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जापान के रक्षाबलों को प्राप्त होगी शत्रु की ज़मीन पर हमले करने की अनुमति

टोकियो – चीन की जारी आक्रामक और वर्चस्ववादी गतिविधियों को रोकने के लिए जापान ने अपनी रक्षानीति में निर्णायक बदलाव करने के संकेत दिए हैं। अब तक शत्रु के समुद्री एवं हवाई क्षेत्र को लक्ष्य करने की क्षमता रखनेवाले जापान के रक्षाबलों को इसके आगे शत्रु की ज़मीन पर भी हमले करने की अनुमति प्राप्त होगी। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे ने इसके लिए पहल की है और शुक्रवार के दिन देश की ‘नैशनल सिक्युरिटी कौन्सिल’ की भी बैठक होने की जानकारी प्रदान की गई है। बीते कुछ वर्षों में जापान के प्रधानमंत्री एबे ने चीन और उत्तर कोरिया के बढ़ रहे खतरे पर प्रत्युत्तर देने के लिए रक्षा नीति में बड़े बदलाव के निर्णय किए हैं और नए बदलावों को मंजूरी भी प्राप्त होगी, ऐसे संकेत हैं।

दूसरे विश्‍वयुद्ध के बाद हुए समझौते के अनुसार जापान को अपने युद्ध के अधिकार छोड़ने के लिए मज़बूर किया गया था। इसके बाद जापान के संविधान में भी इससे संबंधित बदलाव किए गए थे। संविधान के प्रावधानों के अनुसार जापान के रक्षाबलों को सिर्फ हमला होने पर या सुरक्षा के लिए खतरा निर्माण होने पर प्रत्युत्तर के तौर पर कार्रवाई करने का अधिकार है। लेकिन, शत्रु की ज़मीन पर उतर कर कार्रवाई करने का या लड़ने का हक नही है। आठ वर्ष पहले जापान का नेतृत्व स्वीकारने के बाद जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे ने इसमें बड़े बदलाव करना शुरू किया।

जापान ने अपनी रक्षा नीति में बदलाव किए हैं और रक्षाखर्च में भी बड़ी बढ़ोतरी की है। नए लड़ाकू विमान, हायपरसोनिक मिसाइल यंत्रणा और विध्वंसक समेत विमान वाहक युद्धपोत विकसित करने के संकेत भी जापान ने दिए हैं। बीते महीने में, ‘इंटिग्रेटेड एअर ऐण्ड मिसाइल डिफेन्स’ क्षमता से सज्जित लष्करी अड्डा विकसित करने से संबंधित प्रस्ताव भी जापान के सत्ता पक्ष ने मंजूर किया था। इस प्रस्ताव में जापान के रक्षाबलों को लंबी दूरी के मिसाइल तैनात करने का प्रावधान है और यह तैयारी शत्रु की ज़मीन पर मौजूद लष्करी अड्डों पर हमले करने के लिए ही है, ऐसा समझा जा रहा है।

जापान के पूर्व रक्षाबलप्रमुख कात्सुतोशि कावानो, पूर्व उप-रक्षामंत्री मासाहिसा सातो, सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता टोमोमी इनादा ने एबे के प्रस्ताव का समर्थन किया है। अगले कुछ महीनों में जापान के ‘नैशनल डिफेन्स स्ट्रैटेजी’ का ऐलान होगा और इसमें नए बदलावों का समावेश होगा, ऐसा दावा भी इन अधिकारियों एवं नेताओं ने किया है। नीति में बदलाव होने पर अमरीका से ‘बीजीएम-१०९ टॉमाहॉक क्रूज़ मिसाइल्स’ खरीदके जापान के रक्षा बलों को सज्जित करना संभव होगा, ऐसी जानकारी भी सूत्रों ने साझा की।

चीन ने बीते कुछ महीनों में साउथ चायना सी समेत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की गतिविधियां काफी मात्रा में बढ़ाई हैं। पूरे साउथ चायना सी और ईस्ट चायना सी पर कब्ज़ा करने की वर्चस्ववादी महत्वाकांक्षा इसके पीछे है। चीन एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में लगातार अपने रक्षा सामर्थ्य का आक्रामक प्रदर्शन कर रहा है। जापान के निकट ईस्ट चायना सी में चीन के विध्वंसक, पनडुब्बियां और गश्‍तीपोतें जापान की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश कर रही हैं। मई महीने में चीन ने अपनी ‘लिओनिंग’ नामक विमान वाहक युद्धपोत और ‘स्ट्राईक ग्रूप’ जापान के निकट ईस्ट चायना सी में तैनात किए थे। चीन के कुछ लड़ाकू विमानों ने जापान की हवाई सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश करने का समाचार भी सामने आया था। ऐसी पृष्ठभूमि पर जापान की रक्षा नीति में हो रहे संभावित बदलाव बड़े अहम साबित होंगे।

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