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नाटो के विस्तार में खाडी देशों का समावेश हो – अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प

वॉशिंग्टन – अमरिका और ईरान के बीच बने तनाव की पृष्ठभूमि पर नाटो ने अपने विस्तार में खाडी देशों पर ध्यान देकर उनका समावेश करें, यह मांग अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने रखी है| नाटो के प्रमुख जेन्स स्टॉल्टनबर्ग के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान ट्रम्प ने यह मांग रखी है, यह बताया गया| अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने भी नाटो प्रमुख से इसी मुद्दे पर बातचीत की है और नाटो ने इस बात की पुष्टी भी की है| इससे पहले वर्ष २०१८ में ट्रम्प ने ईरान के विरोध में ‘अरब नाटो’ स्थापित करने की कोशिश की थी|

ईरान के लष्करी नेता जनरल सुलेमानी पर हुई कार्रवाई के बाद खाडी क्षेत्र में काफी तनाव की स्थिति बनी है और संघर्ष शुरू होने के संकेत भी दिए जा रहे है| सुलेमानी पर हुई कार्रवाई के बाद ईरान ने इराक स्थित अमरिकी लष्करी ठिकानों पर मिसाइल हमलें किए है| इराक में ईरान समर्थक संगठनों ने दो बार अमरिकी दूतावास पर राकेट भी छोडे|

पर, इस पर लष्करी कार्रवाई से जवाब दिए बिना अमरिका ने ईरान पर कडे प्रतिबंध लगाने का निर्णय किया| इसी बीच इसके आगे ईरान के विरोध में बडा संघर्ष करने के लिए अमरिका सक्षम है फिर भी इसमें यूरोप और अन्य मित्रदेशों को शामिल कराने के संकेत दिए गए है| इस पृष्ठभूमि पर ‘नाटो’ जैसे लष्करी संगठन में खाडी क्षेत्र के देशों को शामिल कराने की रखी मांग ध्यान आकर्षित करनेवाली साबित होती है|

नाटो के प्रमुख स्टॉल्टनबर्ग के साथ फोन पर हुई बातचीत के दौरान राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने खाडी क्षेत्र के देशों को नाटो की सदस्यता देने की और इन देशों को शामिल करने पर विस्तारित नए गुट को ‘नाटोम’ या ‘नाटो प्लस एमई’ यह नाम देने के संकेत भी दिए| ‘नाटो का विस्तार होना आवश्यक है और इसमें खाडी क्षेत्र के देशों का समावेश होना भी जरूरी है| इस वजह से अब नाटो ने खाडी क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी होगी’, ऐसे शब्दों में ट्रम्प ने नाटो के विस्तार की मांग रखी|

नाटो ने जिम्मेदारी संभाली तो अमरिका को बडी मात्रा में अपनी सेना को स्वदेशी लौटने के लिए बोलना मुमकिन होगा, यह दावा भी अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष ने किया| नाटो ने खाडी खाडी क्षेत्र में जारी ‘आयएस’ विरोधी संघर्ष को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है, यह भी ट्रम्प ने कहा| इससे पहले अमरिका ने ‘आयएस’ को पराजित करके यूरोप को राहत दिलाई है, इसका एहसास यूरोप को रखना होगा, यह बयान भी राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने दिया है| ट्रम्प के इस बयान के बाद नाटो ने भी स्वतंत्र निवेदन जारी किया है| इस निवेदन में प्रादेशिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के विरोध में नाटो सक्रिय भूमिका अपनाए, यह तय होने की बात स्पष्ट की गई है|

नाटो के प्रमुख स्टॉल्टनर्ब ने गुरूवार के दिन अमरिका के विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ से बातचीत करने की जानकारी भी सामने आयी है| इसमें भी नाटो और खाडी क्षेत्र में नाटो की भूमिका के मुद्दे पर अभी बातचीत ना होने की जानकारी पोम्पिओ ने साझा की| पिछले वर्ष में सौदी अरब के ईंधन परियोनजाओं पर हुए हमलों के बाद अमरिकी रक्षामंत्री मार्क एस्पर ने सौदी समेत अन्य अरब देशों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वीकारने के लिए नाटो से निवेदन किया था|

वर्ष २०१७ में ट्रम्प की पहल से अरब -इस्लामी देशों की बैठक बुलाई गई थी| आतंकवादविरोधी संघर्ष के लिए अरब-इस्लामी देशों का संयुक्त संगठन स्थापित करने का ऐलान अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष ने किया था| इसके बाद ‘मिडल ईस्ट स्ट्रैटेजिक अलायन्स’ (एमईएसए-मेसा) समझौता भी किया गया| अरब देशों का यह ‘मेसा’ संगठन ईरान की आक्रामकता, आतंकवाद और चरमपंथ के विरोध में दीवार की तरह काम करेगी और इस क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करेगी, यह दावा भी उस समय यिा गया था|

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