूल नहीं कर सकेगा, ऐसी रक्षा तैयारी हमें बढ़ानी होगी। इसके लिए जापान को फौजी आक्रामकता का भी विचार करना होगा और इसके लिए अमरीका एवं मित्र देशों की सहायता आवश्यक होगी, इसका अहसास जनरल योशिदा ने कराया। इसमें अमरीका के परमाणु अस्त्रों की जापान की सुरक्षा के लिए ज़रूरत होने की बात रक्षाबलप्रमुख ने रेखांकित की। अमरीका ने जापान को प्रदान की हुई ‘न्युक्लियर अम्ब्रेला’ यानी परमाणु सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता जनरल योशिदा ने बयान की।

पिछले दस सालों से अमरीका के साथ जापान ‘न्युक्लियर अम्ब्रेला’ का विस्तार करने के मुद्दे पर चर्चा कर रहा था। कुछ हफ्ते पहले जून महीने में अमरीका के साथ हुई बैठक के दौरान जापान के ‘न्युक्लियर अम्ब्रेला’ संबंधित समझौते का अवधि बढ़ाने के लिए सहमति होने की याद योशिदा ने बयान की है। इस वजह से अहम जानकारी का आदान प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण एवं मिसाइल सहयोग मुमकीन होगा, ऐसा जनरल योशिदा ने कहा। लेकिन, अमरीका और जापान में हुए इस सहयोग पर चीन ने आपत्ति जताई थी।

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान पर परमाणु हमले हुए थे। हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए इन हमलों में दो लाख से भी अधिक लोग मारे गए थे। इसके बावजूद अमरीका से न्युक्लियर अम्ब्रेला के लिए अधिक सहयोग पाने की कोशिश करके जापान इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा हैं, ऐसा आरोप चीन ने लगाया था। इसपर जवाब देते हुए जापान के रक्षाबलप्रमुख ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जापान की बनी अहमियत स्पष्ट की। जापान इस क्षेत्र का शीर्ष देश हैं और आगे के समय में चीन और उत्तर कोरिया विरोधी संघर्ष शुरू होने पर इसकी आग की लपटें सबसे पहले जापान को सहन करनी होगी। ऐसी स्थिति में इस क्षेत्र में नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सुरक्षा करने के लिए अमरिकी परमाणु अस्त्रों की ज़रूरत होने का बयान जनरल योशिदा ने किया है।

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