इस्रायल-हमास संघर्ष का इस्तेमाल करके ईरान ने अमरीका को मूर्ख बनाया – अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री की आलोचना

अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री

दोहा/तेहरान/वॉशिंग्टन – ‘इस्रायल के साथ संघर्ष के लिए हमास को हथियार और आर्थिक सहायता प्रदान करने पर हम ईरान के आभारी हैं’, ऐसा बयान हमास के प्रमुख इस्माईल हनिया ने किया है। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयातुल्ला खामेनी ने भी गाज़ा के पैलेस्टिनियों को लष्करी और आर्थिक सहायता प्रधान करने के लिए विश्‍वभर के इस्लामी देशों से निवेदन किया। इसी बीच वियना में बातचीत करने की नौटंकी करके ईरान ने हमास के ज़रिये इस्रायल पर रॉकेट हमले किए। ईरान की इस साज़िश में बायडेन प्रशासन मूर्ख बना होने की तीखी आलोचना अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने की है।

‘११ दिन के संघर्ष के बाद हमास ने इस्रायल पर हावी होनेवाली जीत हासिल की। इस वजह से अरब देशों के साथ सहयोग स्थापित करने की इस्रायल की योजना तहस-नहस हुई। इस संघर्ष को अरब-खाड़ी देशों के साथ ही पश्‍चिमी देशों से प्राप्त हुआ समर्थन भी हमने देखा। यह इस्रायल पर हुई अपनी सबसे बड़ी जीत है और इसका इस्रायल पर गहरा असर पड़ेगा’, यह दावा हमास के प्रमुख हनिया ने किया।

अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री

कतार में बीते कई वर्षों से पनाह लेनेवाले हमास के प्रमुख ने युद्धविराम के लिए मध्यस्थता करनेवाले इजिप्ट के राष्ट्राध्यक्ष अब्देल फतार अल-सिरी के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही अल-अक्सा प्रार्थनास्थान स्वतंत्र होने तक इस्रायल के विरोध में यह संघर्ष जारी रहेगा, यह धमकी भी हमास के प्रमुख ने दी। इसके साथ ही हनिया ने इस्रायल विरोधी संघर्ष के लिए हमास को रॉकेट की आपूर्ति करने पर ईरान के प्रति खुलेआम आभार व्यक्त किया।

ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरू और देश की सियासी व्यवस्था पर पकड़ रखनेवाले आयातुल्ला खामेनी ने शुक्रवार की सभा के दौरान हमास ने इस्रायल पर हासिल की हुई जीत का स्वागत किया। ‘विश्‍वभर के इस्लामी देश प्रामाणिकता से पैलेस्टिनी जनता के समर्थन में लष्करी और आर्थिक सहायता प्रदान करें या गाज़ा के पुनर्निर्माण में सहायता करें। इसके अलावा इस्लामी जनता अपने देश की सरकार के सामने पैलेस्टिनियों का समर्थन करने की जोरदार माँग रखे, ऐसा निवेदन खामेनी ने किया।

अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री

हमास के इस्रायल पर हमले ईरान की रणनीति का एक हिस्सा था, यह आरोप अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने लगाया है। येमन के हौथी विद्रोही और गाज़ा की हमास को ईरान द्वारा हथियार और आर्थिक सहायता प्रदान हो रही है। इसी वजह से परमाणु समझौते पर ईरान के साथ बातचीत करनी हो तो हौथी विद्रोही और हमास को आतंकी घोषित करके उनके खिलाफ कार्रवाई करना मुमकिन नहीं होगा। क्योंकि, ऐसा करने पर ईरान नाराज़ हो सकता है, बायडेन प्रशासन इस सोच में था। ईरान ने इसका पूरा लाभ उठाया है। ईरान के साथ बातचीत करनी हो तो हमास के खिलाफ सख्त भूमिका अपनाना संभव नहीं होगा, यह अहसास बायडेन प्रशासन को था और इसका लाभ उठाकर ईरान ने बायडेन प्रशासन को मूर्ख बनाया, ऐसी तीखी आलोचना अमरीका के पूर्व विदेशमंत्री माईक पोम्पिओ ने की है।

ईरान की खुशामत करके खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और शांति स्थापित करना मुमकिन होगा, इस भ्रम में बायडेन प्रशासन है। लेकिन, ईरान इस्रायल को ‘छोटा शैतान’ समझता है और अमरीका की ओर ‘बड़े शैतान’ के तौर पर देखता है, इस बात की याद भी पूर्व विदेशमंत्री एवं ‘सीआयए’ के पूर्व प्रमुख माईक पोम्पिओ ने ताज़ा की। ईरान की खुशामत करने की बायडेन प्रशासन की कोशिशों की वजह से ही इस्रायल और गाज़ा का संघर्ष करवाया, ऐसा आरोप पोम्पिओ ने लगाया है। इससे पहले अमरीका के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने भी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष बायडेन की कमज़ोरी की वजह से ही हमास ने इस्रायल पर हमला करने का साहस किया, ऐसी फटकार लगाई थी। हमारे राष्ट्राध्यक्ष होते हुए इस्रायल पर हमला करने पर अमरीका कार्रवाई करेगी, यह चिंता हमास को सता रही थी। इसी कारण उस दौर में हमास ने इस्रायल पर हमले नही किए थे, इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प ने ध्यान आकर्षित किया था।

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