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आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध में १०० से अधिक लोगों की मौत – तुर्की ने लड़ाकू विमान गिराने का किया आर्मेनिया ने आरोप

येरेवान/बाकु – रविवार से शुरू हुए आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध में १०० से अधिक लोग मारे गए हैं और घायल सैनिक एवं नागरिकों की संख्या ३०० से अधिक हुई है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के अहम ठिकानों पर कब्ज़ा करने के दावे किए हैं और खून की आखरी बूंद तक लड़ाई जारी रखने का इशारा दिया है। साथ ही आर्मेनिया ने तुर्की के खिलाफ अपना लड़ाकू विमान गिराने का आरोप किया है। रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री से बातचीत करने का समाचार सामने आया है। तुर्की ने अज़रबैजान को प्रदान की हुई सहायता पर रशिया ने नाराज़गी व्यक्त की है और तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष इस संघर्ष पर शांति के माध्यम से हल निकालने की कोशिश करें, यह इशारा भी दिया है।

जुलाई में आर्मेनिया और अज़रबैजान में भड़के संघर्ष में १६ सैनिक मारे गए थे। लेकिन, रविवार की भोर के साथ शुरू हुआ यह संघर्ष अब युद्ध में तब्दील हुआ है। इस युद्ध में अब तक १०० से अधिक लोग मारे गए हैं। इनमें आर्मेनिया के नागोर्नो-कैराबख में मारे गए ८० से अधिक सैनिकों का समावेश है। अज़रबैजान ने इस जंग में अपनी जीवन हानी होने की बात स्वीकारी है लेकिन, मृत सैनिकों की संख्या सार्वजनिक नहीं की है। दोनों ओर के घायल सैनिक और नागरिकों की कुल संख्या ३०० से अधिक हुई है।

आर्मेनिया-अज़रबैजान युद्ध में तुर्की का बढ़ रहा योगदान ध्यान आकर्षित करता है। बीते कुछ वर्षों में सीरिया और लीबिया के युद्ध में तुर्की की दखलअंदाज़ी से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नाराज़गी है। इस पृष्ठभूमि के बावजूद तुर्की ने अज़रबैजान के रूप में तीसरा मोर्चा खोलकर अपनी विस्तारवादी महत्वाकांक्षा दिखाई है। एक समय पर सोवियत युनियन का हिस्सा रहे इन देशों के बीच जारी संघर्ष में तुर्की के कूदने से रशिया ने स्पष्ट नाराज़गी व्यक्त की है। इसकी वजह से आर्मेनिया अज़रबैजान के मुद्दे पर रशिया-तुर्की के तनाव में भी अब बढ़ोतरी होगी, ऐसे दावे किए जा रहे हैं।

इसी बीच आर्मेनिया की सेना ने यह आरोप किया है कि, तुर्की ने अपना लड़ाकू विमान गिराया है। अज़रबैजान की हवाई सीमा से पहुँचे तुर्की के ‘एफ-१६’ विमान ने अपना ‘एसयू-२५’ लड़ाकू विमान गिराया है, यह जानकारी आर्मेनिया के रक्षा विभाग ने साझा की है। यह घटना आर्मेनिया की सीमा में घटने का दावा भी किया गया है। लेकिन, तुर्की ने यह दावा ठुकराया है।

वर्ष १९९१ में सोवियत युनियन से आज़ाद हुए आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच १९८० के दशक से नागोर्नो-कैराबख के नियंत्रण को लेकर लगातार संघर्ष हो रहा है। रशिया ने इस मुद्दे पर आर्मेनिया का समर्थन किया है और इस देश के साथ रक्षा समझौता भी किया है। आर्मेनिया, एक ईसाई देश के तौर पर जाना जाता है और वहां की जनसंख्या करीबन ३० लाख है।

नागोर्नो-कैराबख में ईसाई आर्मेनियन नागरिकों की संख्या अधिक होने के बावजूद विश्व स्तर पर यह क्षेत्र अज़रबैजान का हिस्सा समझा जाता है। इस प्रांत की स्वायत्त सरकार ने अज़रबैजान का नियंत्रण स्वीकारने से इन्कार किया है और आर्मेनिया को पूरा समर्थन दे रही है। अज़रबैजान एक इस्लामी देश है और इस देश में तुर्की वंशियों की संख्या काफी ज्यादा है। करीबन एक करोड़ से अधिक जनसंख्या का यह देश र्इंधनों के भंड़ारों से भरे देश के तौर पर जाना जाता है। रशिया से यूरोप एवं तुर्की में जानेवाली कुछ र्इंधन पाईपलगाईन्स अज़रबैजान से ही गुजरती हैं, इसी कारण यह क्षेत्र सामरिक नज़रिए से भी अहम समझा जाता है।

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