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फिलीपीन्स के हवाई बल ने लगाईं चीन के घुसपैंठी जहाजों पर चकरें

मनिला – पिछले चार हफ्तों से अपने सागरी क्षेत्र में घुसपैंठ करनेवाले चीन के सशस्त्र जहाजों पर फिलीपीन्स के हवाई बल ने चकरें लगाईं हैं। जल्द ही इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की तैनाती भी बढ़ाई जाएगी, ऐसी घोषणा फिलीपीन्स के रक्षा मंत्री डेल्फिन लॉरेंझा ने की। साथ ही, चीन फौरन अपने जहाजों को वापस बुलाएँ, ऐसा नया आवाहन रक्षा मंत्री लॉरेन्झा ने किया। इसी बीच, फिलीपीन्स की सागरी सीमा में मिलिशिया जहाजों की घुसपैंठ करनेवाले चीन की अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने कड़ी आलोचना की थी। फिलीपीन्स के सार्वभौम अधिकारों को अपना समर्थन है, ऐसा इन देशों ने कहा था।

इस महीने की शुरुआत में चीन के लगभग २२० जहाजों ने फिलीपीन्स के ‘जुलियन फिलिप’ इस द्वीप की सागरी सीमा में घुसपैठ की थी। फिलीपीन्स की अनुमति के बिना चीन के जहाज अपनी सीमा में खड़े होने का आरोप फिलिपीन्स में कुछ दिन पहले किया था। इन जहाजों का नेतृत्व लष्करी प्रशिक्षण लिए हुए मिलिशिया अर्थात सशस्त्र बल कर रहे हैं, ऐसा आरोप फिलीपीन्स की सरकार ने किया था। मिलिशिया जहाज रवाना करके चीन इस सागरी क्षेत्र का लष्करीकरण कर रहा होने की आलोचना भी फिलीपीन्स ने की। साथ ही, चीन इन जहाजों को वापस बुलाएँ, ऐसा आवाहन भी फिलिपीन्स ने किया था।

लेकिन चार हफ्ते बीतने के बाद भी चीन ने ये जहाज इस सागरीक्षेत्र से वापस नहीं बुलाए हैं। इस पृष्ठभूमि पर इन चीनी जहाजों पर अपने लड़ाकू विमानों की गश्ती शुरू की होने की घोषणा रक्षामंत्री लॉरेंझा ने की। यह गश्ती हररोज़ जारी रहनेवाली होकर, जल्द ही फिलीपीन्स की नौसेना के विध्वंसक और गश्ती पोत भी इस क्षेत्र में तैनात की जायेंगे, ऐसी जानकारी लॉरेंझा ने दी। फिलीपीन अपने सार्वभौम अधिकार और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सिद्ध होने की चेतावनी भी रक्षामंत्री लॉरेंझा ने दी।

दो दिन पहले फिलीपीन्स के राष्ट्राध्यक्ष रॉड्रिगो दुअर्ते ने सन २०१६ में हेग में अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय ने ‘साऊथ चायना सी’ के संदर्भ में किए फैसले की याद करा दी। संबंधित सागरी क्षेत्र पर चीन ने जताया अधिकार अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय ने ठुकरा दिया था। साथ ही, चीन इस सागर क्षेत्र का लष्करीकरण ना करें, ऐसी चेतावनी भी दी थी, इसपर राष्ट्राध्यक्ष दुअर्ते ने गौर फ़रमाया था। अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने भी फिलीपीन्स के सार्वभौमत्त्व का समर्थन किया। लेकिन चीन ने इस मामले में प्रतिक्रिया देना टाला है।

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