चीन-पाकिस्तान के नए परमाणु समझौते से विश्‍वभर में परमाणु स्पर्धा एवं संघर्ष भड़केगा

अंतरराष्ट्रीय विश्‍लेषक का इशारा

new nuclear deal, विश्‍वभर में

जेरूसलम – ‘चीन ने पाकिस्तान के साथ नया परमाणु समझौता किया है। परमाणु सामान एवं तकनीक की तस्करी करने के पाकिस्तान के इतिहास पर गौर करें तो चीन का यह समझौता सबसे खतरनाक साबित होता है। इससे विश्‍वभर में फिर से परमाणु हथियारों की स्पर्धा और संघर्ष भड़क उठेगा’, ऐसा इशारा नामांकित अमरिकी विश्‍लेषक फैबियन बॉसार्ट ने दिया है। भारत के लष्करी सामर्थ्य का मुकाबला करने के लिए चीन ने पाकिस्तान की एटमी ताकत बढ़ाने का रणनीतिक निर्णय किया है, यह दावा बॉसार्ट ने किया।

‘पाकिस्तान एटोमिक एनर्जी कमिशन’ (पीएईसी) और ‘चायना झोंग्युआन इंजिनिअरिंग कॉर्पोरेशन’ के बीच ८ सितंबर के दिन यह समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार पाकिस्तान को चीन परमाणु तकनीक, यूरेनियम का खनन और उस पर आवश्‍यक प्रक्रिया एवं परमाणु र्इंधन प्रदान करेगा। पाकिस्तान के कराची और मुज़फ्फरगड़ शहरों में चीन चार परमाणु प्रकल्पों का निर्माण करेगा। इसके अलावा पाकिस्तान के अन्य परमाणु प्रकल्पों के रखरखाव का ज़िम्मा भी चीन का रहेगा। चीन ने पाकिस्तान के साथ किए इस परमाणु समझौते पर विश्‍लेषक फैबियन बॉसार्ट ने इस्रायली अखबार से बातचीत के दौरान चिंता जताई।

‘सेंटर ऑफ पॉलिटिकल ऐण्ड फॉरेन अफेअर्स’ नामक नामांकित अध्ययन मंड़ल के संस्थापक एवं विश्‍लेषक बॉसार्ट ने चीन और पाकिस्तान का यह परमाणु समझौता विश्‍व के लिए खतरा होने का इशारा दिया है। इसके लिए परमाणु तकनीक की तस्करी में पाकिस्तान के समावेश का ज़िक्र भी बॉसार्ट ने किया। चीन से प्राप्त होनेवाली परमाणु तकनीक, सामान एवं संबंधित सामान की पाकिस्तान तस्करी कर सकता है, यह बयान भी बॉसार्ट ने किया है। अमरिकी विश्‍लेषकों ने स्पष्ट ज़िक्र किया ना हो, फिर भी पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जानेवाले डॉ.अब्दुल कादीर खान ने ईरान, उत्तर कोरिया, लीबिया और अन्य देशों को तस्करी के जरिए परमाणु तकनीक एवम एटमी सामान प्रदान किया था। खान ने इस तस्करी की कबूली भी दी थी। पाकिस्तान के इस काले इतिहास की ओर बॉसार्ट ने ध्यान आकर्षित किया।

एक वर्ष पहले गलवान घाटी में हुए संघर्ष ने चीन को भारत के सामर्थ्य का पूरा अहसास कराया है। इसी कारण पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाकर चीन अब भारत पर लष्करी दबाव बढ़ाने की चाल चल रहा है, यह दावा बॉसार्ट ने किया। ऐसी स्थिति में, पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की संख्या में बढ़ोतरी हुई तो इससे केवल इसी क्षेत्र में ही नहीं बल्कि, विश्‍वभर में परमाणु हथियारों की स्पर्धा शुरू होगी और इससे संघर्ष भड़क उठेगा, ऐसा इशारा बॉसार्ट ने दिया है।

चीन और पाकिस्तान का परमाणु सहयोग अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करता है, यह आरोप अमरीका ने पहले भी लगाया था। दोनों देश परमाणु प्रसार बंदी कानून का उल्लंघन करके यह सहयोग कर रहे हैं, यह बात पहले भी सामने आयी थी। लेकिन, इस पर जताई जा रही आपत्ति और लगाए जा रहे आरोपों को पाकिस्तान और चीन ने नजरअंदाज किया था। इस परमाणु सहयोग के ज़रिये भारत के लिए खतरे बढ़ाने की नीति पाकिस्तान और चीन ने अपनाई है।

पाकिस्तान की परमाणु नीति भारत केंद्रीत होने की बात इस देश ने कई बार स्पष्ट की थी। साथ ही भारत ने हम पर हमला किया तो पाकिस्तान परमाणु हमलों से प्रत्युत्तर देगा, ऐसी धमकियाँ पाकिस्तान ने कई बार दीं थी। ऐसे देश के साथ चीन का परमाणु सहयोग करना यानी भारत को लक्ष्य करने की चीन की नीति का हिस्सा साबित होता है। फैबियन बॉसार्ट यह आरोप नए से रेखांकित कर रहे हैं। लेकिन, अफ़गानिस्तान में तालिबान ने सत्ता हथियाने की वजह से पाकिस्तान में आतंकवादी और चरमपंथीयों की ताकत काफी बढ़ी है। तेहरिक-ए-तालिबान के आतंकी तो पाकिस्तान की सत्ता हथियाने के बयान करने लगे हैं। ऐसी स्थिति में अस्थिर हुए पाकिस्तान की परमाणु क्षमता बढ़ी तो इससे पूरे विश्‍व के लिए खतरा निर्माण हो सकता है, यह बॉसार्ट का इशारा काफी संवेदनशील मुद्दा साबित होता है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय माध्यमों ने बॉसार्ट के इस इशारे पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया है।

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