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ईरान के चरमपंथियों ने की इस्रायल पर हमलें करने की माँग

तेहरान – परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीज़ादेह की हत्या होने से आगबबुला हुए ईरान में अब चरमपंथियों की प्रतिक्रिया प्राप्त हो रही है। इस हत्या का निषेध करने के लिए सड़कों पर उतरें ईरान के इन प्रदर्शनकारियों ने, अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प और अगले राष्ट्राध्यक्ष जो बायडेन के फोटो जलाकर अपना असंतोष व्यक्त किया। साथ ही ‘अमरीका पर हमलें करें’, ‘अमरीका को किसी भी तरह की सहूलियत ना दें’, ‘सुलेमानी और फखरीज़ादेह की हत्यारों को लष्करी प्रत्युत्तर दें’, ‘इस्रायल को सबक सिखाएँ’ ऐसी नारेबाज़ी इन प्रदर्शनकारियों ने की। ईरान के माध्यमों में भी फखरीज़ादेह की हत्या की गुँज सुनाई दे रही है और इस्रायल के ‘हैफा’ बंदरगाह पर हमला करने की माँग ईरानी अख़बार कर रहे हैं।

चरमपंथियों

शुक्रवार के दिन राजधानी तेहरान के करीबी गाँव में, अज्ञात हमलावरों ने परमाणु वैज्ञानिक फखरीज़ादेह की हत्या की थी। फखरीज़ादेह के हमलावर अभी गिरफ्त में नहीं आए हैं। लेकिन, ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम का हिस्सा रहें अहम वैज्ञानिक फखरीज़ादेह की हत्या करनेवाले एवं कुछ महीनें पहले नातांज़ परमाणु केंद्र में विस्फोट करवानेवाले एक ही हैं। इस्रायल ने ही यह सब कुछ करवाया है’ ऐसा आरोप ईरान के परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रवक्ता बेहरोज कमालवंदी ने किया है। ईरान के नेताओं ने भी यह आरोप किया है कि अमरीका के ट्रम्प प्रशासन के आदेश पर ही इस्रायल ने फखरीज़ादेह की हत्या की है।

फखरीज़ादेह की हत्या के बाद ईरान में तीखीं प्रतिक्रियाएँ सामने आ रहीं हैं और ईरान के ‘रिव्होल्युशनरी गार्डस्‌’ का हिस्सा बने ‘बसिज मिलिशिया’ के चरमपंथियों ने ईरान के अलग अलग शहरों में प्रदर्शन किए हैं। ईरान में हुकूमत से वफादार होनेवाली ईरानी जनता इन प्रदर्शनों में शामिल हो रही है और इस्रायल एवं अमरीका के ध्वज एवं अमरिकी नेताओं के फोटो भी जलाए जा रहे हैं। ईरान के राष्ट्राध्यक्ष हसन रोहानी के निवास स्थान के बाहर हुए प्रदर्शनों में चरमपंथियों ने ‘इसके आगे अमरीका के सामने झुकना नहीं। अमरीका को सहूलियत भी ना दें। अमरीका के खिलाफ सिर्फ युद्ध की शुरूआत करें’, ऐसी नारेबाज़ी की।

चरमपंथियों

‘ईरान का शांत रहना यानी अधिक लोगों की हत्या करने की अनुमति देने जैसा है’, ऐसे नारे लगाकर प्रदर्शनकारियों ने, अधिक आक्रामक भूमिका अपनाने की माँग रोहानी सरकार के सामने रखी। वहीं, ‘युनियन ऑफ इस्लामिक स्टुडंट सोसायटीज्‌’ नामक ईरान के प्रभावी संगठन ने रोहानी सरकार के सामने, लष्करी कार्रवाई करने का विकल्प रखा। मेजर जनरल कासेम सुलेमानी और फखरीज़ादेह के हत्यारों को लष्करी कार्रवाई से जवाब देना ही होगा, यह माँग इस संगठन ने रखी। जनवरी महीने में अमरीका ने इराक में ड्रोन हमला करके कासेम सुलेमानी को ढ़ेर किया था। इसके बाद ईरान से जोरदार प्रत्युत्तर की उम्मीद थी। लेकिन ईरान ने, युद्ध शुरू नहीं होगा, इस बात का ध्यान रखकर इसपर तीखीं प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

लेकिन, अब ईरान के ‘कायहान’ नामक समाचार पत्र ने, इस्रायल के व्यापारी ‘हैफा’ बंदरगाह पर ही हमला करने का सुझाव रखा है। ईरान की सेना, हैफा को नष्ट करनेवाला और बड़ी संख्या में जीवित नुकसान पहुँचानेवाला बड़ा हमला करें, ऐसी ज़हरीली माँग इस अख़बार ने रखी है। अबतक सीरिया में हुए इस्रायल के हमलों को ईरान ने आवश्‍यक प्रत्युत्तर नहीं दिया हैं। इसी वजह से इस्रायल ने यह दु:साहस किया। लेकिन, अब ईरान हैफा पर हमला करें। ईरान के इस हमले को इस्रायल या अमरीका से किसी भी तरह का विरोध नही होगा। क्योंकि, इन दोनों देशों के पास ईरान के विरोध में युद्ध करने की सिद्धता ही नहीं है, यह दावा इस अख़बार ने किया है।

इस्रायल का हैफा शहर, पहले से ही ईरान और लेबनान में स्थित ईरान से जुड़ी हिज़बुल्लाह के निशाने पर है। हैफा शहर में मौजूद अमोनियम नायट्रेट के गोदामों पर मिसाइल हमलें करके, बड़ी तबाही मचाने की धमकी हिज़बुल्लाह का प्रमुख हसन नसरल्ला ने कुछ महीने पहले ही दी थी।

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