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अमरीका-तैवान रक्षा सहयोग पर चीन की नई धमकी

बीजिंग – चीन की ‘वन चायना पॉलिसी’ को झटका देकर अमरीका ने तैवान को हवा से ज़मीन पर हमला करनेवाले १३५ मिसाइलों से सज्जित करने का निर्णय घोषित किया है। लड़ाकू विमान से दागी जानेवाली यह मिसाइल चीन के तटीय क्षेत्र को लक्ष्य कर सकती है। इससे क्रोधित हुए चीन ने तैवान को हथियारों से सज्जित करनेवाली अमरीका को धमकाया है। इन मिसाइलों की आपूर्ति करके तैवान की आज़ादी की माँग करनेवाले अलगाववादी गुटों को अमरीका भड़का रही है। इस सहयोग के विरोध में चीन की सुरक्षा के नज़रिये से आवश्‍यक कदम उठाने की धमकी चीन ने दी है। चीन ने कुछ दिन पहले ही तैवान पर हमला करने के लिए ‘एस-४००’ और ‘हायरपरसोनिक मिसाइल’ तैनात किए थे।

तैवान के विरोध में युद्ध करने से चीन मात्र एक कदम दूर होने का दावा चीन के पूर्व लष्करी अधिकारी कर रहे हैं। चीन की ‘पिपल्स लिब्रेशन आर्मी’ बीते कुछ दिनों से लगातार युद्धाभ्यास कर रही है और इसके वीडियो और फोटो प्रसिद्ध किए जा रहे हैं। यह युद्धाभ्यास तैवान पर हमला करने की रिहर्सल होने के दावे चीन के सरकारी माध्यम कर रहे हैं। तभी, बीते सप्ताह में ही चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग ने चीन के लष्करी अड्डों का दौरा करके युद्ध के लिए तैयार रहने के आदेश दिए थे। इसके बाद चीन ने तैवान की सीमा से करीबी क्षेत्र में ‘हायपरसोनिक डीएफ-१७ मिसाइल’ और प्रगत ‘एस-४००’ हवाई सुरक्षा यंत्रणा तैनात करने की जानकारी सामने आयी थी। साथ ही ‘जे-२० स्टेल्थ’ लड़ाकू विमानों का समावेश होनेवाली २० ‘एअरफोर्स ब्रिगेडस्‌’ एवं ‘मरिन कोअर’ के १० दल तैवान के करीबी रक्षा अड्डों पर तैनात किए गए थे।

चीन ने तैवान के करीबी की हुई इन लष्करी गतिविधियों के कुछ ही घंटों में अमरीका ने तैवान को १३५ मिसाइलों की बिक्री का ऐलान किया। १.८ अरब डॉलर्स के इस सहयोग के तहत प्रदान किए जा रहे इन मिसाइलों की वजह से अपनी रक्षा तैयारी में बढ़ोतरी होगी, यह दावा तैवान कर रहा है। करीबन ३०० किलोमीटर मारक क्षमता के यह मिसाइल चीन के फुजियांग एवं ग्वांगदोग प्रांत के शहरों तक हमले कर सकते हैं। लेकिन, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ तैवान की किसी भी तरह से हथियारों की होड़ नहीं है और रणनीतिक संकल्पना के साथ और रक्षात्मक आवश्‍यकताओं के अनुसार तैवान यह हथियार खरीद रहा है, यह बात तैवान के रक्षामंत्री येन दे फा ने स्पष्ट की।

लेकिन, इस सहयोग की वजह से चीन क्रोधित हुआ है और अमरीका ने वर्ष १९७० के दशक में अमरीका और चीन के बीच स्थापित हुए समझौतों का उल्लंघन किया है, यह आरोप चीन के विदेश मंत्रालय ने किया है। तैवान चीन का अभिन्न अंग है और इस सहयोग की वजह से तैवान की आज़ादी की माँग कर रहे अलगाववादी गुटों को अमरीका ने गलत संकेत दिए हैं, ऐसी आलोचना चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने की है। इस सहयोग की वजह से अमरीका, चीन द्विपक्षीय संबंध अधिक बिगड़ने का आरोप लिजियान ने किया है। अमरीका के इस निर्णय के विरोध में जल्द ही कदम उठाए जाएंगे, अमरीका को प्रत्युत्तर प्राप्त होगा, यह इशारा चीन के विदेश मंत्रालय ने दिया है।

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