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तैवान पर हमला करने के लिए चीन ने किए ‘एस-४००’ और ‘हायपरसोनिक मिसाइल’ तैनात

बीजिंग/तैपेई – ‘साउथ चायना सी’ में अमरिकी युद्धपोतों की बडती मौजूदगी और तैवान को अमरीका के साथ प्राप्त हो रहे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय समर्थन की पृष्ठभूमि पर चीन ने तैवान पर हमला करने के लिए तैयारी जुटाने के लिए गति देने की बात सामने आयी है। तैवान पर हमला करने के लिए इस्तेमाल होनेवाले संभावित ठिकानों पर चीन ने सेना तैनाती बढ़ाई है और प्रगत मिसाइल एवं सुरक्षा यंत्रणा तैनात करने का वृत्त माध्यमों ने दिया है। चीन की पिपल्स लिब्रेशन आर्मी ने ‘डीएफ-१७’ नामक ‘हायरपसोनिक मिसाइल’ एवं प्रगत ‘एस-४००’ हवाई सुरक्षा यंत्रणा तैनात करने की जानकारी भी सामने आयी है। कनाड़ा के एक अभ्यासगुट ने चीन की इस तैनाती के फोटो भी जारी किए हैं। इसी दौरान चीन के पूर्व लष्करी अधिकारी ने यह इशारा दिया है कि, चीन की जारी तैयारी और लगातार हो रहे युद्धाभ्यास तैवान के विरोध में युद्ध करने से चीन मात्र एक कदम दूर होने की बात दिखा रहे हैं।

बीते कुछ दिनों से चीन ने तैवान के करीबी क्षेत्र में अपने लष्करी सामर्थ्य का आक्रामकता से प्रदर्शन करना जारी रखा है। चीन की पिपल्स लिब्रेशन आर्मी लगातार युद्धाभ्यास कर रही है और इसके वीडियो और फोटो भी जारी किए जा रहे हैं। यह युद्धाभ्यास तैवान पर हमला करने की रिहर्सल होने का दावा चीनी माध्यम कर रहे हैं। साथ ही चीन के पूर्व अधिकारी, विश्‍लेषक एवं प्रसारमाध्यम लगातार तैवान पर हमला करने की धमकियां दे रहे हैं। बीते सप्ताह में ही चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग ने चीन के लष्करी अड्डों का दौरा करके युद्ध के लिए तैयार रहने के आदेश दिए थे। इस पृष्ठभूमि पर तैवान की सीमा से करीबी रक्षाअड्डों पर चीन ने युद्ध के लिए तैयार होने के संकेत देनेवाले प्रगत हथियार तैनात करना ध्यान आकर्षित करता है।

तैवान की सीमा से करीबी फुजीआन और ग्वांगडोंग के अड्डों पर ‘हायपरसोनिक डीएफ-१७’ मिसाइलों की तैनाती की गई है। ‘डीएफ-१७’ मध्यम दूरी की ‘हायपरसोनिक मिसाइल’ है और इसकी मारक क्षमता ढ़ाई हज़ार किलोमीटर्स होने का दावा किया जाता है। तैवान के पूर्वी तटीय क्षेत्र में मौजूद अड्डों पर यह मिसाइल हमले कर सकती है, यह दावा किया जा रहा है। इससे पहले चीन ने इन अड्डों पर ‘डीएफ-११’ और ‘डीएफ-१५’ मिसाइल तैनात किए थे। लेकिन, तैवान के साथ तनाव चरम स्तर पर पहुँचा होने की स्थिति में प्रगत मिसाइल तैनात करके चीन ने तैवान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की हुई दिख रही है। हाँगकाँग स्थित साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट ने इस तैनाती का वृत्त जारी किया है। कनाड़ा के कांवा डिफेन्स रिव्ह्यू नामक अभ्यासगुट ने इससे संबंधित जानकारी जारी की है और चीन के कुछ अड्डों के फोटो भी प्रसिद्ध किए हैं।

कांवा डिफेन्स रिव्ह्यू के प्रमुख आंद्रेई चैंग ने चीन ने तैवान के करीबी अड्डों पर रशियन निर्माण की प्रगत हवाई सुरक्षा यंत्रणा एस-४०० तैनात करने का दावा भी किया। तैवान के किसी भी अड्डे से उड़ान भरनेवाले विमान, छोड़ी गई मिसाइल एवं ड्रोन गिराने की क्षमता यह यंत्रणा रखती है, यह बयान चीन ने किया है। अमरीका ने बीते दो वर्षों में तैवान को भारी मात्रा में लड़ाकू विमान और मिसाईलों की आपूर्ति की है। ‘एस-४००’ की तैनाती करके अमरीका के इस बढ़ते रक्षा सहयोग का तैवान को लाभ नहीं होगा, यह संदेश चीन ने दिया है, यह भी समझा जा रहा है। डीएफ-१७ और एस-४०० के अवाला जे-२० नामक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों का समावेश होनेवाले २० एअरफोर्स ब्रिगेड्स एवं मरिन कोअर के १० दल तैवान के करीबी रक्षा अड्डे पर तैनात किए गए हैं।

चीन ने की हुई यह तैनाती और पिपल्स लिब्रेशन आर्मी ने लगातार जारी रखे युद्धाभ्यास अभूतपूर्व होने का दावा चीन के वरिष्ठ सेना अधिकारियों ने किया है। मौजूदा गतिविधियां और बढ़ती तैयारी तैवान के साथ शांति के माहौल में वियल होने की संभावना लगभग खत्म होने के संकेत हैं। चीन के रक्षाबल के जारी आक्रामक युद्धाभ्यास, चीन प्रत्यक्ष युद्ध से मात्र एक कदम दूर होने की बात दिखा रहे हैं, यह इशारा पूर्व लष्करी अधिकारी मेजर जनरल वैंग झाईशी ने दिया। बीते १० दिनों में अमरीका के दो विध्वंसकों ने तैवान की खाड़ी में गश्‍त लगाई थी। इसके बाद अमरिकी विमान वाहक युद्धपोत ‘यूएसएस रोनाल्ड रिगन’ भी फिलहाल साउथ चायना सी में होने की बात कही जा रही है। इस पृष्ठभूमि पर चीन की बढ़ती गतिविधियां इस क्षेत्र में तनाव अधिक बढ़ानेवाली साबित होती है।

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