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चीन की सुरक्षा से संबंधित सारे अधिकार राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग के हाथ में

बीजिंग – चीन की सुरक्षा, रक्षानीति और युद्धसिद्धता के लिए राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग तथा ‘सेंट्रल मिलिटरी कमिशन’ को सर्वाधिकार देनेवाले क़ानून को चीन की संसद ने मंज़ुरी दी है। नये क़ानून में, जिनपिंग ने प्रस्तुत किये विचार चीन की रक्षानीति के लिए मार्गदर्शक तत्त्वों के रूप में कार्यरत रहेंगे, यह स्पष्ट किया गया है। उसी समय, चीन के विदेशस्थ आर्थिक हितसंबंध, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, ऐसा बताकर, यदि उनके लिए ख़तरा पैदा हुआ तो चीन का लष्कर कार्रवाई के विकल्प का इस्तेमाल कर सकता है, ऐसा नमूद किया गया है। अमरीका समेत इंडो-पैसिफिक के प्रमुख देशों के साथ तनाव बढ़ रहा है कि तभी जिनपिंग ने लष्कर पर मज़बूत की पकड़ ग़ौरतलब साबित होती है।

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कोरोनावायरस महामारी के कारण हाल में चीन की आन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर की प्रतिमा को बहुत ही झटके लगे हैं। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट हुक़ूमत द्वारा अपनायी जानेवाली विस्तारवादी नीति और उसके तहत वर्चस्व पाने के लिए जारी क़ारनामें, इनका खुफ़िया चेहरा अब दुनिया के सामने आने लगा है। वहीं, अमरीका के साथ जारी व्यापारयुद्ध, दुनिया के विभिन्न देशों द्वारा लगाये गये निर्बंध और कोरोना की महामारी के कारण बदले हुए समीकरण, इनके गंभीर परिणाम चिनी अर्थव्यवस्था पर दिखायी देने लगे हैं। चीन की अर्थव्यवस्था में भी सब कुछ आलबेल ना होने के संकेत सामने आ रहे हैं और अंतर्गत तथा जागतिक स्तर पर इसकी तीव्र गूँजें सुनायी दे सकतीं हैं, ऐसा दावा विश्‍लेषकों द्वारा किया जा रहा है।

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इसे टालने के लिए युद्ध छेड़कर अपना स्थान मज़बूत करने की जिनपिंग की योजना है, ऐसा बताया जाता है। उसके लिए वे पिछले कुछ महीनों से लगातार चीन की ‘पीपल्स लिबरेशन आर्मी’ के अड्डों की भेंट कर रहे होकर, जवानों को युद्ध के लिए सिद्ध रहने का संदेश दे रहे हैं। चीन द्वारा हाल में भारत समेत ‘साऊथ चायना सी’ और ‘ईस्ट चायना सी’ तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के अन्य भागों में लष्करी गतिविधियाँ बड़े पैमाने पर बढ़ायी गयीं हैं। पिछले साल लद्दाख की गलवान वैली में भारत को उक़साकर संघर्ष छेड़ने को कोशिश चिनी सत्ताधारियों पर ‘बूमरँग’ हुई है। भारत ने दिये झटके के बाद, चीन ने तैवान के बारे में आक्रामक नीति अपनायी होकर, चीन बार बार तैवान को युद्ध की धमकियाँ दे रहा है।

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इस पृष्ठभूमि पर, चीन की ‘नैशनल पीपल्स काँग्रेस’ ने, राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर जिनपिंग और ‘सेंट्रल मिलिटरी कमिशन’ को सर्वाधिकार देने के क़ानून को दी मान्यता, यह अहम घटना साबित होती है। ‘नैशनल डिफेन्स लॉ २०२०’ ऐसा इस क़ानून का नाम होकर, पुराने क़ानून में लगभग ५० से अधिक सुधार करके, छ: नये प्रावधानों का समावेश किया गया है। क़ानून की शुरुआत में ही यह स्पष्ट किया गया है कि ‘शी जिनपिंग थॉट ऑन सोशॅलिझम विथ चायनीज कॅरक्टरिस्टिक्स फॉर न्यू इरा’ यह चीन की रक्षानीति का मर्म रहेगा।

चीन की सुरक्षा, रक्षानीति और लष्करी मुहिमें इन मुद्दों पर ‘स्टेट कौन्सिल’ तथा कम्युनिस्ट पार्टी की समिति को रहनेवाले अधिकार छीन लिये गये हैं। उस संदर्भ में फ़ैसलें करने के सारे अधिकार इसके आगे राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग और उनके नेतृत्व में रहनेवाले ‘सेंट्रल मिलिटरी कमिशन’ के पास सौंपे गये हैं। उनमें रक्षाक्षमता बढ़ाने के साथ ही, लष्कर को युद्ध के लिए सिद्धता के आदेश कब और किन कारणवश देने हैं, इन जैसे संवेदनशील मुद्दों का भी समावेश है।

चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितसंबंधों की व्याप्ति भी बढ़ायी गयी होकर, उनमें अब अंतरिक्षक्षेत्र, सायबरक्षेत्र, इलेक्ट्रोमॅग्नेटिक स्पेक्ट्रम के साथ चीन की विदेशस्थ कंपनियाँ, उपक्रम और मार्केट्स इनका भी समावेश किया गया है। यह बात यही संकेत देती है कि चीन दुनिया के किसी भी कोने में युद्ध छेड़ने के लिए तैयार है, ऐसा विश्‍लेषकों का कहना है।

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