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पाकिस्तान की सहायता से परमाणु बम प्राप्त करने की कोशिश में है तुर्की – अमरिकी समाचार प्रत्र का दावा

वॉशिंगटन – सीरियन कुर्दों पर हो रहे तुर्की के हमलें रोकने में कामयाब ना होनेवाले अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प तुर्की को परमाणु बम की प्राप्ति करने से रोक सकेंगे क्या? यह सवाल अमरिका के ‘द न्यूयॉर्क टाईम्स’ इस समाचार पत्र ने किया है| तुर्की की महत्वाकांक्षा सीर्फ सीरिया तक सीमित नही है, यह देश परमाणु बम बनाने की तैयारी में जुटा है, यह कहकर इस समाचार पत्र ने ट्रम्प प्रसासन को सावधानी बरतने की चेतावनी दी है| इसके साथ ही पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक और परमाणु तकनीक का कालाबाजार चलानेवाले पाकिस्तानी वैज्ञानिक ए.क्यू.खान के साथ तुर्की के संबंध होने का आरोप भी न्यूयॉर्क टाईम्स ने अपने वृत्त में किया है|

  

परमाणु हथियारों का प्रसार प्रतिबंधित करने के लिए तय किया कानून नजरअंदाज करके पाकिस्तान के एटमी वैज्ञानिक ए.क्यू.खान ने ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया को परमाणु तकनीक प्रदान की थी| पंधरह वर्ष पहले ही यह बात साबित हुई थी और पाकिस्तान के एटमी वैज्ञानिक ए.क्यू.खान ने उनपर लगाए आरोप स्वीकार भी किए थे| पर बाद में हमनें अपने देश की निती के अनुसार यह काम शुरू रखा था, ऐसा उन्होंने कहा था| परमाणु हथियारों के प्रसार जैसे गंभीर अपराध में हाथ होने की बात स्वीकारने के बाद भी ए.क्यू.खान और पाकिस्तान पर कार्रवाई नहीं हुई थी| क्यों की उस समय अफगानिस्तान के आतंकवाद विरोधी युद्ध के लिए अमरिका को पाकिस्तान के सहयोग की जरूरत थी|

इसके लिए अमरिका के उस समय के बुश प्रशासन ने पाकिस्तान के इन अपराधों की ओर अनदेखा किया था| पर, १५ वर्ष बाद भी पाकिस्तान परमाणु बम बनाने के लिए तुर्की की सहायता कर रहा है, यह बात स्पष्ट हुई है| इससे पहले ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया को परमाणु तकनीक प्रदान करनेवाले पाकिस्तान का तुर्की यह चौथा ग्राहक देश है क्या? यह सवाल किया जा रहा है| साथ ही ए.क्यू.खान के साथ तुर्की के संबंध बढ रहे है, इस बात पर ध्यान आकर्षित करके ‘द न्यूयॉर्क टाईम्स’ ने यह सवाल किया है| साथ ही पाकिस्तान को परमाणु तकनीक और परमाणु बम के लिए आवश्यक  सामान प्राप्त करने के लिए तुर्की ने सहायता की थी, इसका दाखिला भी इस समाचार पत्र ने दिया है|

इस खबर से पाकिस्तान परमाणु हथियारों के प्रसार पर लगाई पाबंदी का उल्लंघन कर रहा है, यह काफी गंभीर बात फिर से स्पष्ट हुई है| कुछ दिन पहले ही तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा दुनिया के सामने घोषित की थी| कुछ देशों के हाथ में परमाणु हथियार है और तुर्की परमाणू हथियार प्राप्त नही कर सकता, यह बात हम स्वीकारेंगे नही, ऐसा एर्दोगन ने कहा था| यानी की अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा पूरी करने की तैयारी होने के बाद ही तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष ने यह बयान किया है, यही संकेत प्राप्त हो रहे है| इसी बीच भारत का विरोध स्वीकार करके तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष लेने से इससे जुडी संदिग्धता और भी बढाई है|

भारत जैसे देश को दुखाकर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष लेने की तैयारी दुनिया के प्रमुख देशों ने भी नही दिखाई थी| इस्लामधर्मी देश भी कश्मीर मुद्दे पर भारत के पक्ष में खडे रहे थे| ऐसी स्थिति में तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष ने पाकिस्तान के समर्थन में किया बयान इसके पीछे ‘एटमी सियासत’ होने की बात अब स्पष्ट होने लगी है| तुर्की यह नाटो का सदस्य देश है और नाटो के अन्य किसी भी देश पर आक्रमण होने पर उसे नाटो के सदस्य देश अपने पह हुआ हमला समझते है और उस आक्रमण को नाटो से प्रत्युत्तर दिया जाता है| ऐसी कडी सुरक्षा होने के बावजूद तुर्की परमाणु हथियार प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ रहा है, यह बात ध्यान आकर्षित कर रही है|

यह बात नाटो के विरोध में जानेवाली है और अगले दौर में तुर्की को इससे झटका लग सकता है| साथ ही तुर्की को परमाणु तकनीक एवं संवेदनशील परमाणु सामान प्रदान करनेसंबंधी पाकिस्तान पर लगा आरोप सिद्ध हुआ तो उसके घातक परिणाम पाकिस्तान को भुगतने होंगे| अमरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस बार पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों के प्रसार पर पाबंदी लगानेवाले कानुन का उल्लंघन करने की घटना की ओर अनदेखा करना बर्दाश्त करना मुमकिन नही होगा| इसी लिए ‘द न्यूयॉर्क टाईम्स’ ने दिए इस खबर की बडी गुंड सुनाई देगी, यह संकेत प्राप्त हो रहे है|

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