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युद्ध का दायरा बढ़ने पर आर्मेनिया को सहायता देने का रशिया ने किया वादा

येरेवान/मॉस्को/बाकु – फिलहाल जारी आर्मेनिया-अज़रबैजान के युद्ध का दायरा अधिक बढ़ने पर रशिया अर्मेनिया को हर तरह का ज़रूरी सहयोग प्रदान करेगी, यह वादा रशिया ने किया है। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन को खत लिखकर रक्षा सहयोग प्रदान करने की माँग की थी। इसमें तुर्की से अज़रबैजान को खुलेआम प्रदान हो रहे सहयोग का ज़िक्र करके वर्ष १९९७ में रशिया और आर्मेनिया ने किए समझौते की याद दिलाई है। रशिया और आर्मेनिया के संभावित सहयोग पर अज़रबैजान ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है और तीसरा देश हमारे संघर्ष में शामिल होने की कोशिश ना करे, यह इशारा अज़रबैजान के राष्ट्राध्यक्ष ने दिया हैं।

युद्ध का दायरा

मध्य एशिया के आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच २७ सितंबर से युद्ध हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के आवाहन के बावजूद इन दोनों देशों के नेताओं ने पीछे हटने से इन्कार किया है। युद्धविराम की कोशिश के बाद भी यह युद्ध अधिक भड़कने की बात सामने आ रही है। अज़रबैजान के पीछे खड़े हुए तुर्की ने अपनाई आक्रामक भूमिका ही इसके लिए ज़िम्मेदार होने की बात समझी जा रही है।

युद्ध का दायरा

बीते दो सप्ताहों में अज़रबैजान ने नागोर्नो-कैराबख प्रांत के एवं इसके करीबी कुछ इलाकों पर कब्ज़ा किया हैं, यह समझा जा रहा हैं। इस वजह से फिलहाल हो रहें युद्ध में अज़रबैजान को कुछ मात्रा में बढ़त प्राप्त होती दिख रही हैं। यह बढ़त बढ़ाने की कोशिश में अज़रबैजान अब तुर्की की सहायता से आर्मेनिया पर हमला करने की संभावना बनी हैं। यह बात ध्यान में रखकर आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने रशिया को रक्षा सहयोग की याद दिलाई है।

युद्ध का दायरा

रशिया और आर्मेनिया में रक्षा समझौता हुआ है और इसके अनुसार रशिया आर्मेनिया को हथियारों की आपूर्ति कर सकती हैं। आर्मेनिया में रशिया का लष्करी अड्डा होने की बात भी कही जाती है। इसी कारण आर्मेनिया रशिया के लिए सामरिक नज़रिये से अहम देश बनता है। रशिया के राष्ट्राध्यक्ष पुतिन ने पहले भी आर्मेनिया को सहायता प्रदान करने का वादा किया हैं। लेकिन, यह संघर्ष आर्मेनिया की सीमा पर जा पहुँचा तो ही रशिया इसमें उतरेगी, यह भी स्पष्ट किया था।

इससे पहले वर्ष १९९१ से १९९४ के दौरान हुए आर्मेनिया-अज़रबैजान के युद्ध में लगभग ३० हज़ार लोग मारे गए थे। वर्ष २०१६ में हुए युद्ध में २०० से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इन दोनों युद्धों के दौरान रशिया ने आर्मेनिया को लष्करी सहायता प्रदान की थी।

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