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‘साउथ चायना सी’ के बाद चीन अंटार्क्टिका पर भी कब्ज़ा करेगा – ऑस्ट्रेलियन अभ्यास गुट की चेतावनी

कैनबेरा – ‘साउथ चायना सी’ को लेकर चीन ने रखें उद्देश्‍य को पहचानने में जिस प्रकार देरी हुई, वैसी गलती अंटार्क्टिका को लेकर ना हों। अंटार्क्टिका में जारी चीन की गतिविधियाँ यदि समय पर नहीं रोकीं, तो चीन इस क्षेत्र पर कब्ज़ा करेगा, ऐसी चेतावनी ‘ऑस्ट्रेलियन स्टैटेजिक पॉलिसी इन्स्टिट्युट’ इस अभ्यास गुट ने दी है। ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच तनाव बना है और ऐसें में इस अभ्यास गुट ने दी चेतावनी दुनियाभर के सामरिक विश्‍लेषकों का ध्यान आकर्षित करनेवाली साबित हो रही है।

अंटार्क्टिका क्षेत्र को लेकर चीन ने अपनाई महत्वाकांक्षा, वहाँ की लष्करी गतिविधियाँ और इससे ऑस्ट्रेलिया को बनें खतरें, इनके बारे में ऑस्ट्रेलियन अभ्यास गुट ने ‘आईज्‌ वाइड ओपन’ नाम की रिपोर्ट तैयार की है। इस अभ्यास गुट के सहायक लेखक एंथनी बर्गिन ने जापान के समाचार पत्र से की बातचीत के दौरान इस रिपोर्ट की जानकारी साझा की। लगभग तीन दशक पहले ऑस्ट्रेलिया ने ही चीन को अंटार्क्टिका के क्षेत्र में प्रवेश दिला दिया था। अंटार्क्टिका में अनुसंधान का कार्य करने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने चीन की कंपनियों से काफ़ी बड़ी मात्रा में सहायता प्राप्त की थी। लेकिन, अब इस क्षेत्र में चीन ने किया हुआ प्रवेश ऑस्ट्रेलिया के लिए अब खतरनाक साबित होने लगा हैं, यह बात भी बर्गिन ने कही है।

वर्ष १९८३ में चीन की ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ ने ‘अंटार्क्टिका ट्रिटी सिस्टिम’ के समझौते पर हस्ताक्षर करके इस क्षेत्र में कदम रखा था। तभी से चीन ने धीरे धीरे इस क्षेत्र में अपना विस्तार किया। अंटार्क्टिका के ४२ प्रतिशत क्षेत्र पर ऑस्ट्रेलिया का दावा है और इस क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की चार लैब बनीं हैं। ऐसें में इस क्षेत्र पर किसी भी प्रकार का दावा ना होने के बावजूद, चीन ने भी अंटार्क्टिका में चार लैब का निर्माण किया है और पाँचवी लैब के निर्माण के लिए चीन की कोशिश जारी है। इसके अलावा दो विशाल आईस-ब्रेकर जहाज़ और मछुआरी जहाज़ चीन ने इस क्षेत्र में तैनात किए हैं।

चीन की इस सार्वजनिक एवं निजी कंपनियों का अंटार्क्टिका में बढ़ रहा निवेश इशारा देनेवाला है, यह चेतावनी बर्गिन ने दी है। इसके लिए ‘साउथ चायना सी’ में चीन की गतिविधियों का दाखिला भी ऑस्ट्रेलियन अभ्यासकों ने दिया। मछली पकड़ना, र्इंधन खनन करते करते चीन ने साउथ चायना सी क्षेत्र में कृत्रिम द्विपों का निर्माण करके सेना की तैनाती भी शुरू की। अंटार्क्टिका के क्षेत्र में भी लैब और मछली पकड़ने के बहाने, चीन अपनी नीजि कंपनियों को इस क्षेत्र में घुसा रहा है। चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग ने तैयार की हुई नीति के अनुसार, चीन की निजी एवं सार्वजनिक कंपनियों ने अंटार्क्टिका में की हुई घुसपैठ ऑस्ट्रेलिया के लिए चिंता का विषय साबित हो सकता हैं।

जिनपिंग की नई नीति के अनुसार, चीन की सेना कभी भी निजी कंपनियों पर कब्ज़ा कर सकती है। अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने जिनपिंग की इसी नीति पर उंगली रखकर, अमरिकी तकनीकी क्षेत्र में बढ़ रहें चीन के निवेश को लेकर चिंता जताई थी। ‘साउथ चायना सी’ की तरह चीन का लष्करी प्रभाव अंटार्क्टिका पर नहीं पड़ेगा इस भ्रम में ऑस्ट्रेलिया को रहना नहीं चाहिए, यह चेतावनी बर्मिन ने दी है।

अंटार्क्टिका में बड़ी मात्रा में खनिज संपत्ति मौजूद है और सामरिक दृष्टि से भी अंटार्क्टिका की बड़ी अहमियत है। इस वज़ह से, चीन जैसें अति महत्वाकांक्षी देश ने अंटार्क्टिका पर अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए शुरू की हुई गतिविधियाँ सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती हैं। इस प्रकार चीन दुनिया में सामरिक एवं रणनीति की दृष्टि से अहम साबित हो रहें समुद्री क्षेत्र पर वर्चस्व स्थापित करने की तैयारी में है और इससे खतरा महसूस कर रहें देशों ने चीन के विरोध में एक होने का निर्णय किया हुआ दिख रहा है। इसमें अमरीका और जापान के साथ ऑस्ट्रेलिया ने भी पहल की है। ऑस्ट्रेलिया अपने क्षेत्र में जारी चीन की हर एक गतिविधि पर बारीकी से नज़र रखकर होने की बात ‘आईज्‌ वाईड ओपन’ की रिपोर्ट से दोबारा सामने आयी है।

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