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ब्रिटेन को ‘ब्रेक्जिट समझौता’ ठुकराने के भयंकर परिणाम भुगतने होंगे – प्रधानमंत्री थेरेसा मे का इशारा

लंदन – ‘ब्रेक्जिट’ समझौता मंजूर कराने के लिए अपने पद का इस्तिफा देने की तैयारी दिखा रही ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे इन्हें संसद ने फिर से पराभव का झटका दिया है| लगातार तिसरी बार संसद ने प्रधानमंत्री में और यूरोपीय महासंघ ने तैयार किया ‘ब्रेक्जट डील’ का संयुक्त प्रस्ताव ३४४ बनाम २८६ मतों से ठुकराया है| इस इन्कार के गंभीर परिणाम होंगे, यह इशारा ब्रिटेन की प्रधानमंत्री ने दिया है और वर्ष २०१५ के बाद तिसरी बार देश को चुनाव का सामना करना होगा, यह चेतावनी दी है| संसद में हुई गडबडी और राजधानी लंदन के साथ देश के कुछ अन्य हिस्सों में शुरू प्रदर्शनों की वजह से ब्रिटेन अराजकता की दिशा में जा रहा है, यह संकेत सियासी विश्‍लेषक और तज्ञ दे रहे है|

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शुक्रवार रात ब्रिटेन की संसद में फिर एक बार ‘ब्रेक्जिट’ के प्रस्ताव पर वोट किया गया| यूरोपीय महासंघ के साथ हुए समझौते के नुसार ब्रिटेन २९ मार्च के दिन ही महासंघ से बाहर होनेवाला था| इस वजह से यह वोटिंग ध्यान आकर्षित कर रहा था| इस वोटिंग को दोन दिन शेष थे तभी, प्रधानमंत्री थेरेसा मे इन्होंने इस समझौते को समर्थन प्राप्त होता है तो प्रधानमंत्री पद का त्याग करने की तैयारी दिखाई थी| मे इनके इस निर्णायक चेतावनी की वजह से सत्तापक्ष से समझौते पर हो रहा कडा विरोध बंद होगा और समझौते को मंजूरी मिलेगी, ऐसी संभावना व्यक्त की गई थी|

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लेकिन, शुक्रवार के रोज संसद में हुए वोटिंग में प्रधानमंत्री मे के ‘ब्रेक्जिट समझौते की ३४४ के विरूद्ध २८६ इस तर ५८ मतों के फरक से हार हुई थी| वोटिंग के दौरान सत्ता पक्ष के ३४ से अधिक सदस्यों ने समझौते के विरोध में वोट किया| साथ ही मे की सरकार को समर्थन देनेवाले आयर्लंड के ‘डीयूपी’ पार्टी ने भी प्रस्ताव के विरोध में वोट किया| इस वजह से ‘ब्रेक्जिट’ एक बार फिर ठुकराया गया है|

संसद ने ठुकराने से प्रधानमंत्री मे काफी निराश हुई है| यह बात स्पष्ट हो रही थी, तभी प्रधानमंत्री मे ने इसके आगे ब्रिटेन को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, यह चेतावनी भी दी| शुक्रवार के दिन हुआ वोट आखरी विकल्प था, यह दावा करके इशके आगे ब्रिटेन के हाथ में कुछ भी बचा नही रहेगा, यह नाराजगी भी मे ने व्यक्त की| साथ ही किसी भी प्रकार से नया हल निकला नही तो फिर से चुनाव का सामना करना होगा, यह इशारा भी उन्होंने दिया|

ब्रिटेन की संसद ने प्रधानमंत्री मे इनका ‘ब्रेक्जिट’ समझौता तिसरी बार ठुकराने से पहले इस समझौते के लिए रखे अन्य विकल्प भी ठुकराए है| इस वजह से ब्रिटेन में सियासी दल वास्तव में क्या उम्मीद करते है, इस को लेकर काफी गडबडी और अनिश्‍चितता का माहौल है| इसका असर देश के कई हिस्सों में दिखना शुरू हुआ है| कल रात संसद ने समझौता ठुकराने के बाद राजधानी लंदन में हजारों लोगों ने प्रदर्शन शुरू किए| यह प्रदर्शनकारी ‘ब्रेक्जिट’ के समर्थक है और उनकी सुरक्षा यंत्रणा के साथ मुठभेड होने का समाचार है|

इस पृष्ठभूमि पर ब्रिटीश माध्यम एवं विश्‍लेषकों ने ‘ब्रेक्जिट’ की पृष्ठभूमि पर फिलहाल बनी स्थिति देश अराजकता की दिशा में जाने के संकेत दे रही है, यह दावे किए जा रह है| संसद के बाहर एवं राजधानी के कई हिस्सों में हथियारी पुलिस तैनात किए गए है एवं सांसदों के साथ गाली गलोच हो रही है| यह स्थिति सामान्य नही है, यह प्रतिक्रिया लेबर पार्टी की सदस्या लिसा नंदी इन्होंने दर्ज की है|

इस दौरान, यूरोपीय महासंघ ने भी ‘ब्रेक्जिट’ समझौता परास्त होने पर कडी प्रतिक्रिया दर्ज की है| ब्रिटीश सरकार ने १० अप्रैल के भीतर नया प्रस्ताव देने को कहा है, नही तो १२ अप्रैल के दिन ‘नो डील’ के साथ ब्रिटेन महासंघ से बाहर निकला होगा, यह इशारा यूरोपियन कौंसिल के प्रमुख डोनाल्ड टस्क इन्होंने दिया| ‘ब्रेक्जिट’ के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए १० अप्रैल के दिन बैठक का आयोजन होगा, यह घोषणा भी टस्क ने की है| टस्क इनके इस वक्तव्य के बाद आयर्लंड, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेन्मार्क के नेताओं ने भी ब्रिटीश संसद के निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की है|

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