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अमरीका के न्यूक्लिअर बॉम्बर्स की बाल्टिक देशों में गश्ती – रशिया ने भी अपने लड़ाकू विमान भेजे

वॉशिंग्टन – नॅव्हॅल्नी मामले पर रशिया के विरोध में प्रतिबंधों की घोषणा करने के महज़ २४ घंटों की अवधि में, अमरिकी बॉम्बर्स ने रशियन सीमा के नजदीक होने वाले बाल्टिक क्षेत्र में गश्ती की होने की बात सामने आई। बुधवार को अमरीका के ‘बी-१ न्यूक्लिअर बॉम्बर्स’ ने बाल्टिक क्षेत्र के लिथुआनिया, लाटव्हिया तथा इस्टोनिया की सीमा में से उड़ान भरी होने की जानकारी अमरिकी हवाई दल ने दी। अमरिकी बॉम्बर्स की यह मुहिम, रशिया को रोककर युरोपीय देशों को ताकत की आपूर्ति करने के लिए बनाई मुहिम का भाग माना जाता है।

आर्क्टिक क्षेत्र में रशिया के बढ़ते रक्षा अड्डे और आक्रामक गतिविधियों को रोकने के लिए अमरीका ने नॉर्वे स्थित हवाई अड्डे पर ‘बी-१ बॉम्बर्स’ तैनात करने का फैसला किया था। अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन ने इस मामले में आदेश दिए होने की बात सामने आई थी। फरवरी महीने में अमरीका के चार ‘बी-१ न्यूक्लिअर बॉम्बर्स’ नॉर्वे के ‘ऑरलँड’ अड्डे पर दाखिल हुए हैं। इन बॉम्बर्स के साथ अमरीका के २०० जवानों की एक टुकड़ी भी नॉर्वे में तैनात की गई है। अमरीका ने नॉर्वे में पहली ही बार ‘बॉम्बर्स’ और जवान तैनात किए हैं।

बुधवार को बाल्टिक क्षेत्र के देशों में भेजे गए बॉम्बर्स नॉर्वे के अड्डे से भेजे गए थे। ‘नाटो के सहयोगी सदस्य देशों के प्रति होनेवाली अमरीका की वचनबद्धता कभी भी नहीं टूटेगी। बाल्टिक देशों की मुहिम यह उस मामले में दिया गया सुस्पष्ट संदेश है। अमरीका युरोप के नाटो सहयोगी देशों के साथ एकजुट से खड़ी है’, इन शब्दों में अमरिकी हवाई दल के युरोप में नियुक्त वरिष्ठ अधिकारी जनरल जेफ हॅरिगिअन ने अमेरिका की बाल्टिक की मुहिम की जानकारी दी।

अमेरिका के न्यूक्लिअर बॉम्बर्स पर नजर रखने के लिए रशिया ने भी अपने लड़ाकू विमान बाल्टिक में भेजें होने की बात सामने आई। रशिया ने बुधवार को अपना ‘सुखोई एसयु-२७’ यह लड़ाकू विमान बाल्टिक सागर क्षेत्र में भेजा था। अमरीकी बॉम्बर्स को रशियन सीमा से सुरक्षित दूरी तक भेजने के बाद रशियन लड़ाकू विमान वापस लौट आए होने की जानकारी रशिया के ‘नॅशनल डिफेन्स मॅनेजमेंट सेंटर’ ने दी। अमरिकी बॉम्बर्स रशियन सीमा में नहीं आए थे, ऐसा खुलासा भी रशिया द्वारा किया गया।

अमरीका के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी’ का पुरस्कार करके चीन समेत ईरान, युरोपीय देश और मित्र देशों के विरोध में आक्रामक भूमिका अपनाई थी। उसी समय ट्रम्प की रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमिर पुतिन के साथ होने वाली नजदीकी भी विवाद का विषय बनी थी। लेकिन बायडेन ने चेतावनी दी थी कि उनकी रशिया नीति पहले के राष्ट्राध्यक्ष की तरह नर्म रहने वाली ना होकर, वे आक्रामक भूमिका अपनायेंगे। पिछले ४८ घंटों में रशिया पर लगाए गए सख्त प्रतिबंध और उसके बाद रशियन सीमा के नजदीक भेजे गए बॉम्बर्स उसी का भाग साबित होते हैं।

रशिया ने पिछले कुछ वर्षों में आर्क्टिक स्थित रक्षा अड्डों की संख्या और उस पर की तैनाती बड़े पैमाने पर बढ़ाई थी। रशियन लड़ाकू विमान और पनडुब्बियों की बढ़ती आवाजाही युरोपीय देशों के लिए चिंता का विषय साबित हुआ था। इस पृष्ठभूमि पर, बायडेन ने आक्रामक नीति के संकेत देकर रशिया को लक्ष्य करने की शुरुआत की दिख रही है।

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