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शीतयुद्ध के बाद पहली बार ब्रिटेन के विदेश और रक्षा नीति में होगा बडा बदलाव – प्रधानमंत्री जॉन्सन ने किया ‘इंटिग्रेटेड रिव्ह्यू’ का ऐलान

लंदन – ‘जागतिक स्तर पर बडी तेजीसे बदलाव हो रहे है और ऐसे में ब्रिटेन ने भी इन बदलावों के साथ आगे बढना होगा| इसके लिए ब्रिटेन के वर्तमान में एवं अगले कई दशकों के राष्ट्रीय हितसंबंधों का विचार करके इसके अनुसार विदेश नीति तैयार करना जरूरी है और साथ ही नई तकनीक अपनाने की एवं इस्तेमाल करने की भी जरूरत है’, इन स्पष्ट शब्दों में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने ‘ब्रेक्जिट’ के बाद जागतिक स्तर पर ब्रिटेन की भूमिका तय करने के लिए महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया|

शीतयुद्ध के बाद पहली बार ब्रिटेन की सरकार ने रक्षा, अंदरुनि सुरक्षा, विदेश और विकास विभाग की नीति का व्यापक स्तर पर ब्यौरा लेने का तय किया है| इस योजना को ‘इंटिग्रेटेड रिव्ह्यू’ नाम दिया गया है और इसके लिए स्वतंत्र अफशर एवं ‘टास्क फोर्स’ की नियुक्ती करने का तय किया गया है| इससे पहले ब्रिटेन में रक्षा एवं विदेश नीति का एक साथ ब्यौरा लेने का काम हुआ हो फिर भी उसमें सीर्फ रक्षा विभाग का समावेश था| पर, ‘ब्रेक्जिट’ की पृष्ठभूमि पर प्रधानमंत्री जॉन्सन ने ब्रिटेन के वर्तमान एवं भविष्य में रक्षा, विदेश, अंदरुनि सुरक्षा एवं विकास की नीति एक साथ तय करने की तैयारी की है और ‘इंटिग्रेटेड रिव्ह्यू’ इसी का अंग है|

प्रधानमंत्री जॉन्सन ने इस मुद्दे पर जारी किए निवेदन में शीतयुद्ध का स्पष्ट जिक्र करके नई नीति शीतयुद्ध खतम होने के बाद का सबसे बडा बदलाव होगा, यह भरोसा दिलाया है| ब्रिटेन ने अगले दशकों के अवसरों का लाभ उठाकर सरकार की प्राथमिकता पुरी करने के लिए गतिविधियां करनी होगी, इसका एहसास प्रधानमंत्री ने कराया| बाकी दुनिया के साथ ब्रिटेन कैसे मेलजोल बना सकता है या, बनाएगा इसके लिए लिए यह समय निर्णायक है और इसी को लेकर प्राथमिकता तय करना जरूरी होगा, यह इशारा जॉन्सन ने दिया है|

अपने निवेदन में प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने पांच मुद्दों का जिक्र किया है| इसमें से पहला मुद्दा दुनिया में ब्रिटेन की भूमिका तय करने के लिए महत्वाकांक्षी योजना, यही है और इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए लंबे समय के लिए धारणात्मक उद्देश्य स्पष्ट करने पर जोर देने का जिक्र है| दुसरे मुद्दे में सहयोगी एवं मित्रदेशों के साथ बने सहयोग के मुद्दे पर जोर दिया गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजुदा समस्याओं का हल निकालने के लिए ब्रिटेन का योगदान तय करना जरूरी होने की बात कही गई है|

तीसरें मुद्दे में ब्रिटेन की क्षमता, उद्देश्य और खतरें तय करने की बात भी शामिल की गई है| इसके बाद ब्रिटेन का प्रशासन और यंत्रणाओं का सुधार करने पर ध्यान दिया गया है| आखिरी और पांचवें मुद्दे में अगले दशक में ब्रिटेन जागतिक स्तर पर किस तरह से सक्रिय रहेगा, इस मुद्दे पर काफी स्पष्ट प्लैन तैयार करने का जिक्र है| साथ ही ब्रिटेन की परमाणु क्षमता और रक्षा खर्च के लिए ‘जीडीपी’ के दो प्रतिशत से भी अधिक प्रावधान करने का निर्णय से किसी भी प्रकार से दूर नही होंगे, यह निर्धार प्रधानमंत्री जॉन्सन ने इस दौरान व्यक्त किया|

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