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स्कॉटलैंड को सहमति के बिना ‘युनायटेड किंगडम’ में रखना मुमकिन नही होगा – स्कॉटलैंड की ‘फर्स्ट मिनिस्टर’ निकोला स्टर्जन का बयान

लंदन – ‘‘युनायटेड किंगडम’ को आगे से एक संघराज्य के तौर पर आगे बढना है तो सभी देशों की सहमति प्राप्त करनी ही होगी| स्कॉटलैंड के सार्वमत के अधिकार से इन्कार करना यानी स्कॉटलैंड की आजादी के मुद्दे का हल निकला है, इस समझ में ‘यूके’ की सरकार है तो वह पुरी तरह से गलत है| यह जनतंत्र में बुनियादी मुद्दा है, आप स्कॉटलैंड को सहमति के बिना उसकी इच्छा के विरोध में संघराज्य में कैद नही रख सकते’, इन शब्दों में स्कॉटलैंड की ‘फर्स्ट मिनिस्टर’ निकोला स्टर्जन ने अंतिम चेतावनी जारी की है|

पिछले हफ्ते में ब्रिटेन में हुए चुनाव में प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन के नेतृत्व में ‘कन्झर्व्हेटिव्ह पार्टी’ ने ३६५ जगहों पर जीत हासिल करके बहुमत प्राप्त किया था| साथ ही स्कॉटलैंड में सरकार बनानेवाली ‘स्कॉटिश नैशनल पार्टी’ को इस प्रांत की ५९ में से ४८ जगहों पर जीत प्राप्त हुई थी| साथ ही ‘कन्झर्व्हेटिव्ह पार्टी’ को मात्र छह जगहों पर हासिल हुई जीत से संतोष करना पडा था| स्कॉटलैंड में कुल ४५ प्रतिशत से भी अधिक मत प्राप्त होना, यह उम्मीद के बाहर और निर्णायक जीत होने की प्रतिक्रिया ‘स्कॉटिश नैशनल पार्टी’ ने दर्ज की है|

स्कॉटलैंड की जनता ने ‘स्कॉटिश नैशनल पार्टी’ को बडी जीत दिलाने के साथ ही प्रधानमंत्री जॉन्सन का नेतृत्व ठुकराया है, यह दावा भी ‘फर्स्ट मिनिस्टर’ निकोला स्टर्जन ने किया है| चुनावी नतिजों के बाद ब्रिटीश माध्यमों को दिए मुलाकात से स्टर्जन इस स्थिति का लगातार जिक्र कर रही है और स्कॉटलैंड को फिर से सार्वमत कराने का अवसर देने की जरूरत है, यह भूमिका भी वह बडे आग्रह के साथ रख रही है|

‘स्कॉटलैंड को आजादी मिलें, इस मुद्दे ने फिर एक बार जोर पकडना शुरू किया है और इसका समर्थन करनेवालों के पक्ष में भी स्कॉटिश जनता खडी हुई है| जनता का यह समर्थन सीर्फ आजादी के लिए नही है, बल्कि स्कॉटलैंड का भविष्य स्कॉटलैंड ही तय करें, इसके लिए भी है’, इन शब्दों में ‘फर्स्ट मिनिस्टर’ निकोला स्टर्जन ने स्कॉटलैंड के आजादी की मांग आगे रखी है| प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन संघराज्य (युनायटेड किंगडम) बरकरार रहेगा, इस मुद्दे पर कायम रहते है तो उन्हें ने इस मुद्दे पर निर्णय करने का अवसर जनता को प्रदान करना होगा, यह कहकर स्टर्जन ने सार्वमत की मांग भी जमकर आगे रखी|

प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने स्टर्जन की मांग का विरोध किया है और फोन पर हुई बातचीत के दौरान उन्होंनें स्कॉटलैंड की आजादी और सार्वमत संबंधी भूमिका स्पष्ट करने की जानकारी सूत्रों ने साझा की| जॉन्सन के सहयोगी मायकल गोव ने भी इस जानकारी की पुष्टी की है और वर्ष २०१४ में किया गया सार्वमत अंतिम फैसला करनेवाला था, इस ओर ध्यान आकर्षित किया| जॉन्सन और कन्झर्व्हेटिव्ह पाटी ने विरोध किया तो विपक्ष लेबर पार्टी ने दुसरे सार्वमत की मांग का समर्थन किया है|

वर्ष २०१० से स्कॉटलैंड में शासक रही स्कॉटिश नैशनल पार्टी ने ‘स्वतंत्र स्कॉटलैंड’ की मांग लगातार और आक्रामकता के साथ पकड रही है| पांच वर्ष पहले हुए सार्वमत में ५५ प्रतिशत नागरिकों ने स्वतंत्रता का मुद्दा ठुकराया था, फिर भी स्कॉटिश नैशनल पार्टी स्वतंत्रता के मुद्दे पर कायम रही है| वर्ष २०१६ में ब्रिटीश जनता ने यूरोपिय महासंघ से बाहर निकलने का निर्णय किया था| उस समय स्कॉटलैंड की जनता ने महासंघ के पक्ष में अपना समर्थन दर्ज किया था| अब यही मुद्दा सामने रखकर स्कॉटलैंड की शासक हमें ‘युनायटेड किंगडम’ से अलग होकर यूरोपियन महासंघ का हिस्सा बनकर रहना है, यह दावा भी कर रहे है|

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