जिनपिंग चीन को दुनिया की पहले नंबर की सत्ता बनाना चाहते हैं – विदेशमंत्री माईक पॉम्पिओ का आरोप

वॉशिंग्टन – ‘चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी होनेवाले शी जिनपिंग ने अपने ईरादे खुले किये हैं। वे चीन पर संपूर्ण नियंत्रण चाहते हैं और उसी समय चीन को दुनिया की पहले नंबर की सत्ता बनाना चाहते हैं। वे अपनी इस योजना पर तेज़ी से काम कर रहे हैं। पीपल्स लिबरेशन आर्मी का सामर्थ्य बढ़ाना और आन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं का चीन की फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करना, यह उसीका भाग है’, ऐसा तीख़ा आरोप अमरीका के विदेशमंत्री माईक पॉम्पिओ ने किया।

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अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल में चीन के विरोध में लगातार आक्रामक भूमिका अपनाई है। तीन साल पहले चीन के खिलाफ़ व्यापारयुद्ध छेड़नेवाले राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने कोरोना की पृष्ठभूमि पर राजनीतिक संघर्ष अधिक तीव्र किया। उसके तहत, अमरीका के वरिष्ठ मंत्री तथा अधिकारी चीन की सत्ताधारी हुक़ूमत के असली चेहरे का तथा क़ारनामों का एहसास करा देने की कोशिश कर रहे हैं। विदेशमंत्री पॉम्पिओ इसमें अग्रसर होकर, उनका नया बयान भी चीन के विरोध में जारी राजनीतिक मुहिम का ही भाग दिखायी देता है।

पॉम्पिओ ने ‘जॉर्जिया इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी’ में किये भाषण में, चीन कभी भी अमरीका का संशोधन तथा तंत्रज्ञान की बराबरी नहीं कर सकेगा, ऐसा ताना मारा। ‘चीन ने की औद्योगिक प्रगति की नींव, अन्य देशों से चुराये तंत्रज्ञान पर आधारित है। कुछ प्रसंगों में आर्थिक बल का इस्तेमाल कर अन्य देशों से तंत्रज्ञान की खरीद की गयी है। चीन के पास उनके देश में विकसित हुआ तंत्रज्ञान नहीं है। अमरीका में पढ़ाई करने आये चिनी संशोधकों पर, स्वदेश लौटकर समाजवादी हुक़ूमत की सेवा करने का बंधन डाला गया है’, ऐसा दोषारोपण अमरिकी विदेशमंत्री ने रखा।

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चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत द्वारा, केवल चिनी नागरिक तथा छात्रों पर ही नहीं, बल्कि अमरिकी छात्रों पर भी नियंत्रण रखने की कोशिशें जारी होने का दावा भी पॉम्पिओ ने किया। चीन द्वारा अमरिकी विश्वविद्यालयों में स्थापित की गईं ‘कन्फ्युशियस इन्स्टिट्यूट’ उसीका उदाहरण है, इसपर उन्होंने ग़ौर फ़रमाया। जिनपिंग केवल चिनी नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि अमरीका के हर एक जन पर भी नज़र रखे हैं, ऐसा विदेशमंत्री पॉम्पिओ ने जताया। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं पर गौर करें, तो जिनपिंग अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए क्या और किस प्रकार गतिविधियाँ कर रहे हैं यह ध्यान में आ जायेगा, ऐसा भी पॉम्पिओ ने कहा।

अमरिकी जनता यदि चीन के बारे में उचित जानकारी ना लें और चीन के क़ारनामों के बारे में सजगता ना दिखायें, तो आनेवाले समय में यह चित्र दिखेगा कि चीन की हुक़ूमत हमें दिखा रही है, ऐसी चेतावनी भी अमरिकी विदेशमंत्री ने दी। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी, आर्थिक बल तथा तंत्रज्ञान के ज़ोर पर, दुनिया ने कभी भी न देखी हुई ऐसी एकाधिकारशाही और दमनतंत्र की हुक़ूमत चला रही है, ऐसा आरोप भी पॉम्पिओ ने किया।

पिछले ही महीने विदेशमंत्री पॉम्पिओ ने, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी यही दुनिया में पहले नंबर का ख़तरा है, ऐसा जताया था। उसी समय, आनेवाले दशकों में अमरीका को चीन की चुनौती का मुक़ाबला करना पड़ेगा, इसका एहसास भी उन्होंने करा दिया था।

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