लाखों की मौत का कारण बने सीरिया के गृहयुद्ध के दस वर्ष पूर्ण

दमास्कस – सीरिया में जारी गृहयुद्ध के दस वर्ष पूर्ण हुए है। इस वर्ष के फ़रवरी तक सीरिया में जारी गृहयुद्ध में तकरीबन १.१७ लाख से अधिक लोगों के मारे जाने की बात दर्ज़ हुई है। लेकिन, असल में सीरिया की हिंसा में अब तक १.८७ लाख से अधिक की मौत हुई है। मुमकिन है, इस गृहयुद्ध में जान से जानेवालों की संख्या छह लाख के करीब पहुँच सकती है, ऐसी चिंता सीरिया के मानव अधिकार संगठनों ने व्यक्त की है। इस घनघोर संघर्ष की वजह से जान बचाने के लिए पड़ोसी देशों में शरण लेने पहुँचे विस्थापितों की संख्या ५५ लाख से अधिक है। इसके अलावा अपना घर छोड़कर सीरिया में ही सुरक्षित स्थान पर पनाह लेनेवालों की संख्या ७६ लाख है।

वर्ष २०१० में ट्युनिशिया में तानाशाही हुकूमत के विरोध में ‘जस्मिन रिवोल्युशन’ हुआ था। इस प्रदर्शन ने ट्युनिशिया के बाद कुछ ही महीनों में इजिप्ट, लीबिया में भी तानाशाही का तख्ता पलट किया गया था। १५ मार्च, २०११ के दिन सीरिया में बशर अल-अस्साद हुकूमत के खिलाफ भी प्रदर्शन शुरू हुए थे। इजिप्ट में होस्नी मुबारक, लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी की तरह सीरिया में अस्साद की हुकूमत का भी तख्ता पलट किया जाएगा, ऐसे दावे किए जा रहे थे। लेकिन, बीते दस वर्षों से अस्साद हुकूमत के खिलाफ शुरू गृहयुद्ध अभी भी जारी हैं।

इस गृहयुद्ध में अस्साद हुकूमत के खिलाफ अमरीका और अरब देशों का समर्थन प्राप्त होनेवाले ‘सीरियन डेमोक्रैटिक फ्रंट’ (एसडीएफ) एवं कुर्द विद्रोहियों के ‘वायपीजी’ संघर्ष कर रहे हैं। इसी के साथ तुर्की के समर्थन में ‘सीरियन नैशनल आर्मी’ (एसएनए) गुट भी इसमें शामिल हैं। अस्साद हुकूमत के समर्थन में ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड्स, कुदस्‌ फोर्सेस जैसे लष्करी दलों के साथ हिज़बुल्लाह, कतैब हिज़बुल्लाह और अन्य आतंकी संगठन भी इस संघर्ष में उतरे हैं। सीरिया में लष्करी अड्डा बनानेवाली रशिया ने वर्ष २०१५ में इस गृहयुद्ध में प्रवेश किया था।

सीरिया में शुरू गृहयुद्ध का लाभ उठाकर शुरू में अल कायदा और इसके बाद वर्ष २०१३ में आतंकी संगठन ‘आयएस’ ने सीरिया में बड़ी मात्रा में नरसंहार किया। ‘आयएस’ ने शुरू किए नरसंहार के कारण सीरिया से लाखों लोग तुर्की, लेबनान, जॉर्डन, इराक और इजिप्ट में स्थापित शरणार्थी शिविरों में पहुँचे हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्रसंघ ने सीरिया में ही स्थापित किए शिविरों में रहनेवालों की संख्या ७६ लाख से अधिक होने का दावा किया जा रहा है। इनमें दो तिहाई संख्या महिलाएं और बच्चों के होने की चिंता मानव अधिकार संगठन व्यक्त कर रही है।

फिलहाल सीरिया का ६३ प्रतिशत क्षेत्र अस्साद हुकूमत के कब्ज़े में है। इसमें मध्य और दक्षिण सीरिया का समावेश है। अमरीका का समर्थन प्राप्त करनेवाले ‘एसडीएफ’ के कब्जे में २५ प्रतिशत क्षेत्र है। तुर्की ने सीरिया की उत्तरी सरहदी क्षेत्र पर अपनी पकड़ जमाई है।

बीते दस वर्षों से जारी गृहयुद्ध के कारण अस्साद हुकूमत के समर्थन में लड़ रहे गिरोहोंवाले नेता अब अधिक ताकतवर होने की आलोचना हो रही है। इसके साथ ही सीरिया के र्इंधन भंड़ारों पर कुर्द बागी एवं तुर्की से जुड़े आतंकी संगठनों ने कब्जा किया है। तुर्की से जुड़ी संगठन र्इंधन की तस्करी कर रही है और रशिया एवं सीरिया के विमान वहां पर हवाई हमले कर रहे हैं। इस वजह से सीरिया की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से टूट चुकी है और करीबन ७५ प्रतिशत जनता दरिद्रता की रेखा से नीचे होने की जानकारी दो वर्ष पहले किए गए निरीक्षण से सामने आयी थी।

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