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चीन ताइवान पर कब्जा करेगा और अमरीका कुछ भी नहीं करेगी – ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केव्हिन रूड का दावा

वॉशिंग्टन – चीन के लड़ाकू विमानों की ताइवान की हवाई सीमा में घुसपैठ बढ़ी है , ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केव्हिन रूड ने सारी दुनिया का ध्यान आकर्षित करने वाली चेतावनी दी। ‘दशकभर की कालावधि में चीन ताइवान पर कब्जा करेगा। उसके बाद चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग का स्थान माओ त्से तुंग जितनी ऊंचाई हासिल करेगा’, ऐसा दावा रूड ने किया। इतना ही नहीं, बल्कि ताइवान पर कब्जा करने की चीन की हरकत का अमरीका भी कुछ खास विरोध नहीं करेगी। क्योंकि अमरीका की अधोगति शुरू हुई है’ ऐसा धक्कादायी निष्कर्ष ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने दर्ज किया।

दो बार ऑस्ट्रेलिया का प्रधानमंत्रीपद विभूषित करने वाले केव्हिन रूड, ‘चीनपरस्त नेता’ के रूप में जाने जाते हैं । सन २००७ से २०१० के बीच प्रधानमंत्री रहे रूड ने, ऑस्ट्रेलिया के हितसंबंधों को नज़रअंदाज़ करके चीन को बहुत बड़ी सहूलियतें दीं होने की बात सामने आई थी। आगे चलकर सन २०१३ में भी रूड ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री बने, लेकिन इस समय उनका प्रधानमंत्री पद चंद कुछ महीने ही टिका था। इन दिनों केव्हिन रूड अमरीका के ‘एशिया सोसायटी न्यूयॉर्क’ इस संगठन के लिए काम कर रहे हैं। चीन तथा अमरीका के संदर्भ में धक्कादाई निष्कर्ष दर्ज कर, रूड ने एक तरह से, आने वाले समय में चीन की गतिविधियों के संकेत दिए दिख रहे हैं।

‘महासत्ता होनेवाली अमरीका को भी पिछड़ने वाला अत्याधुनिक लष्कर विकसित करने की दिशा में चीन मार्गक्रमणा कर रहा है। ताइवान को चीन में समा लेने का ध्येय चीन ने अपने सामने रखा है। लेकिन चर्चा से इस समस्या का हल निकलने की संभावना कम होती जा रही है, इसका भी एहसास चीन के राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग तथा अन्य चीनी नेताओं को हुआ है, ऐसा रूड ने कहा है।

दूसरी तरफ, जिनपिंग सत्ता में आने के बाद ‘एक देश दो व्यवस्थाएँ’ यह तत्व बाजू में रखकर चीन ने हाँगकाँग पर नियंत्रण प्राप्त किया है। हाँगकाँग में जारी प्रदर्शन कुचल देने के लिए चीन ने उनके नेताओं को गिरफ्तार किया और माध्यमों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। यह सब कुछ देख रहा ताइवान कभी भी चीन में शामिल नहीं होगा। इस कारण ताइवान अपनी पूरी ताकत के साथ चीन का प्रतिकार करेगा और अंत में इस युद्ध में परास्त होगा। क्योंकि अमरीका इस संघर्ष में ताइवान की सहायता नहीं कर सकेगी’, ऐसा दावा केव्हिन रूड ने किया।

‘अमरीका के पास कम से कम एशिया महाद्वीप में तो, चीन को चुनौती देने जितना लष्करी सामर्थ्य नहीं है। इसलिए अमरीका की चीन के सामने एक नहीं चलेगी। इसी कारण अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखने के लिए अमरीका चीन-ताइवान संघर्ष में दखलअंदाजी नहीं करेगी, इसका चीन को एहसास है’, ऐसा युक्तिवाद रूड ने किया है। एशिया के अन्य देश भी चीन के विरोध में अमरीका का साथ नहीं देंगे, ऐसा रूड ने आगे कहा।

पिछले कुछ दिनों में बायडेन प्रशासन चीन के संदर्भ में नरम रवैया अपना रहा होने की आलोचना अमेरिका में शुरू हुई है। बायडेन सत्ता में आ रहे थे कि तभी चीन ने म्यानमार में लष्करी बगावत करवाई। उसके बाद ताइवान की हवाई सीमा में चीन की घुसपैठ बढ़ती चली जा रही है। ईस्ट चायना सी क्षेत्र ने जापान को चुनौती देने के लिए चीन ने गतिविधियाँ शुरू की है। बायडेन अपने विरोध में कुछ भी नहीं कर सकते, इसका यकीन होने के कारण ही चीन यह सब कुछ कर रहा है, ऐसे आरोप शुरू हुए हैं।

ऐसे हालातों में ‘चीन परस्त’ ऐसी पहचान होने वाले केव्हिन रूड ने ताइवान के संदर्भ में दी चेतावनी गौरतलब साबित होती है। बायडेन के कार्यकाल में चीन बेकाबू होगा, यह अमरीका के कुछ नेताओं ने दी हुई चेतावनी सच होने के आसार दिखाई देने लगे हैं।

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