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फ्रान्स, जर्मनी में ५६ वर्षों बाद ऐतिहासिक ‘एलिसी करार’ का पुनरुद्धार

आहेन – ‘प्रखर राष्ट्रवाद, आर्थिक समस्या और आतंकवाद से युरोप को बने खतरे में बढोतरी हुई है। इस विरोध में जर्मनी और फ्रान्स ने सूर में सूर मिलाना जरूरी हुआ है’, यह कहकर फ्रान्स के राष्ट्राध्यक्ष इमैन्युएल मैक्रौन इन्होंने फ्रान्स और जर्मनी में ‘एलिसी करार’ का ऐलान किया। दोनों देशों में हुआ यह व्यापाक लष्करी करार, यानी नाटो के लिए विकल्प होने की चर्चा शुरू हुई है। दोनों देशों के नेताओं ने यह बात ठुकराई है, फिर भी यह सहयोग युरोपीय देशों की संयुक्त सेना बनाने की ओर बढाया कदम होने की बात स्विकारी है।

फ्रान्स और जर्मनी के सीमा पर ‘आहेन’ इस ऐतिहासिक शहर में फ्रान्स के राष्ट्राध्यक्ष मैक्रौन और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल इन्होंने यह करार किया। फ्रान्स और जर्मनी में आर्थिक, रक्षा और युरोपीयन नीति के संबंधी करार भी इस दौरान होने का ऐलान दोनों देशों ने किया है। लेकिन, फ्रान्स और जर्मनी में लष्करी सहयोग के संबंधी विशेष समझौते पर दोनों देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए है, यह दावा किया जा रहा है। जर्मन चांसलर मर्केल इन्होंने माध्यमों को जानकारी देते समय भी यह व्यापक लष्करी सहयोग रेखांकित किया। आगामी समय में फ्रान्स या जर्मनी की सार्वभौमत्व पर हमला हुआ तो सीधे तौर पर सहयोग करने की बात दोनों देशों के नेताओं ने स्वीकार की है।

साथ ही जर्मनी ने किए निवेदन के नुसार ‘युरोपीयन आर्मी’ का गठन करने के लिए फ्रान्स समर्थन दे, यह गुजारिश जर्मनी की चांसलर मर्केल इन्होंने इस दौरान की। जल्द ही युरोप की स्वतंत्र और संयुक्त सेना कार्यान्वित होगी, यह विश्‍वास मर्केल?इन्होंने व्यक्त किया। लेकिन, युरोपीयन आर्मी का गठन पश्‍चिमी देशों का ‘नाटो’ इस लष्कर संगठन के लिए विकल्प या स्पर्धक नही रहेगा, यह मर्केल इन्होंने स्पष्ट किया। वही, अमरिका पुरस्कृत ‘नाटो’ के सिद्धांतो पर ‘युरोपीयन आर्मी’ का निर्माण किया जाएगा। जर्मनी के पहल से तैयार हो रही ‘युरोपीयन आर्मी’ नाटो के लिए पूरक रहेगी, यह दावा मर्केल इन्होंने किया। लेकिन, फ्रान्स और जर्मनी में रक्षा संबंधी करार?एवं युरोपीयन आर्मी की यह योजना नाटो को किनारा करने वाली होने का दावा हो रहा है।

पिछले कुछ महीनों से मैक्रौन और मर्केल युरोपीय महासंघ के सामने ‘युरोपीयन आर्मी’ संबंधी तकादा कर रही है। फ्रान्स और जर्मनी के नेतृत्व में तैयार होने वाली ‘युरोपीयन आर्मी’ युरोपीय देशों की सुरक्षा के लिए सहायक साबित होगी, यह दावा दोनों नेता कर रहे है। साथ ही भविष्य में चीन, रशिया और अमरिका से युरोप की सुरक्षा करने के लिए ‘युरोपीयन आर्मी’ की जरूरत है, यह मैक्रौन इन्होंने दो महीनों पहले एक रेडिओ को दी हुई मुलाकात में कहा था। अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प इन्होंने मैक्रौन एवं मर्केल इनकी इस ‘युरोपीयन आर्मी’ की संकल्पना पर जोरदार आलोचना की थी। लेकिन, फ्रान्स और जर्मनी के राष्ट्रप्रमुख ‘युरोपीयन आर्मी’ की योजना पर कायम है और ‘एलिसी करार’ इसी लिए किया गया है, यह दावा युरोप के विश्‍लेषक कर रहे है।

इस करार के लिए फ्रान्स और जर्मनी के राष्ट्रप्रमुख ने तय की हुई जगह काफी सूचक होने की बात कही जा रही है। नववे शतक में रोम साम्राज्य का युरोप में विस्तार करने वाले ‘चार्लमॅग्ने’ या ‘चार्ल्स द ग्रेट’ इस राजा के साम्राज्य की राजधानी ‘आहेन’ ही थी। इस वजह से मैक्रौन और मर्केल इन्होंने ‘एलिसी करार’ के लिए इस शहर का चुनाव करके सूचक संकेत दिए हा, यह दावा किया जा रहा है।

इस दौरान, फ्रान्स और जर्मनी में हुआ यह करार युरोपीय महासंघ को दरकिनार करनेवाला ना हो, ऐसी चिंता युरोपीय महासंघ के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क इन्होंने व्यक्त की है। वही, युरोपीय महासंघ से बाहर होने की तैयारी में ब्रिटेन होते हुए फ्रान्स और जर्मनी ने ‘आहेन’ में यह करार करना ध्यान आकर्षित कर रहा है, ऐसा झेक प्रजासत्ताक के नेता ‘जैन झाराडिल’ इन्होंने कहा है।

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