‘वैग्नर ग्रुप’ की तैनाती को लेकर अमरीका की नाइजर की सैन्य हुकूमत को चेतावनी

- अमरिकी वरिष्ठ अधिकारी विक्टोरिया न्यूलैण्ड ने किया नाइजर का दौरा

नियामे/वॉशिंग्टन – अमरीका के विदेश विभाग की वरिष्ठ अधिकारी विक्टोरिया न्यूडैण्ड ने सोमवार को नाइजर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने नाइजर की सैन्य हुकूमत के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही जा रही है। इस चर्चा में न्यूलैण्ड ने रशिया के ‘वैग्नर ग्रुप’ की संभावित तैनाती के मुद्दे पर नाइजर की हुकूमत को कड़ी चेतावनी दी। अमरीका ने पिछले हफ्ते नाइजर को प्रदान हो रही सहायता रोकने का ऐलान किया था। इसके बाद न्यूलैण्ड जैसी वरिष्ठ अधिकारी ने नाइजर का दौरा करना ध्यान आकर्षित करता है।

‘वैग्नर ग्रुप’

अमरीका के विदेश विभाग की ‘अंडर सेक्रेटरी फॉर पॉलिटिकल अफेअर्स’ न्यूलैण्ड को वरिष्ठ राजनीतिक अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। पिछले दशक में यूक्रेन में हुए विद्रोह के सहित यूरोप की कई घटनाओं में उन्होंने निभाई भूमिका अहम बताई जाती है। न्यूलैण्ड तीव्र रशिया विरोधी अधिकारी के तौर पर भी प्रसिद्ध हैं।

दो दिन पहले ही नाइजर की हुकूमत ने रशिया के ‘वैग्नर ग्रुप’ से सहायता की गुहार लगाने की खबर सामने आयी थी। ‘फ्रान्स २४’ एवं ‘असोसिएटेड प्रेस’ जैसे पश्चिमी माध्यमों ने इससे संबंधित वृत्त प्रसिद्ध किया था। पिछले हफ्ते नाइजर के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने माली का दौरा किया था। इस दौरे में वरिष्ठ अधिकारी जनरल सलिफौ मॉडि ने माली में ‘वैग्नर ग्रुप’ के अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान जनरल मॉडि ने ‘वैग्नर ग्रुप’ के सामने नाइजर में अपनी तैनाती करने की मांग रखी होने की बात कही जा रही है।

‘वैग्नर ग्रुप’

नाइजर की सैन्य हुकूमत ने रखी इस मांग ने अमरीका और यूरोपिय देशों में बेचैनी फैली हैं। पिछले कुछ सालों में रशिया ने ‘वैग्नर ग्रुप’ की सहायता से अफ्रीका में अपना प्रभाव बढ़ाने की जानकारी सामने आयी है। अफ्रीका के माली और ‘सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक’ इन देशों में ‘वैग्नर ग्रुप’ के सैनिकों भी भारी संख्या में तैनाती हुई है और इन देशों में रशियन निजी सैन्य कंपनी ने अपने अड्डे भी बनाए हैं। इसके अलावा सूड़ान, केनिया, मोझांबिक, बुर्किना फासो, कैमेरून इन देशों में भी ‘वैग्नर ग्रुप’ की मौजुदगी होने की बात कही जा रही हैं।

नाइजर में पश्चिमी देशों का प्रभाव है और अमरीका और फ्रान्स इन दोनों देशों के अड्डे स्थापीत हैं। इस पृष्ठभूमि के मद्देनज़र नाइजर में ‘वैग्नर ग्रुप’ का प्रवेश पश्चिमी देशों के लिए खतरे की घंटी है। इस वजह से अमरीका ने बड़ी तीव्र राजनीतिक गतिविधियां शुरू की हैं और न्यूलैण्ड का दौरा इसी का हिस्सा दिखता है। न्यूलैण्ड ने नाइजर की सैन्य हुकूमत के रक्षाबलप्रमुख जनरल मुसा बार्मोऊ के साथ तीन वरिष्ठ कमांडर के चर्चा की। इस दौरान उन्होंने ‘वैग्नर ग्रुप’ की तैनाती को लेकर चेतावनी देने की बात सामने आयी है।

‘वैग्नर ग्रुप’

‘वैग्नर ग्रुप’ की विभिन्न देशों में हुई जैनाती का ज़िक्र करके न्यूलैण्ड ने उन देशों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया। रशियन निजी सैन्य कंपनी के प्रवेश के बाद उभरने वाले खतरों का नाइजर की सैन्य हुकूमत को अहसास होगा, इन शब्दों में उन्होंने आगाह भी किया। नाइजर के अधिकारियों ने अमरिकी अधिकारी का बयान सुन लिया है, फिर भी उसे किसी भी तरह का आश्वासन नहीं किया है, ऐसा दावा सुत्रों ने किया है। साथ ही न्यूलैण्ड को नाइजर के राष्ट्राध्यक्ष बझूम से मुलाकात करने का अवसर देने से इनकार किए जाने की बात भी सामने आयी हैं।

जनरल चियानी के नेतृत्व में पिछले महीने राष्ट्राध्यक्ष बझूम के विरोध में विद्रोह हुआ था। पश्चिमी देशों के प्रभाव में काम करते रहे बझूम की हुकूमत का तख्तापलट होने से अमरीका और यूरोपिय देशों ने तीव्र प्रतिक्रिया दर्ज़ की थी। ब्रिटेन, फ्रान्स के साथ यूरोपिय महासंघ ने नाइजर की आर्थिक सहायता रोक दी थी। राष्ट्राध्यक्ष बझूम की सेना रिहाई करें, यह मांग भी पश्चिमी देशों ने रखी थी।

ऐसे में पश्चिम अफ्रीकी देशों की संगठन ने नाइजर की सेना को सात दिन का अवधि मुहैया करके बझूम को फिर से सत्ता की बागड़ोर सौंपन की चेतावनी दी थी। इस निर्धारित अवधि में नाइजर की सेना यह मांग पुरी नहीं करती हैं तो सीधे सैन्य कार्रवाई करेंगे, ऐसी धमकी पश्चिम अफ्रीकी देशों ने दी थी। लेकिन, नाइजर की सेना ने इस धमकी को ठुकाराया है और माली एवं बुर्किना फासो ने इस सैन्य हुकूमत के समर्थन में सहायता करने के लिए तैयार होने की चेतावनी दी है।

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