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‘आसियन’ के लिए सोने पर निर्भर नए चलन की जरूरत – मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद का प्रस्ताव

टोकिओ – ‘फिल हाल अंतरराष्ट्रीय बाजार और अर्थव्यवस्था अमरिकी चलन डॉलर से जुडी है और इसमें एक ही देश के लिए जरूरी बदलाव करके अन्य देशों के चलनों के लिए मुश्किलें खडी की जा रही है। एक ही देश में हो रही घटनाओं का असर अन्य देशों पर होता है’, इन शब्दों में अमरिकी डॉलर की आलोचना करके मलेशिया के प्रधानमंत्री ने ‘आसियन’ के लिए नए चलन का प्रस्ताव रखा। यह चलन सोने पर निर्भर हो और इसका इस्तेमाल खास तौर पर व्यापार के लिए हो, यह भी मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद इन्होंने अपने प्रस्ताव में कहा है।

मलेशिया के प्रधानमंत्री फिल हाल जापान की तीन दिन की यात्रा कर रहे है और इस दौरान वह राजधानी टोकिओ में हुए ‘फ्युचर ऑफ एशिया’ परिषद में उपस्थित रहे। इस परिषद में संबोधित करते समय प्रधानमंत्री महाथिर इन्होंने ‘आसियन’ देशों के लिए स्वतंत्र चलन की संकल्पना रखी। इसके लिए उन्होंने वर्ष १९९८ में आग्नेय एशिया में उभरे आर्थिक संकट का भी दाखिला दिया।

‘वर्ष १९९७ में थायलैंड में आर्थिक संकट का उभरने के बाद समस्या से बाहर निकलने के लिए मलेशिया को उनका चलन डॉलर से जोडने को कहा गया था। उसके बाद व्यापारियों ने मलेशिया के चलन की बिक्री करने से उनके चलन के मोल में काफी गिरावट हुई थी। चलन की गिरावट होने के बाद कुछ लोगों ने वही चलन दुबारा खरीद किया था। इस तरह हो रहे चलन के व्यवहार अर्थव्यवस्था के लिए ज्यादा लाभदायी नही है। चलनों के ऐसे व्यवहार से देश की कामयाबी सामने नही आती’, इन शब्दों में उन्होंने अमरिकी डॉलरपर निर्भर चलनव्यवस्था पर आलोचना की।

इस पर हल निकालना है तो आग्नेय एशियाई देशों के लिए सोने पर निर्भर स्वतंत्र चलन का एक अच्छा विकल्प हो सकता है, इन शब्दों में मलेशिया के प्रधानमंत्री ने नए चलन का प्रस्ताव रखा। इसका जिक्र उन्होंने ‘स्पेशल करन्सी ऑफ ईस्ट एशिया’ ऐसा किया और संभव हुआ तो बाहर के अन्य देश भी इस चलन का इस्तेमाल कर सकेंगे, यह संकेत भी उन्होंने दिए। साथ ही यह चलन एशियाई देशों में होनेवाले व्यापारी व्यवहारों के लिए ही इस्तेमाल होगा, यह भी प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद इन्होंने स्पष्ट किया।

पिछले कुछ वर्षों में रशिया और चीन इन दो देशों से अमरिकी डॉलर को विकल्प के तौर पर चलन उपलब्ध करने के लिए तेजीसे गतिविधियां हो रही है। इन दोनों देशों ने सोने के आरक्षित भंडार में बडी तादाद में बढोतरी की है और चीन सोने पर निर्भर चलन उपलब्ध करने के लिए जरूरी यंत्रणा का निर्माण कर रहा है, यह दावे भी सामने आ चुके है।

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