अज़रबैजान के हवाई अड्डे पर तुर्की के ‘एफ-१६’ की मौजूदगी – सैटेलाईट के फोटो आए सामने

बाकु/येरेवान/मॉस्को – तुर्की ने अपने प्रगत ‘एफ-१६ वायपर’ लड़ाकू विमान अज़रबैजान के हवाई अड्डे पर तैनात करने की जानकारी सैटेलाईट से प्राप्त फोटो से स्पष्ट हुई है। इस जानकारी की वजह से तुर्की अब आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध में बड़ी पैमाने पर सक्रिय होने के दावों की पुष्टी हो रही है। कुछ दिन पहले ही आर्मेनिया ने तुर्की के ‘एफ-१६’ विमान ने अपना विमान गिराने का आरोप किया था। लेकिन, उस समय तुर्की ने इन आरोपों से इन्कार किया था। परंतु, अब सैटेलाईट से प्राप्त हुए फोटो ने तुर्की का झूठ सामने लाया है। इसी बीच शुक्रवार के दिन रशिया की राजधानी मास्को में आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच चर्चा शुरू हुई है और इस दौरान दोनों देशों के साथ रशिया के विदेशमंत्री भी शामिल थे।

 'एफ-१६'

लगातार १३ दिनों से आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच जोरदार युद्ध हो रहा है और दोनों ओर बड़ा नुकसान होने की बात समझी जा रही है। आर्मेनिया ने युद्ध में हुई जीवित हानी के आँकड़े घोषित किए हैं लेकिन, अज़रबैजान ने आम नागरिकों के अलावा हुए लष्करी नुकसान की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। स्थानीय माध्यम एवं सूत्रों के दावों के अनुसार युद्ध में दोनों देशों में हज़ारों लोग मारे गए हैं। शुक्रवार के दिन अज़रबैजान ने नागोर्नो-कैराबख के कई गांवों पर कब्जा करने का दावा किया। वहीं, आर्मेनिया ने यह आरोप किया कि, अज़रबैजान की सेना हमारे प्रार्थना स्थलों को लक्ष्य कर रही है। शुशा शहर के एक पुराने प्रार्थना स्थल पर हुए हमले के फोटो भी आर्मेनिया ने जारी किए हैं।

 'एफ-१६'

इस पृष्ठभूमी पर तुर्की का आर्मेनिया-अज़रबैजान के युद्ध में सक्रिय हाथ सामने आया है। सैटेलाईट इमेजरी क्षेत्र की कंपनी प्लैनेट लैब्स एवं अमरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाईम्स ने इसकी जानकारी दी है। बीते सप्ताह में प्लैनेट लैब्स ने अज़रबैजान के कुछ सैटेलाईट फोटो प्रसिद्ध किए थे। इसका अध्ययन करके न्यूयॉर्क टाईम्स ने अज़रबैजान के हवाई अड्डे पर तुर्की के कम से कम दो ‘एफ-१६ वायपर’ लड़ाकू विमान तैनात होने की बात कही है। तुर्की और अज़रबैजान के बीच अगस्त में हुए युद्धाभ्यास के लिए तुर्की ने अपने यह लड़ाकू विमान तैनात किए थे।

 'एफ-१६'

लेकिन, यह युद्धाभ्यास खत्म होने के दो महीने बाद भी तुर्की के यह प्रगत लड़ाकू विमान अज़रबैजान में तैनात रहना ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इन लड़ाकू विमानों के साथ ही तुर्की का ‘सीएन-२३५’ लष्करी विमान भी अज़रबैजान में तैनात होने की बात समझी जा रही है। बीते महीने में आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध शुरू होने के साथ ही तुर्की ने खुलेआम अज़रबैजान के पक्ष में खड़े होकर बड़ी मात्रा में लष्करी सहायता प्रदान करना भी शुरू किया था। तुर्की के ड्रोन्स इस युद्ध में शामिल होने के फोटो भी प्रसिद्ध हुए थे। कुछ दिन पहले ही अज़रबैजान के राष्ट्राध्यक्ष ने तुर्की के ड्रोन्स प्रभावी साबित होने का बयान किया था। लेकिन, तुर्की के लड़ाकू विमान युद्धक्षेत्र के करीबी अड्डे पर तैनात होना काफी बड़ी गंभीर बात साबित हो सकती है, यह दावा विश्‍लेषक कर रहे हैं। तुर्की ने अज़रबैजान में पहले ही सीरियन आतंकी उतारने की बात सामने आयी है और इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी तुर्की को आड़े हाथों लिया है।

इसी बीच, शुक्रवार के दिन रशिया की राजधानी मास्को में आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच चर्चा शुरू हुई। रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन की पहले से जारी यह चर्चा आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध में हल निकालने की पहली कामयाब कोशिश समझी जा रही हैं। मास्को में जारी बैठक में रशिया के विदेशमंत्री सर्जेई लैवरोव के साथ दोनों देशों के विदेशमंत्री शामिल हुए हैं। यह चर्चा शुरू होने से पहले ही अज़रबैजान के राष्ट्राध्यक्ष ने नई चर्चा आर्मेनिया को दिया हुआ आखिरी अवसर होने का इशारा दिया है। तभी आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने यह दावा किया है कि, अन्य देशों ने नागोर्नो-कैराबख को मंजूरी देने पर इस समस्या का हल निकल सकता है।

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