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अफगानिस्तान में शुरू युद्ध की बाजी पलटी; अमरिका और अफगानिस्तान ने किए हमलों में १२० तालिबानी ढेर

काबुल/मास्को – अमरिका और अफगानिस्तान ने किए हवाई हमलों में १२० तालिबानी आतंकी मारे गए है| इनमें तालिबान का कमांडर मौलवी नुरुद्दीन का भी समावेश है| लेकिन, तालिबान ने नुरुद्दीन के मारे जाने की खबर ठुकराई है| लेकिन, अमरिका ने बातचीत रद्द करके तालिबान के विरोध में शुरू किए तेज हमलों का असर स्पष्ट तौर पर दिखाई देने लगा है| तालिबान का शिष्टमंडल बातचीत करने के लिए रशिया पहुंचा है| इसी बीच अमरिका के साथ नए से बातचीत शुरू करने के लिए हम उत्सुक होने के संकेत भी तालिबान दे रही है| इसी लिए रविवार के दिन तालिबान ने ‘रेड क्रॉस’ के विरोध में लगाई पाबंदी हटाने का ऐलान भी किया|

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हमलें करके तालिबान ने बडी गलती की है और इसके गंभीर परिणाम तालिबान को भुगतने होंगे, यह इशारा अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने और एक बार दिया है| बातचीत रद्द करके अमरिकाने खुद का ही नुकसान किया है, यह दावे कर रहे तालिबान को अब सच्चाई का एहसास होने लगा है| अबतक हुई नही थी, इतनी कडी कार्रवाई तालिबान के विरोध में हो रही है, ऐसा अमरिका के राष्ट्राध्यक्ष ने कहा है| साथ ही अफगानिस्तान की सरकार ने तालिबान को लेकर अपनी भाषा भी कठोर की है| अफगानिस्तान के उत्तरी और पश्‍चिमी हिस्से में तालिबानी आतंकियों पर अमरिका और अफगानिस्तान ने संयुक्त हवाई हमलें किए| इन हमलों में १२० आतंकियों को मारा गया है|

इन आतंकियों में तालिबान ने समानगान प्रांत का गव्हर्नर घोषित किए मौलवी नुरुद्दीन का भी समावेश होने की बात कही जा रही है| लेकिन तालिबान ने नुरुद्दीन संबंधी दी जा रही जानकारी झुठी होने का दावा किया है| फिर भी पिछले कुछ दिनों में अफगानिस्तान और अमरिका ने शुरू की हुई लष्करी कार्रवाई में तालिबान का बडा नुकसान होने की बात स्पष्ट हो रही है और इसका तालिबान पर काफी बडा दबाव बनने के संकेत भी सामने आ रहे है| इस पृष्ठभूमि पर रविवार के दिन तालिबान ने ‘रेड क्रॉस’ संगठन पर लगाई पाबंदी हटाई| इसके जरिए तालिबान अब अमरिका के साथ ही पुरी दुनिया को हम मानवतावादी कार्य के विरोध में नही है, यही संदेश देने की कोशिश कर रही है|

तालिबान का शिष्टमंडल रशिया पहुंचा है और रशिया के अफगानिस्तानसंबंधी नियुक्त दूत काबुलोव्ह ने तालिबान के शिष्टमंडल का स्वागत किया है| इसी बीच अमरिका और तालिबान की बातचीत फिर से शुरू हो, यह रशिया की भूमिका है, ऐसा काबुलोव्ह ने कहा है| तालिबान ने भी अमरिका के साथ बातचीत करने के लिए तैयार होने के संकेत दिए है|

अफगान सरकार के साथ बातचीत करनी है तो तालिबान को नए अफगानिस्तान ने रखी मर्यादा का सम्मान करना होगा, ऐसा अफगानिस्तान के राजनयकि अधिकारी ने स्पष्ट किया है| हमारे लिए ‘पिपल्स रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान’ यह देश का नाम, महिलाओं का नागरी एवं राजकीय अधिकार और राजकीय प्रक्रिया में जनता का योगदान, यह बातें काफी अहमियत रखती है| इसका सम्मान किए बिना अब अफगानिस्तान की सरकार भी तालिबान के साथ बातचीत नही करेगी, यह बात इस अफगान अधिकारी ने स्पष्ट की है|

इससे पहले तालिबान ने अफगानिस्तान की सरकार से बातचीत नही करेंगे, यह डटकर कहा था?और सीर्फ अमरिका से ही बातचीत होगी, यह अडियलपना दिखाया था| लेकिन, अमरिका ने तालिबान के साथ बातचीत रद्द करने पर अब अफगानिस्तान में बाजी पलट चुकी है| अफगान सरकार की बदली भाषा से भी यही संकेत स्पष्ट तौर पर प्राप्त हो रहे है|

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