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चीन से विरोध यानी एकाधिकार और क्रूरता के खिलाफ़ आज़ादी का संघर्ष – अमरिकी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ की आक्रामक फटकार

वॉशिंग्टन – विश्‍व के कई देश, मौजूदा स्थिति में जारी संघर्ष में हमें यह बता रहे हैं कि अमरीका और चीन में से एक का चयन नहीं करना है। लेकिन वे ध्यान दें कि संघर्ष अमरीका बनाम चीन नहीं है। एक ओर एकाधिकार तंत्र, अमानुष क्रृरता और दूसरी ओर आज़ादी, ऐसा यह द्वंद्व है। इसके लिए अमरीका ने क्वाड, आसियान, नाटो जैसे संगठनों को मज़बूत करना शुरू किया है। इन संगठनों का हिस्सा बने देशों को, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से बनें राक्षसी खतरों का अहसास कराया गया है, ऐसें आक्रामक शब्दों में अमरीका के विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने चीन को लक्ष्य किया। इस दौरान उन्होंने, राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के खिलाफ़ किए आक्रामक निर्णयों की जानकारी साझा करके, मुहिम अभी खत्म नहीं हुई है, ऐसा सूचक बयान किया है।

एकाधिकार

अमरीका के साथ विश्‍वभर में लाखों लोगों के मृत्यु का कारण बनी कोरोना की महामारी के पीछे चीन ही सूत्रधार है, यह आरोप करके अमरीका ने चीन के विरोध में आक्रामक राजनीतिक संघर्ष शुरू किया है। इसी संघर्ष के तहत, अमरिकी जनता के साथ सहयोगी एवं मित्रदेशों को, चीन के षड़यंत्र की जानकारी से अवगत कराने के लिए प्रचार मुहिम रची गई थी। इसी के हिस्से के तौर पर ट्रम्प प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी अमरीका में आयोजित अलग अलग कार्यक्रमों में, चीन से संबंधित सख्त भूमिका रख रहे थे। बीते कुछ महीनों में अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन, जाँच यंत्रणा ‘एफबीआय’ के प्रमुख ख्रिस्तोफर रे एवं एटर्नी जनरल विल्यम बार ने अपने भाषणों से, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की कार्रवाईयों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। विदेशमंत्री पोम्पिओ इसमें आगे रहे और उन्होंने चीन के खिलाफ़ लगातार सख्त भूमिका अपनाने की बात दिखाई दी है।

जुलाई महीने में, पोम्पिओ ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का ज़िक्र ‘चीनी भस्मासुर’ ऐसा किया था। इसके बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की कार्रवाईयों का खतरा, शीतयुद्ध के दौर के रशियन युनियन से भी अधिक भयंकर है, यह चेतावनी भी अमरिकी विदेशमंत्री ने दी थी। विपक्षी नेता और विश्‍लेषकों ने, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही यह आलोचना यानी राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प की प्रचार मुहिम का हिस्सा होने का आरोप किया था। लेकिन, चुनाव के बाद भी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने चीन को लक्ष्य करके यह आरोप बेबुनियाद होने की बात दिखाई है। मंगलवार के दिन राजधानी वॉशिंग्टन में स्थित रोनाल्ड रिगन इन्स्टिट्युट में हुए एक कार्यक्रम में पोम्पिओ ने, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी फिलहाल विश्‍व में पहले स्थान का खतरा है, यह चेतावनी दी है।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का उद्देश्‍य, अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करके पूरे विश्‍वपर में प्रभाव बनाने का है। यही ट्रम्प प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती थी। आनेवाले दशकों में अमरीका को इन्हीं चुनौतियों का मुकाबला करना पड़ेगा, यह इशारा पोम्पिओ ने दिया। राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने आक्रामक निर्णय करके चीन के खिलाफ मुहिम शुरू की है और यह आगे भी कायम रहेगी, यह बयान विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने किया है। अमरीका अपने सहयोगी देशों की भी सहायता प्राप्त कर रही है और चीन को एकसाथ प्रत्युत्तर देने की आवश्‍यकता होने का आवाहन भी उन्होंने किया। इस दौरान उन्होंने, अमरीका के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष रोनाल्ड रिगन ने सोवियत युनियन के विरोध में आन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को एक साथ एकत्रित किया था, यह याद भी उन्होंने ताज़ा की। चीन को लेकर भी यही बात दोहराई जाएगी, यह दावा भी पोम्पिओ ने किया। सोवियत युनियन की तरह ही चीन की जनता भी उनकी हुकूमत का भविष्य तय करेगी, इस ओर अमरिकी विदेशमंत्री ने ग़ौर फ़रमाया।

इसी बीच, अमरीका ने चीन के खिलाफ़ शुरू किया राजनीतिक संघर्ष अधिक तीव्र होने के संकेत प्राप्त हो रहे हैं। दो दिन पहले ही अमरीका ने हाँगकाँग के मुद्दे पर चीन के चार अफ़सरों पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद अब तैवान के साथ व्यापारी चर्चा शुरू करने का ऐलान किया गया है। इसके लिए तैवान के शिष्टमंडल को अमरीका में आमंत्रित किया गया है। अमरीका की ओर से विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, यह जानकारी विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने साझा की है।

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