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अमरीका के क्षेपणास्त्रों के मुद्दे पर चीन ने दी जापान को धमकी

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बीजिंग/टोकियो – अमरीका की भू-राजनीतिक साज़िश का शिक़ार होकर उनके क्षेपणास्त्र अपनी भूमि पर तैनात मत करना; अन्यथा उसके गंभीर परिणाम तुम्हें ही भुगतने पड़ेंगे, ऐसे तीख़े शब्दों में चीन ने जापान को धमकाया है। चीन की आक्रमक वर्चस्ववादी हरक़तों पर रोक लगाने के लिए अमरीका ने इंडो-पॅसिफिक क्षेत्र में मड़े पैमाने पर लष्करी तैनाती की नीति पर अमल करने की शुरुआत की है। उसीके एक भाग के रूप में, कुछ पूर्वी एशियाई देशों में मीड़ियम रेंज क्षेपणास्त्रों की तैनाती करने की योजना है। उसपर चीन से तीव्र प्रतिक्रिया आयी होकर, अमरिकी क्षेपणास्त्रों की तैनाती की संभावना होनेवाले देशों पर दबाव लाने की कोशिशें शुरू हुईं हैं।

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‘ऐतिहासिक पार्श्वभूमि के कारण, जापानी लष्कर की गतिविधियाँ हमेशा ही पड़ोसी देश तथा आंतर्राष्ट्रीय समुदाय का ग़ौर फ़रमानेवालीं साबित हुईं हैं। जापान को ज़रूरत है कि वह इतिहास से उचित सबक सीखें। अपने राज्यसंविधान का सम्मान करते हुए जपान शांतिमय और बचावात्मक नीति का पालन करें और उसके अनुसार फ़ैसलें करें। लेकिन यदि जापान अमरीका के क्षेपणास्त्र तैनात करने के संदर्भ में कदम उठाता है, तो चीन चुप नहीं बैठेगा और उसके परिणाम जापान को भुगतने पड़ेंगे,’ ऐसी तीख़ी चेतावनी चीन ने दी।

जापान के साथ ही पूर्वी एशिया के अन्य देशों को भी चीन ने धमकाया है। ‘जापान के साथ ही एशिया के अन्य देश भी क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के बारे में सोचेंगे ऐसी उम्मीद है। पूर्वी एशियाई देश, मीड़ियम रेंज क्षेपणास्त्र तैनाती को लेकर अमरीका द्वारा जारी कोशिशों को नकारकर, ज़िम्मेदारी के साथ कदम उठायें, ऐसा चीन को लगता है। ये देश अमरीका की भू-राजनीतिक साज़िश का शिक़ार ना हों’, ऐसा चीन के रक्षाविभाग के प्रवक्ता वु कियान ने जताया।

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पिछले साल के अगस्त महीने में अमरिका रशिया के साथ के ‘इंटरमिडिएट रेंज न्यूक्लिअर फोर्सेस ट्रिटी’ (आयएनएफ) से बाहर निकली थी। उसके बाद अमरीका ने फिर एक बार मीड़ियम रेंज क्षेपणास्त्र विकसित करने की शुरुआत की है। इन क्षेपणास्त्रों की पहुँच ५०० से ५,५०० किलोमीटर इतनी होने की बात कही जाती है।

पिछले कुछ महीनों में चीन ने साऊथ चायना सी समेत इंडो-पॅसिफिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरक़तें बढ़ायीं है। हाँगकाँग तथा तैवान के साथ पूरे साऊथ चायना सी तथा ईस्ट चायना सी पर कब्ज़ा करने की चीन की वर्चस्ववादी महत्त्वाकांक्षा इसके पीछे है। चीन की इस महत्त्वाकांक्षा पर लग़ाम कसने के लिए अमरीका ने पहल की होकर, इसमें वह जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया तथा आग्नेय एशियाई देशों की सहायता ले रही है।

जापान समेत एशियाई देशों में प्रगत क्षेपणास्त्र और अन्य रक्षातैनाती यह चीन को रोकने की नीति का ही भाग है। चीन को इसका एहसास हो जाने के कारण, वह पड़ोसी देशों को धमकाकर अमरीका के दाँवपेंचों को मात देने की कोशिश कर रहा है।

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