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नई सरकार गठित होने पर लेबनान पर होगा हिजबुल्लाह का पुरा कब्जा – लेबनान के विपक्षी नेता का इशारा

बैरूत/पैरिस/लंदन – ‘हसन दियाब के नेतृत्व में लेबनान में नई सरकार गठित हुई है| पर, इस के साथ ही लेबनान पर हिजबुल्लाह का पुरा कब्जा स्थापित हुआ है’, यह इशारा लेबनान के वरिष्ठ नेता ने दिया है| तभी, हिजबुल्लाह ईरान की हुकूमत के लिए काम करनेवाली संगठन है और लेबनीज जनता के साथ उसका जरा भी लेनादेना नही है, यह आलोचना अमरिका ने की| दौरान, लेबनान में सत्ता परिवर्तन हुआ हो तो भी प्रदर्शनकारियों ने दियाब सरकार का स्वीकार करने से इन्कार करके प्रदर्शन जारी रखे है|

पिछले कई हफ्तों तक मुश्किलें खडी करने के बाद मंगलवार के दिन लेबनान में नई सरकार गठित हुई| लेबनान के विद्यापीठ में प्राध्यापर रहें हसन दियाब ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी स्वीकारी| नई सरकार में राष्ट्राध्यक्ष मिशेल एयॉन की ‘फ्री पैट्रियॉटिक मुव्हमेंट’ दल के छह और हिजबुल्लाह, अमल मुव्हमेंट, मरदा मुव्हमेंट, लेबनीज डेमोक्रैटिक पार्टी का एक एक सदस्य शामिल है| उपरी सभी दल हिजबुल्लाह से जुडे एवं ईरान-सीरिया से संबंधित होने की आलोचना पहले भी हुई थी| इस वजह से लेबनान के वरिष्ठ नेता एवं लेबनीज जनता दियाब की सरकार पर नाराजगी व्यक्त कर रही है|

‘इस नई सरकार के अधिकांश मंत्री हिजबुल्लाह या हिजबुल्लाह से जुडे भूतपूर्व गुप्तचर यंत्रणा के प्रमुख जमिल सईद से संबंधित है| इस वजह से नई सरकार गठित होने के साथ ही हिजबुल्लाह ने लेबनान पर अपनी पकड और भी मजबूत की है’, यह इशारा लेबनान की ‘ड्रूझ’ दल के वरिष्ठ नेता मरवान हमादे ने दिया है| प्रधानमंत्री दियाब यह लेबनान में नई सरकार का चेहरा है, फिर भी हिजबुल्लाह और लेबनान में सीरिया से जुडे नेता इस देश पर राज कर रहे है, यह आरोप हमादे ने रखा है|

लेबनान के नेताओं की तरह जनता भी दियाब सरकार पर नाराज होे की बात सामने आ रही है| बुधवार से ही लेबनान की राजधानी बैरूत समेत अन्य प्रमुख शहरों में लेबनान की जनता ने प्रदर्शन शुरू किए है| नई सरकार अपनी उम्मीद के अनुसार नही है, यह कहना प्रदर्शनकारी रख रहे है| देश में सियासी सुधार की मांग लेबनीज प्रदर्शनकारी कर रहे है| इसमें आजादी, किसी भी पंथ से जुडी ना होनेवाली और भ्रष्टाचार के आरोप ना होने वाले नेता की सरकार स्थापित करने की मांग प्रदर्शनकारी कर रहे थे| पर, लेबनान में ईरान से जुडे सियासी दलों ने ही इस नई सरकार का गठन किया होने से उनपर भरोसा करना संभव नही होगा, यह बात प्रदर्शनकारी रख रहे है|

अमरिका ने भी दियाब सरकार पर कडी आलोचना की है| साथ ही लेबनान की सरकार पर प्रभाव रखने वाली हिजबुल्लाह संगठन ही ईरान की हुकूमत की प्रतिनिधि के तौर पर लेबनान में काम कर रही है| लेबनान की जनता के बारे में इस आतंकी संगठन को कुछ भी लेना देना नही है, यह दावा जर्मनी में स्थित अमरिकी राजदूत रिचर्ड ग्रेनेल ने किया| इस वजह से ईरान के समर्थन पर आतंकी गतिविधियां कर रही और खाडी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो रही हिजबुल्लाह पर पुरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग अमरिका ने यूरोपिय देशों के सामने रखी है| ब्रिटेन के सिवा अन्य यूरोपिय देशों ने हिजबुल्लाह को प्रतिबंधों की कार्रवाई से अलग रखा है| इसके लिए अमरिका, इस्रायल ने फ्रान्स, जर्मनी एवं अन्य यूरोपिय देशों की आलोचना की थी|

इसी बीच लेबनान में सत्ता परिवर्तन हुआ हो पर फिर भी इस देश के सामने खडी सियासी, आर्थिक और सामाजिक समस्या का हल निकला नही है| दियाब की सरकार ने लेबनान की डोर हाथ में पकडी हो, पर इसे अमरिका एवं अरब देशों का समर्थन नही है| इसके अलावा लेबनान की अर्थव्यवस्था निचलें स्तर पर जा पहुंची है और लेबनीज जनता यह सरकार भी बरखास्त करने की मांग कर रही है|

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