अफ़गानिस्तान के कब्रिस्तान में चीन भी दफन हो जाएगा

अमरीका के वरिष्ठ विश्‍लेषक गॉर्डन चैंग

वॉशिंग्टन – तालिबान चीन की ओर अफ़गानिस्तान के मित्र के तौर पर देख रहा है और वहां पर निवेश करने के लिए चीन जल्द से जल्द पहुँचे, ऐसा आवाहन तालिबान के प्रवक्ता सुहेल शहिन ने किया है। चीन के निवेशकों को और कर्मचारियों को तालिबान सुरक्षा प्रदान करेगी, यह वादा भी तालिबान के प्रवक्ता ने किया है। लेकिन, ‘चीन का साम्राज्य भी अफ़गानिस्तान के कब्रिस्तान में यकीनन नाकाम साबित होगा। वहां के रेत में चीन फंस जाएगा और इसे देखना बड़ा मजेदार होगा’, ऐसा बयान अमरीका के ज्येष्ठ विश्‍लेषक गॉर्डन चैंग ने किया है।

अफ़गानिस्तान के कब्रिस्तान

अफ़गानिस्तान से सेना की वापसी करने का अमरीका का काम 31 अगस्त तक पूरा होगा, यह ऐलान राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने किया है। अमरीका की इस वापसी का लाभ उठाकर चीन अफ़गानिस्तान में प्रवेश करेगा, यह दावा किया जा रहा है। इससे पहले अफ़गानिस्तान में नाकाम हुई सोवियत रशिया और अमरीका की तरह चीन अफ़गानिस्तान के जाल में नहीं फंसेगा यह दावा चीन के सरकारी मुखपत्र और इस देश के विश्‍लेषक ने किया था। इसके लिए पाकिस्तान जैसा सहयोगी देश चीन के साथ होने की बात चीनी विश्‍लेषकों ने ड़टकर कही थी।

चीन के नेता भी पाकिस्तान पर भरोसा करने की खबरें प्राप्त होने लगी हैं। अमरीका की वापसी के बाद अफ़गानिस्तान में स्थिरता स्थापित करने के लिए पाकिस्तान सहयोग करे, ऐसा आवाहन चीन ने किया है। चीन के विदेशमंत्री वैंग यी ने पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान समेत त्रिपक्षीय सहयोग स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया। अफ़गानिस्तान के मुद्दे पर चीन की सामने आ रही महत्वाकांक्षी गतिविधियों पर अमरीका के ज्येष्ठ विश्‍लेषक गॉर्डन चैंग ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज़ की।

‘अमरीका की वापसी के बाद अफ़गानिस्तान में पैर जमाने का अवसर चीन जैसे चालाक देश को प्राप्त हो रहा है। लेकिन, यह अवसर भले ही अच्छा दिखाई दे रहा हो, फिर भी चीन अफ़गानिस्तान में कामयाब होगा, इसे मानना मुमकिन नहीं है’, यह दावा चैंग ने किया। अफ़गानिस्तान में मौजूद सोना, युरेनियम, लिथियम और अन्य खनिज संपत्ति पर चीन की नज़र है। इसे प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान में 62 अरब डॉलर्स निवेश करके ‘सीपीईसी’ प्रकल्प पेशावर-काबुल तक बढ़ाने की दिशा में चीन की कोशिश हो रही है। यह प्रकल्प अफ़गानिस्तान में पहुँचाने में चीन को कामयाबी प्राप्त होगी। लेकिन, इसके बाद होनेवाला नुकसान चीन की उम्मीद से कई गुना बड़ा होगा, यह इशारा चैंग ने दिया।

अफ़गानिस्तान के कब्रिस्तान

अफ़गानिस्तान में अपने हित सुरक्षित करने के लिए चीन के अधिकारी बीते कुछ वर्षों से गुप्त पद्धति से हक्कानी नेटवर्क के साथ सहयोग कर रहे हैं। इस हक्कानी नेटवर्क के सहयोग से अफ़गानिस्तान में स्थित चीन विरोधी उइगर और तुर्कवंशी अल्पसंख्यांकों को कैद किया। उइगर और तुर्क अल्पसंख्यांकों पर हुई इस कार्रवाई को तालिबान अनदेखा करे, चीन यह चाहता है पर वैसा नहीं होगा, यह बयान भी चैंग ने किया। चीन कितना भी धूर्त हो फिर भी तालिबान चीन से कई गुना अधिक चालाक है, इस बात का अहसास चैंग ने कराया।

इसके साथ ही वर्ष 1996 में तालिबान का गठन होने से अमरीका पर हुए 9/11 के हमले के बाद भी तालिबान से पूरा सहयोग किया। बीते कई वर्षों से जारी इस सहयोग का चीन को कुछ हद तक लाभ होगा। लेकिन, अफ़गानिस्तान में कामयाब होने के लिए तालिबान एकमात्र चुनौती नहीं है। इस देश में हथियारबंद समर्थक और विरोधियों में लगातार हो रही हिंसा, ऐसी कई चुनौतियाँ चीन के सामने होंगी, इस बात की याद भी चैंग ने ताज़ा की।

अफ़गानिस्तान के कब्रिस्तान में चीन को तबाह करने के लिए भारत अपने हस्तकों का इस्तेमाल करेगा। क्योंकि, चीन और हक्कानी नेटवर्क के सहयोग का पर्दाफाश भारतीय गुप्तचर यंत्रणाओं ने ही किया था, इस ओर चैंग ने ध्यान आकर्षित किया। बीते वर्ष भारत के लद्दाख के ‘एलएसी’ के करीब चीन ने की हुई हरकत की पृष्ठभूमि पर भारत अब अफ़गानिस्तान में चीन को परेशान कर सकता है, ऐसा अनुमान चैंग ने दर्ज़ किया है।

हमारे हाथों में काफी पैसें हैं और इस वजह से हम काफी कुछ कर सकते हैं, इस सोच में यदि चीन रहा तो अफ़गानिस्तान के कब्रिस्तान में चीन को दफनाया जाएगा और हम यह देखना चाहेंगे’, यह बयान चैंग ने किया है।

English    मराठी

इस समाचार के प्रति अपने विचार एवं अभिप्राय व्यक्त करने के लिए नीचे क्लिक करें:

https://twitter.com/WW3Info
https://www.facebook.com/WW3Info